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एसआई भर्ती घोटाले में सिलिकॉन टेक लैब को क्लीन चिट पर उठे सवाल

  •     क्राइम ब्रांच के प्रमाणपत्र और सीबीआई चार्जशीट में विरोधाभास

भुवनेश्वर। ओडिशा पुलिस सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती परीक्षा से जुड़े घोटाले में बड़ा खुलासा सामने आया है। दस्तावेजों के मुताबिक, ओडिशा क्राइम ब्रांच ने निजी कंपनी सिलिकॉन टेक लैब प्राइवेट लिमिटेड (एसटीएल) को क्लीन चिट दी थी, जबकि बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की चार्जशीट में भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेरफेर के आरोप लगाए गए हैं। इस विरोधाभास ने जांच और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि क्राइम ब्रांच ने सिलिकॉन टेक लैब को एक चरित्र प्रमाणपत्र जारी किया था। इसी प्रमाणपत्र के आधार पर कंपनी को पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। प्रमाणपत्र में कंपनी प्रमुख सुरेश नायक को “सभ्य और जानकार व्यक्ति” बताया गया था।

पहले भी कई परीक्षाओं का मिला था जिम्मा

उसी दस्तावेज में यह भी उल्लेख है कि सिलिकॉन टेक लैब को इससे पहले भी जेल वार्डर और हाईकोर्ट असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (एएसओ) जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के आयोजन की जिम्मेदारी दी जा चुकी थी। इन्हीं तथ्यों के आधार पर कंपनी को पुलिस एसआई परीक्षा के लिए उपयुक्त माना गया।

सीबीआई चार्जशीट में गंभीर आरोप

हालांकि, सीबीआई की चार्जशीट में बिल्कुल अलग तस्वीर सामने रखी गई है। चार्जशीट के अनुसार, मार्च 2025 से ही पुलिस एसआई परीक्षा में हेरफेर की तैयारी शुरू हो चुकी थी। इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित घोटाले के तहत अभ्यर्थियों से लगभग 25 लाख रुपये की राशि वसूली गई थी।

चार्जशीट में सुरेश नायक को बताया गया मास्टरमाइंड

सीबीआई की चार्जशीट में सिलिकॉन टेक लैब के प्रमुख सुरेश नायक को परीक्षा में कथित हेरफेर का मास्टरमाइंड बताया गया है। यह दावा क्राइम ब्रांच द्वारा पहले जारी किए गए क्लीन चिट और चरित्र प्रमाणपत्र से पूरी तरह उलट है।

4 अगस्त 2025 को दी गई थी क्लीन चिट

हैरानी की बात यह है कि इन आरोपों के बावजूद राज्य सरकार की क्राइम ब्रांच ने 4 अगस्त 2025 को सिलिकॉन टेक लैब को क्लीन चिट जारी की थी। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि जांच एजेंसी ने प्रमाणपत्र जारी करने से पहले किन आधारों पर सत्यापन किया।

सत्यापन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद यह सवाल और गहरा गया है कि निजी एजेंसियों को परीक्षा संचालन जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी सौंपने से पहले अपनाई जाने वाली जांच प्रक्रिया कितनी प्रभावी है।

अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं

खबर लिखे जाने तक क्राइम ब्रांच या राज्य सरकार की ओर से इस स्पष्ट विरोधाभास पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। सीबीआई चार्जशीट और क्राइम ब्रांच के प्रमाणपत्र के बीच इस अंतर को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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