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स्मृति न्यास ने जांच आयोग की रिपोर्ट जारी कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की उठाई मांग
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कहा-निश्चित समयसीमा में स्वामी लक्ष्मणानंद हत्याकांड की जांच रिपोर्ट खोजी जाए
भुवनेश्वर। स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती हत्याकांड से संबंधित जांच आयोग की रिपोर्ट को खोजकर सार्वजनिक किए जाने तथा मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती स्मृति न्यास ने की है।
न्यास के एक प्रतिनिधिमंडल ने 14 जून को ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से मुलाकात कर स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या तथा उसके बाद हुई हिंसा से संबंधित जांच आयोग की लापता रिपोर्ट के मुद्दे पर एक ज्ञापन सौंपा।
मंगलवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में न्यास के अध्यक्ष स्वामी जीवनमुक्तानंद पुरी व न्यासी रुपेन्द्र कहँर ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष इस मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में विभिन्न समाचार माध्यमों और सार्वजनिक चर्चाओं में जांच आयोग की रिपोर्ट के गायब या लापता होने की खबरें सामने आने से राज्यभर में असंतोष और संदेह का माहौल बना है।न्यास पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से कहा कि यह विषय स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के अनुयायियों और आम जनता की भावनाओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी निष्पक्ष, पारदर्शी और शीघ्र जांच आवश्यक है।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मांग की कि निर्धारित समयसीमा के भीतर जांच आयोग की लापता रिपोर्ट का पता लगाया जाए तथा इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों अथवा जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही, स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या की साजिश में शामिल सभी दोषियों को कानून के अनुसार दंडित किया जाए।
हिन्दुत्व की रक्षा तथा जनजातीय समाज के हितों के संरक्षण के लिए उनके द्वारा किये गये कार्यो के लिए पूरा समाज उनका ऋणी रहेगा। स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती गैर कानूनी तरीके से भोले भाले लोगों को कनवर्ट कराने का आजीवन विरोध किया।
उन्होंने कहा कि 1926 में वर्तमान के अनुगुल जिले में जन्में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का इस वर्ष सौवां जयंती वर्ष है। इस वर्ष हम साल भर उनकी स्मृति में आयोजन करने वाले हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में उनकी हत्या की जांच करने वाली न्यायिक कमिशन की रिपोर्ट गुम हो जाने संबंधी खबरें मीडिया के जरिये जानने के बाद उन्हें काफी दुःख हो रहा है।
न्यास ने यह भी मांग की कि जस्टिस शरत चंद्र महापात्र की अंतरिम रिपोर्ट तथा जस्टिस वासुदेव पाणिग्राही आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, ताकि आम लोग मामले से जुड़े तथ्यों और जांच के निष्कर्षों से अवगत हो सकें।
न्यास के पदाधिकारियों का कहना है कि इन रिपोर्टों को सार्वजनिक करने से लंबे समय से चले आ रहे विवाद और संदेह की स्थिति को दूर करने में मदद मिलेगी तथा लोगों का न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास और मजबूत होगा।
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