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छात्रों की सभी प्रवेश फीस वहन करेगी ओडिशा सरकार
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उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज स्थिति की स्पष्ट
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बोले- जल्द जारी होगी अलग एसओपी
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सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में पूरी प्रवेश फीस वहन करेगी सरकार
भुवनेश्वर। ओडिशा में केजी (किंडरगार्टन) से लेकर पीजी (स्नातकोत्तर) तक निःशुल्क शिक्षा की घोषणा के बाद प्रवेश प्रक्रिया को लेकर पैदा हुए भ्रम का जल्द ही अंत होने वाला है। राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने घोषणा की है कि सरकार शीघ्र ही एक अलग मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करेगी, जिससे प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े सभी संदेह दूर हो जाएंगे और पूरे राज्य में प्रवेश व्यवस्था सुव्यवस्थित होगी।
मीडिया से बातचीत करते हुए मंत्री ने कहा कि केजी से पीजी तक प्रवेश प्रक्रिया को लेकर जो भ्रम की स्थिति बनी हुई है, उसे बहुत जल्द समाप्त कर दिया जाएगा। इसके लिए एक अलग एसओपी तैयार की जा रही है। इसके जारी होने के बाद प्रवेश से संबंधित सभी प्रक्रियाएं स्पष्ट हो जाएंगी।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार सहायता प्राप्त (ग्रांट-इन-एड) शिक्षण संस्थानों में छात्रों की पूरी प्रवेश फीस स्वयं वहन करेगी। हाल ही में राज्य मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार 662 और 488 श्रेणी के सहायता प्राप्त महाविद्यालयों को सरकार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी। पहले छात्रों से जो प्रवेश शुल्क लिया जाता था, अब उसकी भरपाई सरकार सीधे संस्थानों को करेगी।
संस्थानों की वित्तीय व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी
सरकार की ओर से मिलने वाली इस वित्तीय सहायता का उपयोग महाविद्यालयों के संचालन, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के वेतन, आवश्यक उपकरणों की खरीद तथा बिजली, टेलीफोन, इंटरनेट सहित अन्य दैनिक प्रशासनिक खर्चों के लिए किया जाएगा। इससे संस्थानों की वित्तीय व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी।
री-एडमिशन शुल्क भी नहीं लिया जाएगा
उच्च शिक्षा मंत्री ने यह भी घोषणा की कि छात्रों से पुनः प्रवेश (री-एडमिशन) शुल्क भी नहीं लिया जाएगा। हालांकि यह सुविधा स्ववित्तपोषित (सेल्फ-फाइनेंसिंग) पाठ्यक्रमों तथा निजी महाविद्यालयों पर लागू नहीं होगी।
सहायता प्राप्त महाविद्यालयों ने जताई थी चिंता
गौरतलब है कि राज्य मंत्रिमंडल ने हाल ही में केजी से पीजी तक निःशुल्क शिक्षा की ऐतिहासिक योजना को मंजूरी दी थी। इसके बाद कई सहायता प्राप्त महाविद्यालयों ने चिंता जताई थी कि छात्रों से मिलने वाले शुल्क पर उनकी प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था काफी हद तक निर्भर रहती है। शुल्क समाप्त होने की स्थिति में संस्थानों के नियमित खर्चों का प्रबंधन चुनौती बन सकता था।
आशंकाओं पर काफी हद तक विराम लगा
अब राज्य सरकार द्वारा प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता देने के निर्णय से इन आशंकाओं पर काफी हद तक विराम लगने की उम्मीद है। प्रस्तावित एसओपी में महाविद्यालयों को धनराशि जारी करने की समय-सीमा, सहायता की राशि तथा वितरण की प्रक्रिया सहित सभी पहलुओं को स्पष्ट किया जाएगा। इससे छात्रों को सरल, पारदर्शी और पूरी तरह किफायती उच्च शिक्षा व्यवस्था का लाभ मिल सकेगा।
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