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दो माह बाद फिर शुरू हुई रत्न भंडार के आभूषणों की सूचीकरण प्रक्रिया

  •     रथयात्रा के दौरान पवित्र आभूषणों की हो रही 3डी स्कैनिंग

  •     पारदर्शी डिजिटल अभिलेख तैयार करने पर जोर

पुरी। श्रीजगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में सुरक्षित आभूषणों की सूचीकरण और सत्यापन प्रक्रिया लगभग दो माह के विराम के बाद रविवार से फिर शुरू हो गई। यह कार्य 23 मई से स्थगित था। रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहने के कारण मंदिर प्रशासन को उन पवित्र आभूषणों का दस्तावेजीकरण करने का अवसर मिला, जिनका सामान्य दिनों में नियमित रूप से उपयोग होता है।

सूचीकरण से पहले हुई उच्चस्तरीय बैठक

सूचीकरण कार्य शुरू होने से पहले सुबह 10 बजे एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक तथा रत्न भंडार सूचीकरण की निगरानी कर रही समिति के सदस्य शामिल हुए। बैठक में आभूषणों के दस्तावेजीकरण, सत्यापन और पूरी प्रक्रिया को मंदिर की पारंपरिक व्यवस्थाओं एवं निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप संपन्न कराने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

पवित्र आभूषणों की होगी 3डी स्कैनिंग

इस चरण में मुख्य रूप से भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के श्रृंगार में प्रयुक्त आभूषणों तथा हाल ही में संपन्न स्नान पूर्णिमा अनुष्ठान में उपयोग किए गए आभूषणों का सूचीकरण किया जा रहा है।

पिछले चरण में भगवान जगन्नाथ के कई आभूषणों का सत्यापन नहीं हो सका था, क्योंकि वे धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग में थे। स्नान पूर्णिमा के बाद इन आभूषणों को हटाकर मेकाप सेवायतों की अभिरक्षा में रखा गया था। अब इन्हें सूचीकरण प्रक्रिया में शामिल किया गया है।

जिन प्रमुख पवित्र आभूषणों का दस्तावेजीकरण किया जा रहा है, उनमें राहु रेखा, झोबा, सुना चिता, रूपा रसिका और सुना ठंठिया शामिल हैं।

आधुनिक तकनीक के उपयोग के तहत इन सभी आभूषणों की उच्च गुणवत्ता वाली 3डी स्कैनिंग भी की जा रही है, ताकि उनका सटीक डिजिटल अभिलेख तैयार किया जा सके और भविष्य में संरक्षण एवं सत्यापन का कार्य अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।

भीतरी रत्न भंडार की सूची बाद में होगी

मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान चरण में केवल देव विग्रहों से हटाए गए आभूषणों और स्नान पूर्णिमा से संबंधित सामग्री का ही सूचीकरण एवं सत्यापन किया जा रहा है।

रत्न भंडार के भीतरी कक्ष में सुरक्षित आभूषणों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की सूचीकरण एवं सत्यापन प्रक्रिया इस चरण में नहीं होगी। मंदिर प्रशासन ने बताया कि भीतरी रत्न भंडार की जांच और सूचीकरण का कार्यक्रम बाद में अलग से तय किया जाएगा।

डिजिटल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

मंदिर प्रशासन के अनुसार इस व्यापक सूचीकरण अभियान का उद्देश्य रत्न भंडार में सुरक्षित पवित्र आभूषणों का पारदर्शी एवं प्रमाणिक रिकॉर्ड तैयार करना है। साथ ही आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से इन अमूल्य धरोहरों का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित करना भी इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है।

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