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बिना शोर किए बदल रहीं हजारों जिंदगियां

  • बिना किसी पहचान, पुरस्कार या प्रचार की इच्छा के दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने में जुटी हैं ‘मोड़ा मां’

  • तीन दशक से निस्वार्थ सेवा से बदल रहीं हजारों ज़िंदगियां

  • शिक्षा से लेकर दिव्यांग सेवा, महिला सशक्तिकरण, परिवारों को जोड़ने और राहगीरों की सेवा तक… सम्पत्ति मोड़ा ने समाज सेवा को बनाया जीवन का संकल्प

भुवनेश्वर।  किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत वे लोग होते हैं, जो बिना किसी पहचान, पुरस्कार या प्रचार की इच्छा के दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने में जुटे रहते हैं। ऐसे लोग अपने काम से नहीं, बल्कि लोगों की दुआओं से पहचाने जाते हैं। ओडिशा के कटक की समाजसेविका, लेखिका और स्वयंसेविका सम्पत्ति मोड़ा ऐसी ही प्रेरणादायी शख्सियत हैं, जो बिना शोर किए बदल रहीं हैं हजारों ज़िंदगियां।

कटक की गलियों और बस्तियों में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो उन्हें “मोड़ा मां” के नाम से न जानता हो। बच्चों के लिए वे स्नेहमयी मां हैं, बुजुर्गों के लिए सहारा, जरूरतमंदों के लिए उम्मीद और समाज के लिए सेवा की जीवंत मिसाल। पिछले लगभग 30 वर्षों से वे चुपचाप हजारों लोगों के जीवन में खुशियों के रंग भर रही हैं।

सेवा नहीं, जीवन का उद्देश्य है मानवता

सम्पत्ति मोड़ा के लिए समाज सेवा कोई शौक या सामाजिक गतिविधि नहीं, बल्कि जीवन का मूल उद्देश्य है। वर्ष 1996 से उन्होंने अपने जीवन को पूरी तरह समाज के नाम समर्पित कर दिया। उनका एक ही सिद्धांत है कि अगर हमारी वजह से किसी के चेहरे पर मुस्कान आ जाए, तो वही सबसे बड़ी सफलता है।

इसी विचार के साथ वे आज सैकड़ों स्थानीय, राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय सामाजिक संगठनों से जुड़कर विभिन्न जनकल्याणकारी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

दिव्यांग बच्चों के सपनों को दे रही हैं नई उड़ान

मोड़ा मां का सबसे अधिक लगाव दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों से है। वे मानती हैं कि हर बच्चे में प्रतिभा होती है, बस उसे अवसर और प्रोत्साहन की जरूरत होती है।

यही कारण है कि वे वर्षों से दिव्यांग बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। आर्थिक सहायता से लेकर आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने और परिवारों का मनोबल बढ़ाने तक, वे हर स्तर पर सहयोग करती हैं।

उनकी प्रेरणा से कई बच्चे आज पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

शिक्षा को बनाया समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा हथियार

सम्पत्ति मोड़ा का विश्वास है कि यदि किसी गरीब बच्चे को शिक्षा मिल जाए तो केवल उसका ही नहीं, पूरे परिवार का भविष्य बदल सकता है।

इसी सोच के साथ सम्पत्ति मोड़ा फाउंडेशन वर्तमान में छह जरूरतमंद विद्यार्थियों की शिक्षा का पूरा खर्च उठा रही है। इनमें उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्र भी शामिल हैं।

विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्र चिनु, जो साइबर सिक्योरिटी में बीटेक की पढ़ाई कर रहा है, उसकी संपूर्ण शैक्षणिक जिम्मेदारी भी फाउंडेशन ने उठाई है।

मोड़ा मां कहती हैं कि किसी बच्चे की फीस भरना केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उसके सपनों में विश्वास जताना है।

