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जनस्वास्थ्य के लिए बन चुकी है गंभीर समस्या
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आरएसएसडीआई ओडिशा के मध्यावधि सम्मेलन में मधुमेह पर मंथन
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मधुमेह प्रबंधन पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
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एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज में जुटे राज्यभर के चिकित्सक
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शोधार्थी और स्वास्थ्य विशेषज्ञ
ब्रह्मपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से फैल रही मधुमेह की बीमारी अब जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और जागरूकता की कमी के कारण मधुमेह के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे हृदय रोग, किडनी फेलियर और अन्य जटिल बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। इसी बढ़ती चिंता के बीच आरएसएसडीआई ओडिशा के मध्यावधि सम्मेलन में राज्यभर के चिकित्सकों, शोधार्थियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मधुमेह की रोकथाम, आधुनिक उपचार और प्रभावी प्रबंधन पर व्यापक मंथन किया। एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में आयोजित इस सम्मेलन में विशेषज्ञों ने समय पर पहचान, स्वस्थ जीवनशैली और जनजागरूकता को मधुमेह नियंत्रण का सबसे प्रभावी उपाय बताया।
आरएसएसडीआई ओडिशा का मध्यावधि सम्मेलन आज एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के नए ऑडिटोरियम में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। सम्मेलन में राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों से लगभग 250 फैकल्टी सदस्य, चिकित्सक, डायबिटोलॉजिस्ट, स्नातकोत्तर छात्र तथा स्वास्थ्यकर्मी उत्साहपूर्वक शामिल हुए। इस मौके पर डॉ संजय दाश चेयरमैन, आरएसएसडीआई ओडिशा, डॉ सुरेश के बंसल चैप्टर सचिव, डा जे सागर पृष्टि विशेष अतिथि, प्रोफेसर और एचओडी, एनाटॉमी डिपार्टमेंट, डा प्रमोद कुमार पटनायक आयोजन अध्यक्ष, मिडटर्म आरएसएसडीआई, डॉ निहार रंजन साहू, आयोजन सचिव मिडटर्म आरएसएसडीआई की गरिमायी उपस्थिति रही।
मधुमेह से कई बीमारियों का खतरा बढ़ा
विशेषज्ञों ने सम्मेलन में कहा कि मधुमेह अब शहरी ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी से फैल रही गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। उन्होंने बताया कि डायबिटीज के कारण हृदय रोग, किडनी फेलियर, अंधापन, स्ट्रोक, न्यूरोपैथी, डायबिटिक फुट रोग जैसी कई गंभीर और जानलेवा जटिलताओं का खतरा बढ़ रहा है।
उद्घाटन समारोह में शामिल हुए वरिष्ठ चिकित्सक
सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में कई वरिष्ठ शिक्षाविद और आरएसएसडीआई ओडिशा के पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए डॉ जामी सागर पृष्टि ने आरएसएसडीआई ओडिशा द्वारा वैज्ञानिक शिक्षा, अकादमिक संवाद और मधुमेह जागरूकता को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की।
शुरुआती पहचान और जीवनशैली सुधार पर जोर
डॉ संजय दास ने मधुमेह की शुरुआती पहचान, नियमित जांच, स्वस्थ खानपान, व्यायाम, जीवनशैली में बदलाव और रोगी जागरूकता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ते मधुमेह के बोझ को नियंत्रित करने के लिए चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के समन्वित प्रयास जरूरी हैं।
आधुनिक उपचार और व्यक्तिगत देखभाल पर चर्चा
डॉ सुरेश बंसल ने मधुमेह उपचार में हो रही नई प्रगति और मरीजों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार इलाज की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
वहीं डॉ सत्यानारायण कर ने चिकित्सकों के लिए निरंतर चिकित्सा शिक्षा और वैज्ञानिक जानकारी से अपडेट रहने की जरूरत बताई।
नई चिकित्सा पद्धतियों पर हुए वैज्ञानिक सत्र
सम्मेलन के आयोजन अध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार पटनायक ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया और विभिन्न संस्थानों से आए शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।
वैज्ञानिक सचिव डॉ सुनील कुमार कोटा ने वैज्ञानिक सत्रों का संचालन किया। इन सत्रों में मधुमेह की नई उपचार पद्धतियों, मोटापा, उच्च रक्तचाप, मेटाबोलिक सिंड्रोम, डायबिटिक किडनी रोग, हृदय संबंधी जोखिम में कमी और समग्र मधुमेह प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
सम्मेलन को बताया शैक्षणिक रूप से महत्वपूर्ण
मध्यावधि सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ निहार रंजन साहू ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, प्रतिनिधियों, प्रायोजकों और आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के वैज्ञानिक सम्मेलन अकादमिक सहयोग को मजबूत करने और नवीन चिकित्सा ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से मरीजों की देखभाल में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञ व्याख्यान और संवाद से मिला लाभ
सम्मेलन में विभिन्न वैज्ञानिक प्रस्तुतियां, विशेषज्ञ व्याख्यान और इंटरैक्टिव चर्चाएं आयोजित की गईं। इससे प्रैक्टिस कर रहे चिकित्सकों, स्नातकोत्तर छात्रों और मधुमेह प्रबंधन से जुड़े स्वास्थ्यकर्मियों को काफी लाभ मिला। राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिनिधियों के बीच वैज्ञानिक विचारों के आदान-प्रदान के साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ।
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