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ओडिशा में छात्रसंघ चुनाव में कैंपस हिंसा पर जीरो टॉलरेंस

  •     नियम तोड़े तो होगी सख्त कार्रवाई

  •     चुनावी माहौल बिगाड़ने वालों पर कसेगा शिकंजा

  •     बाहरी लोगों की एंट्री पर रोक

  •     जुलूस और सभाओं के लिए प्रशासन की अनुमति जरूरी

भुवनेश्वर। ओडिशा में लंबे अंतराल के बाद छात्रसंघ चुनाव की वापसी के साथ ही सरकार ने कैंपस में हिंसा और अनुशासनहीनता को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उच्च शिक्षा विभाग ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान कैंपस हिंसा पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने के निर्देश दिए हैं। चुनाव छात्र लोकतंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से कराए जा रहे हैं, लेकिन किसी भी संस्थान में हिंसा, बाहरी हस्तक्षेप या चुनावी नियमों के उल्लंघन को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उच्च शिक्षा विभाग की ओर से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के लिए जारी दिशा-निर्देशों में चुनावी गतिविधियों को नियंत्रित और शांतिपूर्ण रखने पर विशेष जोर दिया गया है। लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुरूप उम्मीदवारों और समर्थकों के लिए प्रचार की सीमा तय की गई है, जबकि गैर-छात्रों की चुनावी गतिविधियों में भागीदारी पर रोक रहेगी।

हिंसा रोकना सबसे बड़ी प्राथमिकता

कैंपस में चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा, तनाव या शक्ति प्रदर्शन को रोकने के लिए प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। उम्मीदवार चुनाव प्रचार के दौरान हाथ से बनाए पोस्टर का इस्तेमाल कर सकेंगे, लेकिन जुलूस, सार्वजनिक सभा या अन्य बड़े कार्यक्रमों के लिए संस्थान के प्रशासन से लिखित अनुमति लेना आवश्यक होगा। लाउडस्पीकर, वाहनों और अन्य माध्यमों के जरिए प्रचार पर भी प्रतिबंध रहेगा।

जाति या सामुदायिक आधार पर वोट मांगने की अनुमति नहीं

चुनाव प्रक्रिया में बाहरी लोगों की भागीदारी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। उम्मीदवारों को जाति या सामुदायिक आधार पर वोट मांगने की भी अनुमति नहीं होगी। राजनीतिक दलों की प्रत्यक्ष भागीदारी पर रोक के साथ सोशल मीडिया पर भी सख्ती बरती जाएगी। फर्जी खबर, भ्रामक सामग्री, छेड़छाड़ किए गए मीडिया और एआई के जरिए तैयार की गई फर्जी सामग्री के इस्तेमाल को चुनावी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

प्रचार खर्च की सीमा भी 5,000 रुपये निर्धारित

सरकार ने उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार खर्च की सीमा भी 5,000 रुपये निर्धारित की है। नियमों का उद्देश्य चुनाव को धनबल, बाहुबल और अनावश्यक दबाव से दूर रखते हुए विद्यार्थियों के बीच स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है।

7 अक्टूबर से शुरू होगी प्रक्रिया

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चुनावी प्रक्रिया 7 अक्टूबर से शुरू होगी। 9 अक्टूबर को नामांकन, जांच और वैध उम्मीदवारों की सूची जारी होगी, जबकि 10 अक्टूबर को नामांकन वापसी के बाद अंतिम उम्मीदवार सूची जारी की जाएगी। 14 अक्टूबर को ‘व्हाई आई स्टैंड फॉर’ बैठक होगी।

15 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक मतदान होगा और मतदान समाप्त होते ही मतगणना शुरू कर उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे। 16 अक्टूबर को निर्वाचित प्रतिनिधियों का शपथ ग्रहण होगा।

नियमित विद्यार्थी ही हिस्सा ले सकेंगे

चुनाव में केवल निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले नियमित विद्यार्थी ही हिस्सा ले सकेंगे। उम्मीदवारों के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति सहित अन्य शैक्षणिक और अनुशासन संबंधी शर्तें लागू हैं। आपराधिक रिकॉर्ड या लंबित अनुशासनात्मक कार्रवाई वाले विद्यार्थियों को चुनाव लड़ने से बाहर रखा गया है।

कैंपस हिंसा रोकना काफी महत्वपूर्ण

कैंपस हिंसा के प्रति यह सख्त रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ओडिशा में छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से स्थगित रहे हैं और पूर्व में कैंपस में हिंसा तथा अशांति चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करती रही है। 2017 में भी भुवनेश्वर के बीजेबी कॉलेज में हिंसा के बाद छात्रसंघ चुनाव रद्द करना पड़ा था।

अब सरकार की कोशिश है कि छात्रसंघ चुनाव राजनीतिक या हिंसक टकराव का माध्यम बनने के बजाय विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया, नेतृत्व और जिम्मेदारी का अनुभव देने का मंच बने। ऐसे में चुनावी नियमों का पालन और कैंपस में शांति बनाए रखना प्रशासन के साथ-साथ उम्मीदवारों और छात्र संगठनों के लिए भी बड़ी जिम्मेदारी होगी।

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