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संयुक्त अभियान में सुरक्षा बलों को मिली बड़ी सफलता
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रायफल, कारतूस और अन्य हथियार किए गए जब्त
मालकानगिरि/रायपुर। ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा से सटे छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में सुरक्षा बलों ने संयुक्त तलाशी अभियान के दौरान माओवादियों द्वारा छिपाकर रखे गए हथियारों और गोला-बारूद का बड़ा जखीरा बरामद किया है। यह कार्रवाई जिला पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की 58वीं बटालियन द्वारा संयुक्त रूप से चलाए गए अभियान के दौरान की गई।
घने जंगल में मिला छिपा हुआ हथियारों का जखीरा
नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल ने बताया कि माओवादी गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में नारायणपुर पुलिस और बीएसएफ की संयुक्त टीम ने कोहकामेटा थाना क्षेत्र के कच्छापाल के घने जंगलों में संदिग्ध स्थान पर तलाशी अभियान चलाया, जहां माओवादियों द्वारा छिपाकर रखा गया हथियारों का जखीरा बरामद हुआ।
रायफल, कारतूस और अन्य सामग्री जब्त
सुरक्षा बलों ने मौके से एक .303 रायफल, एक .315 रायफल, एक देशी बैरल लॉन्चर, .303 बोर के 17 जिंदा कारतूस, 7.62 मिमी के 10 जिंदा कारतूस, 12 बोर के चार कारतूस, एक खाली .303 मैगजीन, दो कारतूस भरने वाले उपकरण तथा .303 के तीन ट्रेसर रॉड बरामद किए। सभी हथियार और सामग्री जब्त कर कोहकामेटा थाने में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
माओवादियों के नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में बड़ी सफलता
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिले के माओवादी मुक्त क्षेत्रों में लगातार तलाशी अभियान चलाकर वर्षों से छिपाए गए हथियार, विस्फोटक और अन्य सामग्री बरामद की जा रही है। इस तरह की कार्रवाई से माओवादियों की भविष्य में हमले करने की क्षमता कमजोर होती है और उनके रसद तंत्र पर भी प्रभाव पड़ता है।
अबूझमाड़ क्षेत्र में घटा माओवादियों का प्रभाव
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में अबूझमाड़ और नारायणपुर के अंदरूनी क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की लगातार मौजूदगी, नए सुरक्षा शिविरों की स्थापना, सड़क संपर्क के विस्तार और नियमित अभियान के कारण माओवादियों का प्रभाव लगातार कम हुआ है। जो इलाके कभी दुर्गम और माओवादी गढ़ माने जाते थे, वहां अब सुरक्षा बल नियमित रूप से अभियान चला रहे हैं।
अधिकारियों ने कहा कि संयुक्त सुरक्षा अभियान केवल माओवादी गतिविधियों पर निगरानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके वर्षों पुराने हथियारों के भंडार को व्यवस्थित रूप से नष्ट करने की रणनीति के तहत भी कार्रवाई जारी है। इससे क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा स्थापित करने में मदद मिल रही है।
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