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वैश्य इंटरनेशनल एसोसिएशन देगी 1 लाख तक की ब्याजमुक्त सहायता
भुवनेश्वर। आर्थिक तंगी और महंगे ब्याज दरों के बीच अब सामाजिक संस्थाएं भी लोगों को राहत देने के लिए आगे आने लगी हैं। वैश्य इंटरनेशनल एसोसिएशन ने जरूरतमंद लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए ₹1 लाख तक की ब्याजमुक्त वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है।
यह घोषणा अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच के पूर्व उपाध्यक्ष अक्षय खंडेलवाल ने भुवनेश्वर में मारवाड़ी युवा मंच भुवनेश्वर शाखा के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान की। उन्होंने कहा कि आज के समय में छोटे व्यवसायियों और जरूरतमंद लोगों को मामूली आर्थिक सहायता के लिए भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बैंकों की जटिल प्रक्रियाओं और ऊंची ब्याज दरों के कारण गरीब एवं मध्यमवर्गीय लोग कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं।
उन्होंने बताया कि वैश्य इंटरनेशनल एसोसिएशन की इस अनोखी योजना के तहत जरूरतमंद लोगों को व्यवसाय शुरू करने या आर्थिक संकट से उबरने के लिए ₹1 लाख तक की सहायता दी जाएगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इस राशि पर किसी प्रकार का ब्याज नहीं लिया जाएगा। लाभार्थी अपनी क्षमता और बजट के अनुसार प्रतिदिन ₹50 या ₹100 जैसी छोटी-छोटी किस्तों में राशि वापस कर सकेंगे, ताकि यह सहायता आगे दूसरे जरूरतमंद लोगों तक भी पहुंचती रहे।
खंडेलवाल ने कहा कि जो महिलाएं ग्रामीण इलाकों में हैं, वह किसी भी तरह से किसी भी फोरम पर पहुंच नहीं पाती हैं, उनको इसका विशेष लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि भुवनेश्वर मारवाड़ी युवा मंच से संपर्क करके वह इस सेवा का लाभ ले सकती हैं।
अक्षय खंडेलवाल ने कहा कि जो लोग पहले से 5% या 10% ब्याज दर पर निजी कर्ज लेकर परेशान हैं, वे भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। ऐसे लोग संस्था से आर्थिक सहायता लेकर अपने पुराने कर्ज का भुगतान कर सकते हैं और फिर धीरे-धीरे बिना ब्याज के संस्था को राशि लौटा सकते हैं।
फिलहाल इस योजना की शुरुआत भुवनेश्वर में मारवाड़ी युवा मंच भुवनेश्वर शाखा के माध्यम से की गई है। इच्छुक और जरूरतमंद लोग शाखा के पदाधिकारियों से संपर्क कर योजना की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि देश में आर्थिक सहायता और स्वरोजगार को लेकर सरकार की कई योजनाएं मौजूद हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि उन योजनाओं का लाभ अक्सर जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच पाता। ऐसे में सामाजिक संस्थाओं द्वारा उठाया गया यह कदम छोटे व्यापारियों, श्रमिकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।
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