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स्कूल बसों पर श्रम कानून होगा लागू

  •     हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

  •     शुल्क लेकर चलने वाली स्कूल बसें मोटर परिवहन श्रमिक अधिनियम के दायरे में : उच्च न्यायालय

कटक। ओडिशा उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में भुवनेश्वर स्थित सीबीएसई संबद्ध स्कूल की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने अपने स्कूल परिवहन सेवा को मोटर परिवहन श्रमिक अधिनियम, 1961 के तहत पंजीकरण कराने के श्रम विभाग के निर्देश को चुनौती दी थी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि शुल्क लेकर संचालित स्कूल बस सेवाएं कानूनन मोटर परिवहन उपक्रम की श्रेणी में आती हैं।

याचिका खारिज, श्रम विभाग का निर्देश बरकरार

न्यायमूर्ति एसके पाणिग्राही की एकल पीठ ने फैसला सुनाते हुए स्कूल की रिट याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने श्रम विभाग के उस निर्देश को वैध ठहराया, जिसके तहत स्कूल को अपनी बस सेवा का पंजीकरण कराने को कहा गया था।

दो नोटिस बनी मामले की पृष्ठभूमि

स्कूल ने संयुक्त श्रम आयुक्त, भुवनेश्वर द्वारा जारी 31 जुलाई और 21 अगस्त 2025 की दो नोटिसों को रद्द करने की मांग की थी। इन नोटिसों में स्कूल को अपनी परिवहन सेवा का पंजीकरण कराने का निर्देश दिया गया था और अनुपालन न होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।

श्रम विभाग ने भी रखा पक्ष

प्रभागीय श्रम आयुक्त ने अदालत को बताया कि संबंधित स्कूल छात्रों से परिवहन शुल्क वसूलता है, इसलिए वह कानून में परिभाषित मोटर परिवहन उपक्रम की श्रेणी में आता है। स्कूल द्वारा छात्रों और कर्मचारियों के परिवहन के लिए 11 बसों का संचालन किया जा रहा है।

अदालत की टिप्पणी हुई अहम

न्यायमूर्ति पाणिग्राही ने अपने फैसले में कहा कि स्कूल का मुख्य उद्देश्य शिक्षा देना है, लेकिन परिवहन सेवा का सहायक (इंसिडेंटल) होना उसे कानून के अनुपालन से मुक्त नहीं करता।

अदालत ने टिप्पणी की कि छात्रों से परिवहन शुल्क की वसूली, चाहे उसकी राशि कितनी भी हो या उसमें लाभ हो या न हो, कानूनी रूप से किराये या प्रतिफल पर परिवहन मानी जाएगी।

कर्मचारियों की सुरक्षा और कल्याण पर जोर

अदालत ने स्पष्ट किया कि शुल्क लेकर चलाई जा रही स्कूल बस सेवाओं को मोटर परिवहन श्रमिक अधिनियम के तहत पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इसका उद्देश्य बस चालकों और अन्य परिवहन कर्मियों की सुरक्षा, अधिकार और कल्याण सुनिश्चित करना है।

अन्य स्कूलों के लिए नजीर

यह फैसला राज्य भर के उन स्कूलों के लिए महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है, जो छात्रों से परिवहन शुल्क लेकर बस सेवाएं संचालित करते हैं। अब ऐसे सभी संस्थानों को श्रम कानूनों के तहत नियामक अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।

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