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आईआईटी खड़गपुर और एसपीए भोपाल से हुआ समझौता
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आधुनिक तकनीक से होगा मंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण
भुवनेश्वर। ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य पुरातत्व विभाग ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर और स्कूल ऑफ़ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल के साथ गैर-वित्तीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह कार्यक्रम भुवनेश्वर स्थित संस्कृतिभवन में आयोजित हुआ।
इस सहयोग का उद्देश्य आधुनिक विज्ञान और तकनीक के माध्यम से ओडिशा के ऐतिहासिक स्मारकों, मंदिरों, विरासत स्थलों और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और विकास को मजबूत करना है।
तकनीक का होगा उपयोग
आईआईटी खड़गपुर के साथ हुए समझौते के तहत एलआईडीएआर, 3डी डॉक्यूमेंटेशन, स्ट्रक्चरल एनालिसिस, डिजिटल मैपिंग, जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस), रिमोट सेंसिंग और वैज्ञानिक संरक्षण पद्धतियों जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
इसके साथ ही विरासत संरक्षण के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और बहुविषयक ज्ञान के समन्वय पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
एसपीए भोपाल देगा तकनीकी और वास्तु संरक्षण सहयोग
एसपीए भोपाल के साथ साझेदारी के तहत विरासत नियोजन, संरक्षण वास्तुकला, संग्रहालय और प्रदर्शनी डिजाइन, वास्तु दस्तावेजीकरण, तकनीकी सलाह और क्षमता विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा।
294 स्मारकों को मिलेगा लाभ: सूर्यवंशी सूरज
कार्यक्रम में ओडिशा के संस्कृति मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि यह पहल राज्य की विरासत संपत्तियों के संरक्षण और विकास में परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगी।
उन्होंने बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन लगभग 82 स्मारक और ओडिशा राज्य पुरातत्व विभाग के अधीन करीब 212 स्मारक इस पहल से लाभान्वित होंगे।
मंत्री ने कहा कि ओडिशा की विरासत और स्थापत्य कला ने राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है। इन ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण करना और आने वाली पीढ़ियों को इनके महत्व से अवगत कराना हमारी जिम्मेदारी है।
मंदिरों और ऐतिहासिक संरचनाओं की सुरक्षा पर विशेष जोर
उन्होंने कहा कि इस सहयोग के माध्यम से आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटल दस्तावेजीकरण और विरासत स्थलों के सतत विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। राज्यभर के मंदिरों, स्मारकों और ऐतिहासिक संरचनाओं की सुरक्षा और दीर्घकालिक संरक्षण को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।
एनईपी 2020 के तहत छात्रों को मिलेगा इंटर्नशिप अवसर
कार्यक्रम के दौरान यह भी घोषणा की गई कि नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत ओडिशा के 10 छात्रों को विरासत और स्थापत्य संरक्षण के क्षेत्र में आईआईटी खड़गपुर में इंटर्नशिप का अवसर मिलेगा। इस अवसर पर ओडिशा राज्य पुरातत्व विभाग के आधिकारिक लोगो का भी अनावरण किया गया।
कई शिक्षाविद और अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में ओड़िया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ विजय केतन उपाध्याय, विशेष सचिव देव प्रसाद दास, उपनिदेशक डॉ देवजानी, ओडिशा साहित्य अकादमी के सचिव डॉ चंद्रशेखर होता, आईआईटी खड़गपुर के प्रो गौरव दास महापात्र, एसपीए भोपाल के निदेशक प्रो कैलाश राव, उत्कल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो चंडी प्रसाद नंद और संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो प्रसन्न कुमार स्वाईं सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
तकनीक और शोध के जरिए विरासत संरक्षण पर सरकार का फोकस
यह सहयोग राज्य सरकार के उस बढ़ते प्रयास को दर्शाता है, जिसके तहत तकनीक, शोध और शैक्षणिक विशेषज्ञता को जोड़कर ओडिशा की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार को मजबूत किया जा रहा है।
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