महिला सशक्तिकरण को बनाया सामाजिक अभियान

महिलाओं के सम्मान और आत्मनिर्भरता को लेकर भी सम्पत्ति मोड़ा लगातार सक्रिय हैं।

वे कन्या भ्रूण संरक्षण, बालिका शिक्षा, महिला स्वावलंबन, महिला अधिकार और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर विभिन्न अभियानों का हिस्सा रही हैं।

उनका मानना है कि जब एक महिला शिक्षित और आत्मनिर्भर बनती है, तब केवल उसका नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज का विकास होता है।

जहां रिश्ते टूटते हैं, वहां उम्मीद बनकर पहुंचती हैं मोड़ा मां

आज के दौर में बढ़ते पारिवारिक विवादों के बीच सम्पत्ति मोड़ा ने एक अनोखा सामाजिक दायित्व निभाया है।

पति-पत्नी के बीच मतभेद, परिवारों में बढ़ती दूरियां और गलतफहमियों को बातचीत और आपसी विश्वास के माध्यम से दूर करने का वे वर्षों से प्रयास करती रही हैं।

उनकी शांत, सौम्य और सकारात्मक सोच ने अनेक परिवारों को फिर से एक कर दिया। जिन घरों में कभी सन्नाटा था, वहां आज फिर हंसी गूंज रही है।

26 वर्षों से राहगीरों की प्यास बुझा रही हैं सेवा की यह परंपरा

सम्पत्ति मोड़ा की सेवा यात्रा का सबसे भावनात्मक अध्याय वर्ष 1999 में शुरू हुआ, जो आज भी बिना रुके जारी है।

हर वर्ष भीषण गर्मी में वे स्वयं राहगीरों को ठंडी नींबू शिकंजी पिलाती हैं। इसके साथ ही समय-समय पर अंगूर, तरबूज और अन्य मौसमी फलों का वितरण भी करती हैं।

गर्मी से बेहाल राहगीरों के लिए यह सेवा केवल शीतल पेय नहीं, बल्कि अपनत्व का एहसास बन जाती है।

हर रविवार जरूरतमंदों के लिए स्नेह का अल्पाहार

मोड़ा मां की सेवा यहीं नहीं रुकती। प्रत्येक रविवार सुबह लगभग 200 जरूरतमंद लोगों और राहगीरों के लिए नाश्ते की व्यवस्था की जाती है। कभी समोसा-जलेबी, कभी बीरी कचौड़ी-आलू सब्जी तो कभी खीर-पूरी-हर सप्ताह स्वाद बदलता है, लेकिन सेवा का भाव वही रहता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से यह अभियान बिना किसी प्रचार, बैनर या दिखावे के निरंतर चल रहा है। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।

लेखन के माध्यम से भी समाज को दे रही हैं सकारात्मक दिशा

समाज सेवा के साथ-साथ सम्पत्ति मोड़ा एक संवेदनशील लेखिका और स्तंभकार भी हैं। उनके लेख सामाजिक जागरूकता, मानवीय मूल्यों और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं।

वे मानती हैं कि कलम केवल विचार व्यक्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने का सबसे प्रभावी साधन भी है।

लोगों के दिलों में बसता है ‘मोड़ा मां’ का नाम

कई लोग समाज सेवा करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग लोगों के दिलों में जगह बना पाते हैं।

सम्पत्ति मोड़ा ने यह स्थान किसी पद, पुरस्कार या प्रचार से नहीं, बल्कि अपने व्यवहार, संवेदनशीलता और निस्वार्थ सेवा से हासिल किया है। उनके लिए हर जरूरतमंद व्यक्ति परिवार का सदस्य है और हर मुस्कान सबसे बड़ा सम्मान।

आज कटक ही नहीं, बल्कि पूरे ओडिशा में “मोड़ा मां” सेवा, करुणा, संवेदना और मानवीय मूल्यों की ऐसी पहचान बन चुकी हैं, जो यह संदेश देती है कि समाज बदलने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े दिल की आवश्यकता होती है।

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