Home / Odisha / दैनिक जीवन में संवैधानिक मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान

दैनिक जीवन में संवैधानिक मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान

  •     ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय में आंबेडकर जयंती मनी

कोरापुट। ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूओ), कोरापुट ने अपने मुख्य परिसर, सुनाबेड़ा स्थित सेमिनार हॉल में भारत रत्न डॉ भीमराव रामजी आंबेडकर की 136वीं जयंती को अत्यंत श्रद्धा, शैक्षणिक उत्साह और संस्थागत गौरव के साथ मनाया। इस कार्यक्रम में भारतीय संविधान के शिल्पकार तथा सामाजिक न्याय, समानता और मानवीय गरिमा के महान प्रवक्ता डॉ बीआर आंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।

अपने स्वागत भाषण में अर्थशास्त्र विभाग के सह-प्राध्यापक एवं कार्यक्रम के संयोजक डॉ प्रशांत कुमार बेहरा ने सभी विशिष्ट अतिथियों एवं प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने डॉ आंबेडकर के जीवन, संघर्षों और बहुआयामी योगदानों का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए उन्हें एक महान समाज सुधारक, अर्थशास्त्री, विधिवेत्ता एवं राष्ट्र निर्माता के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने समकालीन भारत में समावेशी विकास और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में आंबेडकर के विचारों की प्रासंगिकता पर भी बल दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं सीयूओ के माननीय प्रभारी कुलपति प्रो (डॉ) नरसिंह चरण पंडा ने अपने प्रेरणादायी और विचारोत्तेजक संबोधन में आधुनिक भारत के निर्माण में डॉ आंबेडकर के अद्वितीय योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने उनके बौद्धिक कौशल, संवैधानिक दृष्टिकोण और वंचित वर्गों के उत्थान के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने शिक्षा को एक परिवर्तनकारी साधन बताते हुए विद्यार्थियों और शिक्षकों से अपने दैनिक जीवन में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे संवैधानिक मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया। उनका संबोधन समावेशी और प्रगतिशील समाज के निर्माण में आंबेडकर के विचारों की सतत प्रासंगिकता का सशक्त संदेश था।

इस अवसर पर संसद टीवी, राज्यसभा सचिवालय, नई दिल्ली की संयुक्त सचिव डॉ शुभश्री पाणिग्राही विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। अपने विचारपूर्ण संबोधन में उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देने में डॉ आंबेडकर के दृष्टिकोण की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सच्चा लोकतंत्र केवल संवैधानिक प्रावधानों से ही नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी, नैतिक जिम्मेदारी और एकता की भावना से सशक्त होता है। उन्होंने शैक्षणिक समुदाय से समावेशिता, सद्भाव और सामूहिक प्रगति के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग, नई दिल्ली के सलाहकार डॉ राघब दाश द्वारा दिया गया विशेष व्याख्यान रहा, जो मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे। अपने विद्वत्तापूर्ण और प्रभावशाली व्याख्यान में उन्होंने ‘संवैधानिक नैतिकता’ की अवधारणा और सशक्त लोकतंत्र के लिए उसकी आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ आंबेडकर के आदर्शों का उल्लेख करते हुए उन्होंने “शिक्षित बनो, संगठित हो, संघर्ष करो” के प्रसिद्ध आह्वान को सामाजिक परिवर्तन का मार्ग बताया। उन्होंने राज्य के नीति-निदेशक तत्वों की प्रासंगिकता को समकालीन असमानताओं और मानवाधिकारों के संदर्भ में भी स्पष्ट किया। व्याख्यान के उपरांत आयोजित संवाद सत्र में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई, जिससे कार्यक्रम अत्यंत ज्ञानवर्धक बन गया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अनेक गणमान्य संकाय सदस्य एवं अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें विभागाध्यक्ष, वार्डन, वित्त अधिकारी श्री दुर्योधन सेठी, छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ रमेंद्र कुमार पाढ़ि  तथा जनसंपर्क अधिकारी डॉ फगुनाथ भोई सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं शोधार्थी शामिल हुए।

कार्यक्रम का समापन अंग्रेजी विभाग की सहायक प्राध्यापक एवं सह-संयोजक डॉ नेशा सबर द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, आयोजकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

जनसंपर्क अधिकारी डॉ फगुनाथ भोई ने बताया की इस आयोजन ने ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय की डॉ बी आर आंबेडकर के आदर्शों और दृष्टिकोण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता तथा एक न्यायपूर्ण, समतामूलक, समावेशी और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित शैक्षणिक वातावरण के निर्माण के संकल्प को पुनः सुदृढ़ किया।

Share this news

About desk

Check Also

IAT NEWS INDO ASIAN TIMES ओडिशा की खबर, भुवनेश्वर की खबर, कटक की खबर, आज की ताजा खबर, भारत की ताजा खबर, ब्रेकिंग न्यूज, इंडिया की ताजा खबर

जाजपुर में देह व्यापार गिरोह का भंडाफोड़

    दो महिलाओं समेत पांच हिरासत में     मुख्य डाकघर के पास मकान …