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‘केंद्रीय बजट 2026–27’ भविष्यवादी, युवा-केंद्रित, जनहितकारी और रोजगारोन्मुख

  • पूर्वी भारत सहित ओडिशा की आर्थिक वृद्धि को देगा गति: धर्मेंद्र प्रधान

भुवनेश्वर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि केंद्रीय बजट 2026-27 एक भविष्यवादी, युवा-केंद्रित, जनहितकारी और रोजगार आधारित बजट है। उन्होंने कहा कि यह बजट पूर्वी भारत, विशेषकर ओडिशा की आर्थिक वृद्धि को तेज गति प्रदान करेगा।
 बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रधान ने कहा कि यह बजट तीन प्रमुख उद्देश्यों से प्रेरित है- आर्थिक विकास को गति देना, सभी वर्गों की आकांक्षाओं को पूरा करते हुए सामर्थ्य बढ़ाना और प्रत्येक परिवार व समुदाय तक संसाधन, अवसर और सुविधाएं पहुंचाना। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत बजट’ सभी क्षेत्रों में समावेशी विकास सुनिश्चित करेगा।
प्रधान ने कहा कि यह बजट ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर आधारित है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को विशेष लाभ मिलेगा। यह भारत के अगले चरण के विकास के लिए ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को गति देगा और 140 करोड़ से अधिक नागरिकों को इसका लाभ सुनिश्चित होगा।
उन्होंने बताया कि चालू बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए आठ प्रतिशत की वृद्धि की गई है और इसके लिए 1 लाख 39 हजार 280 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अगले पांच वर्षों के लिए 10,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ ‘बायोफार्मा शक्ति’ तथा 40,000 करोड़ रुपये के निवेश से ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ की शुरुआत की गई है।
श्रम-प्रधान वस्त्र उद्योग और खादी-हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए ‘महात्मा गांधी ग्राम स्वराज अभियान’ की घोषणा की गई है। एमएसएमई क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का ग्रोथ फंड स्थापित किया गया है। युवाओं को रोजगार योग्य बनाने के लिए ‘ईटूई’ (शिक्षा से रोजगार और उद्यमिता) पर एक मानक समिति गठित करने का प्रस्ताव किया गया है।
प्रधान ने बताया कि देश के 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) लैब स्थापित की जाएंगी। छात्राओं को एसटीईएम शिक्षा में सहायता प्रदान करने के लिए प्रत्येक जिले में एक-एक छात्रावास का निर्माण किया जाएगा। शिक्षा और चिकित्सा उद्देश्यों से विदेश धन प्रेषण पर टीसीएस की दर को पांच प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा विकास के लिए बजटीय परिव्यय को 11 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया है, जिससे देश की विकास यात्रा को नई गति मिलेगी। बजट में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी’ की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) स्थापित किए जाएंगे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह बजट समग्र रूप से एक समृद्ध और सशक्त भारत के निर्माण में सहायक होगा और ओडिशा जैसे राज्यों को इससे विशेष लाभ मिलेगा।
प्रधान ने कहा कि ओडिशा के विकास को इस बजट में सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। केंद्रीय बजट 2026-27 ओडिशा को पूर्वी भारत की आर्थिक प्रगति का केंद्र बनाने के लिए एक मजबूत ब्लूप्रिंट प्रदान करता है। ब्राह्मणी और महानदी नदी मार्ग से तालचेर-अनुगूल से पारादीप-धामरा तक राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-5 का विकास तथा राज्य में नए ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ की स्थापना से ओडिशा के औद्योगिक और खनिज आधार को नई ऊंचाई मिलेगी।
उन्होंने कहा कि पूर्वोदय राज्यों के लिए प्रस्तावित ईस्ट-कोस्ट डेवलपमेंट कॉरिडोर और दानकुनी से सूरत को जोड़ने वाला नया फ्रेट कॉरिडोर ओडिशा में उद्योग, व्यापार और रोजगार के व्यापक अवसर सृजित करेगा। पूर्वी भारत में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन की स्थापना से राज्य की विकास गति और तेज होगी। उन्होंने कहा कि ओडिशा में नाइपर की स्थापना की भी प्रबल संभावनाएं हैं।
प्रधान ने कहा कि यह बजट ओडिशा के आम नागरिकों, किसानों, महिलाओं, युवाओं और जनजातीय समुदायों सहित सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। केंदुपत्ता विक्रेताओं के लिए टीसीएस की दर को पांच प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत करना तथा तटीय क्षेत्रों में नारियल, काजू और कोको की खेती के लिए विशेष सहायता प्रदान करना सरकार की गरीब और किसान कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों और मछुआरा संगठनों को स्टार्टअप के माध्यम से बाजार से जोड़ा जाएगा तथा तटीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन को सुदृढ़ किया जाएगा। इससे मछुआरों की आय में वृद्धि होगी, ब्लू इकोनॉमी को मजबूती मिलेगी और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि गहिरमाथा जैसे तटीय क्षेत्रों में ‘टर्टल ट्रेल्स’ जैसी परियोजनाएं राज्य के पर्यटन उद्योग को नई पहचान देंगी और अर्थव्यवस्था को और मजबूत करेंगी।
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