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राजरानी मंदिर में गूंजे शास्त्रीय सुर

  •  राजरानी संगीत महोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ

  • भारत की समृद्ध संस्कृति का जीवंत प्रतिबिंब: धर्मेंद्र प्रधान

भुवनेश्वर। ऐतिहासिक राजरानी मंदिर परिसर में तीन दिवसीय राजरानी संगीत महोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। ओड़िया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति विभाग तथा ओडिशा संगीत नाटक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह महोत्सव 16 से 18 जनवरी 2026 तक चलेगा। शास्त्रीय संगीत की दिव्य धुनों से राजरानी मंदिर का प्रांगण सुरमयी हो उठा।

महोत्सव का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राजरानी संगीत महोत्सव भारत की समृद्ध संस्कृति और परंपरा का सजीव प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय और पारंपरिक संगीत ने ओडिशा सहित पूरे देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर विशिष्ट पहचान दिलाई है।

केंद्रीय मंत्री ने उपस्थित संगीत प्रेमियों और कलाकारों को शुभकामनाएं देते हुए प्रसिद्ध ओडिशी संगीत गुरु अच्युत महाराणा, विख्यात संगीत विद्वान पंडित सुरेश तलवलकर तथा उद्घाटन संध्या में प्रस्तुति देने वाले सभी कलाकारों को सम्मानित किया।

गुरु अच्युत महाराणा की ओडिशी संगीत प्रस्तुति

उद्घाटन संध्या की शुरुआत गुरु अच्युत महाराणा एवं उनके सहयोगी कलाकारों द्वारा मनमोहक ओडिशी संगीत प्रस्तुति से हुई। कार्यक्रम की शुरुआत राग बज्रकांति और जाति ताल में निबद्ध रागात्मक रचना “निशि नाथ बदनी” से हुई। इसके बाद राग शंकराभरणम और रूपक ताल में “मनु जाउ नाहीं मा”, नाट्यांग “ना जा यमुना” तथा सिंहारी दामोदर और सिंहारी श्याम सुंदर द्वारा रचित भजन “कंज चरणे” की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई।

गुरु अच्युत महाराणा ने अपनी राग-विस्तार शैली और भावनात्मक अभिव्यक्ति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके साथ मर्दला पर गुरु सच्चिदानंद दास, बांसुरी पर डॉ. जवाहर मिश्र, हारमोनियम पर गुरु मुरलीधर स्वाइन तथा तानपुरा पर ममता श्रीचंदन और संगीता नायक ने संगत की।

ताल की जादुई प्रस्तुति : पंडित सुरेश

संध्या की दूसरी प्रस्तुति में पंडित सुरेश तलवलकर एवं उनकी टीम ने प्रभावशाली ताल कीर्तन प्रस्तुत किया। जटिल ताल संरचनाओं, रचनात्मक तानों और सरगमों के प्रयोग तथा ताल वाद्य पर अद्भुत पकड़ ने दर्शकों को बांधे रखा। इस प्रस्तुति में हारमोनियम पर अमेया बिचू, तबला पर शबरी तलवलकर और कौस्तुभ स्वाइन, कोन्नाकोल पर ईशान प्रमोद परांजपे, ड्रम्स पर अभिषेक भुरुक तथा स्वर सहयोग में नदुक्कंडी विनयदास रामदासन ने साथ दिया।

युवाओं में दिखा उत्साह, सेल्फी प्वाइंट बना आकर्षण

ओडिशी संगीत और ताल कीर्तन की प्रस्तुतियों को दर्शकों से भरपूर सराहना मिली। महोत्सव स्थल पर बनाए गए सेल्फी प्वाइंट ने खास तौर पर युवाओं को आकर्षित किया, जहां बड़ी संख्या में युवा स्मृतियां संजोते नजर आए। उद्घाटन समारोह में ओड़िया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति मंत्री सूर्यवंशी सूरज, एकाम्र विधायक बाबू सिंह, पूर्व विधायक जयंत कुमार षाड़ंगी, ओड़िया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ विजय केतन उपाध्याय, अतिरिक्त सचिव देव प्रसाद दास तथा ओडिशा संगीत नाटक अकादमी के सचिव डॉ चंद्रशेखर होता सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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