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नाटमंडप और भोगमंडप की मरम्मत पर रहेगा विशेष फोकस
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एएसआई, आईआईटी दिल्ली और श्रीमंदिर कोर समिति की संयुक्त टीम करेगी संरचनात्मक जांच
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रासायनिक उपचार और संरक्षण कार्य भी होगा
पुरी। विश्वप्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ मंदिर के संरक्षण और दीर्घकालिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए 18 जुलाई से व्यापक तकनीकी निरीक्षण शुरू किया जाएगा। इस दौरान मंदिर के ऐतिहासिक नाटमंडप और भोगमंडप की संरचनात्मक स्थिति की विशेष रूप से जांच की जाएगी तथा आवश्यक मरम्मत कार्य की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
इस संबंध में श्रीमंदिर कार्यालय में पुरी के जिलाधिकारी दिव्यज्योति परिडा की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई, जिसमें निरीक्षण और संरक्षण कार्यों को अंतिम रूप दिया गया।
निरीक्षण एएसआई, श्रीमंदिर कोर समिति और आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों की संयुक्त तकनीकी टीम करेगी। पहले चरण में मंदिर परिसर की समग्र सफाई और रखरखाव का कार्य किया जाएगा। इसके बाद नाटमंडप और भोगमंडप का विस्तृत तकनीकी परीक्षण कर आवश्यक मरम्मत और संरक्षण कार्य शुरू किए जाएंगे।
निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञ दोनों संरचनाओं का रासायनिक उपचार करेंगे तथा उनकी भार वहन क्षमता का वैज्ञानिक आकलन करने के लिए लोड-सेल संबंधी आंकड़े एकत्रित करेंगे। क्षतिग्रस्त खंडोलाइट पत्थरों की पहचान कर उन्हें बदला जाएगा। साथ ही रिसाव वाले पाइपों की मरम्मत तथा मंदिर की जल निकासी व्यवस्था से जुड़ी लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान भी किया जाएगा।
निरीक्षण का प्रारंभिक चरण 18 जुलाई तक पूरा होने की संभावना है। इसके बाद श्रीमंदिर प्रबंधन समिति की सिफारिशों के आधार पर समीक्षा बैठक आयोजित कर आगे के मरम्मत और संरक्षण कार्यों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
बैठक के बाद जिलाधिकारी दिव्यज्योति परिडा ने कहा कि पहले चरण में एएसआई और श्रीमंदिर कोर समिति के विशेषज्ञों द्वारा संयुक्त तकनीकी निरीक्षण किया जाएगा। उनकी विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद मंदिर की मरम्मत और संरक्षण से जुड़े सभी आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।
श्रीमंदिर का यह व्यापक तकनीकी निरीक्षण विश्व के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल इस ऐतिहासिक धरोहर की संरचनात्मक सुरक्षा और विरासत संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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