Home / Odisha / इंडोनेशिया की संसद में मोदी ने की बीजू की तारीफ

इंडोनेशिया की संसद में मोदी ने की बीजू की तारीफ

  •     प्रधानमंत्री ने 1947 के साहसिक मिशन को किया नमन

  •     कहा- बीजू पटनायक के ऐतिहासिक अभियान ने भारत और इंडोनेशिया को किया और करीब

  •     दोनों देशों के समुद्री और ऐतिहासिक संबंधों को बताया साझेदारी की मजबूत नींव

जकार्ता/भुवनेश्वर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडोनेशिया की आधिकारिक यात्रा के दौरान मंगलवार को वहां की संसद को संबोधित करते हुए ओडिशा के महान जननायक बीजू पटनायक को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में इंडोनेशिया के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बीजू पटनायक द्वारा चलाया गया साहसिक बचाव अभियान भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को नई ऊंचाई देने वाला ऐतिहासिक क्षण था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया लगभग एक ही समय स्वतंत्र हुए और दोनों देशों के बीच मित्रता का संबंध स्वतंत्रता संग्राम के दौर से ही मजबूत रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इंडोनेशिया की आजादी का खुलकर समर्थन किया था।

बीजू पटनायक ने दोनों देशों को और करीब लाया

इंडोनेशियाई सांसदों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उस कठिन दौर में बीजू पटनायक ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना इंडोनेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री सुतन शाहरिर और उपराष्ट्रपति मोहम्मद हत्ता को सुरक्षित भारत पहुंचाने का साहसिक कार्य किया।

उन्होंने कहा कि उस समय आदरणीय बीजू पटनायक ने जिस प्रकार प्रधानमंत्री सुतन शाहरिर और उपराष्ट्रपति मोहम्मद हत्ता को सुरक्षित भारत लाकर दोनों देशों को और करीब लाने का कार्य कियावह इतिहास का गौरवशाली अध्याय है।

समुद्र ने कभी दूरी नहींबल्कि निकटता बढ़ाई

प्रधानमंत्री ने भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने समुद्री संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि समुद्र ने दोनों देशों को कभी अलग नहीं किया, बल्कि हमेशा जोड़ने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि समुद्री संपर्क दोनों देशों की साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार है और भविष्य में भी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देता रहेगा।

उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के लिए समुद्र कभी दूरी का प्रतीक नहीं रहाबल्कि यह हमेशा दोनों देशों के बीच एक सेतु रहा है और हमारे साझा भविष्य का महत्वपूर्ण आधार बना रहेगा।

1947 में बीजू पटनायक ने निभाई थी ऐतिहासिक भूमिका

वर्ष 1947 में जब इंडोनेशिया डच उपनिवेशवाद के खिलाफ स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ रहा था, तब भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के अनुरोध पर युवा पायलट बीजू पटनायक ने अत्यंत जोखिम भरा मिशन स्वीकार किया था।

उस समय डच प्रशासन ने इंडोनेशिया के प्रधानमंत्री सुतन शाहरिर और उपराष्ट्रपति मोहम्मद हत्ता को नजरबंद कर रखा था। कड़ी नाकेबंदी और विमान को मार गिराने की धमकियों के बावजूद बीजू पटनायक ने अपनी पत्नी एवं सह-पायलट ज्ञानवती पटनायक के साथ डगलस सी-47 डाकोटा विमान उड़ाकर इंडोनेशिया पहुंचने का साहसिक निर्णय लिया।

ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, बीजू पटनायक ने डच अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि उनके विमान पर हमला किया गया तो भारतीय हवाई क्षेत्र में डच विमानों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

सफल मिशन से इंडोनेशिया को मिला वैश्विक समर्थन

यह अभियान पूरी तरह सफल रहा और बीजू पटनायक इंडोनेशियाई नेताओं को सुरक्षित सिंगापुर के रास्ते 24 जुलाई 1947 को नई दिल्ली लेकर पहुंचे। इस मिशन के बाद इंडोनेशिया के नेताओं को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने डच सैन्य कार्रवाई का मुद्दा प्रभावी ढंग से उठाने का अवसर मिला और विश्व स्तर पर उनके स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला।

इंडोनेशिया आज भी बीजू पटनायक को अपने स्वतंत्रता संग्राम में सहयोग देने वाले महान अंतरराष्ट्रीय मित्रों में सम्मानपूर्वक याद करता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक संबंध आज रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय संपर्क जैसे अनेक क्षेत्रों में और अधिक मजबूत हो रहे हैं तथा दोनों देश भविष्य में भी मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, समृद्धि और सहयोग को नई दिशा देंगे।

Share this news

About desk

Check Also

IAT NEWS INDO ASIAN TIMES ओडिशा की खबर, भुवनेश्वर की खबर, कटक की खबर, आज की ताजा खबर, भारत की ताजा खबर, ब्रेकिंग न्यूज, इंडिया की ताजा खबर

जाजपुर में देह व्यापार गिरोह का भंडाफोड़

    दो महिलाओं समेत पांच हिरासत में     मुख्य डाकघर के पास मकान …