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लखनऊ अग्निकांड के बाद ओएसडीएमए का निर्देश, 15 दिनों में रिपोर्ट सौंपने के आदेश
भुवनेश्वर। ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ओएसडीएमए) ने राज्यभर के सभी विद्यालयों, महाविद्यालयों, कोचिंग केंद्रों और कौशल विकास संस्थानों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की तत्काल समीक्षा और ऑडिट कराने का निर्देश दिया है। यह निर्णय उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुई दुखद अग्निकांड की घटना के बाद लिया गया है, ताकि विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
ओएसडीएमए के प्रबंध निदेशक एवं विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल ने सभी जिलाधिकारियों तथा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के अध्यक्षों को जारी निर्देश में कहा है कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत को देखते हुए सभी संस्थानों का तत्काल निरीक्षण किया जाए और ओडिशा अग्नि निवारण एवं अग्नि सुरक्षा नियम-2017 तथा संशोधित नियम-2025 सहित अन्य सुरक्षा प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
व्यापक अग्नि सुरक्षा जांच के निर्देश
जिला प्रशासन सभी शिक्षण परिसरों का विशेष अभियान चलाकर निरीक्षण करेगा। बहुमंजिला भवनों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में संचालित संस्थानों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। निरीक्षण दल अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र और अनापत्ति प्रमाणपत्रों की वैधता की जांच करेंगे। साथ ही अग्निशामक यंत्र, धुआं पहचानने वाले उपकरण, स्वचालित चेतावनी प्रणाली और आपातकालीन प्रकाश व्यवस्था की कार्यक्षमता भी परखी जाएगी।
ज्वलनशील सामग्री रखने पर रोक
कक्षाओं, गलियारों और निकासी मार्गों में ज्वलनशील सामग्री रखने पर रोक लगाई गई है। विद्युत व्यवस्थाओं का नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने तथा पर्याप्त सुरक्षित निकास मार्ग और स्पष्ट संकेतक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए अग्निशामक यंत्रों के उपयोग का प्रशिक्षण और नियमित अभ्यास भी अनिवार्य किया गया है।
सुरक्षित निकासी व्यवस्था पर जोर
ओएसडीएमए ने कहा है कि किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसलिए सभी मुख्य द्वार, सीढ़ियां, गलियारे और आपातकालीन निकास मार्ग हर समय अवरोधमुक्त रखे जाएं। निकास मार्ग, एकत्रीकरण स्थल और आपातकालीन संपर्क नंबरों के स्पष्ट संकेतक लगाए जाएं। निकासी मार्गों पर स्थित सभी दरवाजे बाहर की ओर खुलने वाले और आसानी से उपयोग योग्य होने चाहिए।
नियमित अभ्यास और जागरूकता कार्यक्रम
सभी शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थानों को प्रत्येक तिमाही में अग्नि सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। अग्निशमन सेवा और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से नियमित अभ्यास कराया जाएगा। प्रत्येक संस्थान में अग्नि सुरक्षा वार्डन और नोडल अधिकारी नियुक्त कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
आपातकालीन तैयारी अनिवार्य
प्रत्येक संस्थान को अपने परिसर की संरचना के अनुरूप आपातकालीन प्रतिक्रिया और निकासी योजना तैयार कर प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित करनी होगी। अग्निशमन सेवा, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और जिला आपात संचालन केंद्र के संपर्क विवरण अद्यतन रखने के साथ त्वरित सूचना और प्रतिक्रिया की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।
किराये के भवनों और छात्रावासों पर विशेष नजर
जिला स्तरीय निरीक्षण दलों को किराये के भवनों, व्यावसायिक परिसरों, बेसमेंट में संचालित संस्थानों तथा अधिक छात्र संख्या वाले परिसरों की विशेष जांच करने को कहा गया है। छात्रावासों और आवासीय प्रशिक्षण केंद्रों में भी अग्नि सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
नियम उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
राजस्व, अग्निशमन सेवा, विद्यालय एवं उच्च शिक्षा तथा कौशल विकास विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम निरीक्षण करेगी। जिन संस्थानों में पर्याप्त और कार्यशील अग्नि सुरक्षा व्यवस्था नहीं मिलेगी, उनके खिलाफ तत्काल नियामकीय कार्रवाई की जाएगी और निर्धारित समय सीमा में सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए जाएंगे।
ओएसडीएमए ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे 15 दिनों के भीतर निरीक्षण किए गए संस्थानों की संख्या, पाई गई कमियों और की गई सुधारात्मक कार्रवाई का समेकित प्रतिवेदन प्राधिकरण को सौंपें।
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