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तटीय कटाव से गंजाम के कई गांवों पर मंडराया खतरा
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मॉनसून के दौरान उफनते समुद्र ने निगल लिये गांव के आखिरी तीन मकान
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प्रशासन ने क्षेत्र को किया सील
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मार्ग को खाइयां खोदकर किया बंद
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लोगों की सुरक्षा के लिए “नो एंट्री” के बोर्ड लगाए
ब्रह्मपुर। ओडिशा के गंजाम जिले में लगातार बढ़ रहे तटीय कटाव ने एक और गंभीर चेतावनी दी है। समुद्र की तेज लहरों ने शुक्रवार को पोड़मपेटा गांव के अंतिम तीन परित्यक्त मकानों को भी अपने आगोश में ले लिया। इसके साथ ही यह गांव पूरी तरह समुद्र में समा गया और उसका अस्तित्व समाप्त हो गया।
समुद्र की ऊंची लहरें तटबंध को पार कर गांव के भीतर तक पहुंच गईं और एक निष्क्रिय चक्रवात आश्रय केंद्र के समीप तक फैल गईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने गांव की ओर जाने वाले मार्ग को खाइयां खोदकर बंद कर दिया तथा लोगों की सुरक्षा के लिए “नो एंट्री” के बोर्ड लगा दिए हैं। प्रशासन ने किसी भी व्यक्ति के गांव में प्रवेश पर रोक लगा दी है।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ा समुद्र का कहर
बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मॉनसून के कारण समुद्र बेहद उग्र हो गया है। ऊंची ज्वार के चलते तटीय कटाव तेज हो गया है। समुद्र ने न केवल गांव के शेष मकानों को निगल लिया, बल्कि सैकड़ों एकड़ में फैले काजू और कैसुआरिना (झाऊ) के बागानों को भी नुकसान पहुंचाया है।
अधिकारियों की मौजूदगी में की गई कार्रवाई
गांव को सील करने की कार्रवाई तहसीलदार सुकांत चंद्र मिश्र, बीडीओ अच्युतानंद जानी, हुमा चौकी प्रभारी बिनायक दास, राजस्व निरीक्षक सीताराम साहू तथा अमीन लालकृष्ण दास की उपस्थिति में की गई।
आसपास के गांवों में भी बढ़ी चिंता
तटीय कटाव का खतरा केवल पोड़मपेटा तक सीमित नहीं है। आसपास के गांवों में भी ऊंची ज्वार के दौरान समुद्र का पानी प्रवेश करने लगा है। विशेष रूप से कांटियागड़ा गांव को अत्यधिक संवेदनशील माना जा रहा है। गांव के लोग इस आशंका से भयभीत हैं कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो उनका गांव भी समुद्र की चपेट में आ सकता है।
विधायक के अनुरोध पर कलेक्टर ने की ग्रामीणों के साथ बैठक
छत्रपुर के विधायक कृष्ण चंद्र नायक ने गंजाम के जिलाधिकारी वी कीर्ति वासन से प्रभावित ग्रामीणों के साथ बैठक करने का अनुरोध किया। इसके बाद जिलाधिकारी ने कांटियागड़ा, खटुआकुड़ा और नीलाद्रीपुर गांवों के लोगों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनीं और शीघ्र आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया। बैठक में विधायक भी मौजूद रहे।
निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
जिलाधिकारी ने छत्रपुर उपजिलाधिकारी के नेतृत्व में सिंचाई विभाग के अधिकारियों की एक टीम को प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि नदी के मुहाने में गाद जमने का मामला तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) के दायरे में आता है, इसलिए इस संबंध में नियमों का पालन आवश्यक होगा।
ऑलिव रिडले कछुओं के कारण विशेष अनुमति जरूरी
रुषिकुल्या नदी का मुहाना, जहां बंगाल की खाड़ी और नदी का संगम होता है, विलुप्तप्राय ऑलिव रिडले समुद्री कछुओं के घोंसले बनाने और प्रवास का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। इसलिए यहां किसी भी प्रकार के इंजीनियरिंग या पुनर्स्थापन कार्य के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी।
नदी का बदला मार्ग बना तटीय कटाव की बड़ी वजह
अधिकारियों के अनुसार, समय के साथ रुषिकुल्या नदी के मुहाने का मार्ग बदल गया है। पहले नदी का मुहाना रुषिकुल्या पुल के समीप था, जिससे समुद्र और नदी के बीच ज्वार का पानी स्वाभाविक रूप से प्रवाहित हो जाता था और तट पर अधिक कटाव नहीं होता था। लेकिन अब पोड़मपेटा के निकट नया नदी मुहाना बनने से समुद्री धाराएं सीधे तट से टकरा रही हैं। इससे तटीय कटाव तेजी से बढ़ा है और गंजाम के कई तटीय गांव गंभीर खतरे की जद में आ गए हैं।
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