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महिला आरक्षण को मिला समर्थन
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नारी शक्ति वंदन अधिनियम को जल्द लागू करने की मांग
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2029 तक क्रियान्वयन का लक्ष्य
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30 अप्रैल को आयोजित विशेष सत्र करीब 14 घंटे तक चला
भुवनेश्वर। ओडिशा विधानसभा में महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया। 30 अप्रैल 2026 को आयोजित यह सत्र करीब 14 घंटे तक चला, जिसमें महिलाओं की लोकतंत्र में भागीदारी पर विस्तृत चर्चा हुई।
33% आरक्षण पर बनी सहमति
इस अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है। सभी दलों की लंबी बहस के बाद सदन ने 2029 के आम चुनाव तक इसके पूर्ण क्रियान्वयन का समर्थन किया।
सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने
विशेष सत्र में सत्तापक्ष और विपक्ष बहस के दौरान आमने-सामने दिखा। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि राज्य की आबादी का आधा हिस्सा महिलाएं हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक भागीदारी अभी भी कम है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस कानून के पारित होने का श्रेय दिया और ‘सुभद्रा योजना’ जैसी पहलों का उल्लेख किया।
विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने कहा कि बीजेडी ने पहले ही स्थानीय निकायों में महिलाओं को 33% से बढ़ाकर 50% आरक्षण दिया है। हालांकि, उन्होंने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने का विरोध किया।
तीखी बहस के बीच पारित हुआ प्रस्ताव
सत्र के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, लेकिन अंततः सभी ने महिलाओं को नीति निर्माण में अधिक भागीदारी देने की आवश्यकता पर सहमति जताई।
महिला सशक्तिकरण को मिलेगा नया बल
इस प्रस्ताव के पारित होने से देशभर में 2029 तक महिला आरक्षण लागू करने की मांग को और मजबूती मिली है और ओडिशा ने इस दिशा में अहम पहल की है।
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