पुरी: विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा के दौरान शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ, जब भगवान बलभद्र का रथ तालध्वज और देवी सुभद्रा का रथ दर्पदलन गुंडिचा मंदिर के सामने स्थित सरधा बाली पहुंच गए। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच भक्ति और उत्साह का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
सुबह से ही रथों का खींचना पुनः प्रारंभ हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालु बड़दांडा के दोनों ओर खड़े होकर इस पावन यात्रा के साक्षी बने। “जय जगन्नाथ” के जयघोष के बीच भक्तों ने रथ खींचकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।
गुरुवार को भगवान बलभद्र का तालध्वज रथ मार्केट चौक पर और देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ मार्चिकोट चौक पर रुक गया था, जबकि भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ सीमित दूरी तय कर ही रुक गया था।
तालध्वज और दर्पदलन के सरधा बाली पहुंचते ही पूरा क्षेत्र “जय जगन्नाथ” और “हरि बोल” के जयघोष तथा पारंपरिक हुलहुली ध्वनि से गूंज उठा, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने और भगवान के दर्शन के लिए उमड़ पड़े।
दोनों रथों के सफलतापूर्वक पहुंचने के बाद अब श्रद्धालुओं की उत्सुकता भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष रथ के आगमन को लेकर और बढ़ गई है। नंदीघोष के सरधा बाली पहुंचने के साथ ही गुंडिचा यात्रा का एक महत्वपूर्ण चरण पूर्ण होगा, जो रथयात्रा के प्रमुख अनुष्ठानों में से एक है।
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