Home / Odisha / कॉलेज चुनाव में नामांकन रद्द होने पर छात्र कांग्रेस ने उठाए सवाल

कॉलेज चुनाव में नामांकन रद्द होने पर छात्र कांग्रेस ने उठाए सवाल

  •     सरकार पर पक्षपात का आरोप

  •     75 प्रतिशत उपस्थिति की अनिवार्यता पहले से घोषित नहीं करने का दावा

  •     एबीवीपी को फायदा पहुंचाने की साजिश का लगाया आरोप

  •     भुवनेश्वर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर छात्र कांग्रेस ने उच्च शिक्षा मंत्री से मांगा जवाब

  •     परिसर में छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया

भुवनेश्वर। ओडिशा में आगामी कॉलेज चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। छात्र कांग्रेस ने नामांकन पत्रों को रद्द किए जाने और चुनाव की घोषणा के लिए कम समय दिए जाने पर राज्य सरकार तथा सत्तारूढ़ दल पर पक्षपात का आरोप लगाया है। संगठन का दावा है कि 75 प्रतिशत उपस्थिति की अनिवार्यता की जानकारी पहले से स्पष्ट रूप से नहीं दी गई, जिसका इस्तेमाल विपक्षी छात्र उम्मीदवारों को चुनाव से बाहर करने और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

भुवनेश्वर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व विधायक एवं ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष डॉ देवाशीष पटनायक ने कॉलेज चुनावों को लेकर सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव की घोषणा बेहद कम समय, यानी केवल सात दिन पहले की गई, जिससे विपक्षी छात्र संगठनों को तैयारी करने में कठिनाई हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े छात्र संगठन को तैयारी के लिए अपेक्षाकृत अनुकूल स्थिति मिली।

75 प्रतिशत उपस्थिति की शर्त पर छात्र कांग्रेस ने मांगा जवाब

छात्र कांग्रेस के अध्यक्ष विभूति भूषण महापात्र ने नामांकन प्रक्रिया के दौरान संगठन के उम्मीदवारों के पर्चे रद्द किए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि चुनाव की घोषणा के लिए केवल सात दिन का समय दिया गया, फिर भी छात्र कांग्रेस ने चुनौती स्वीकार करते हुए चुनाव में भाग लेने की तैयारी की।

महापात्र के अनुसार, नामांकन पत्रों की जांच के दौरान उनके उम्मीदवारों के पर्चे 75 प्रतिशत उपस्थिति की अनिवार्यता का हवाला देकर रद्द कर दिए गए। उन्होंने उच्च शिक्षा मंत्री से सवाल किया कि यदि यह शर्त अनिवार्य थी, तो इसकी जानकारी पहले से स्पष्ट रूप से क्यों नहीं दी गई। उनका कहना था कि उम्मीदवारों को समय रहते नियम की जानकारी मिलती, तो वे उसी के अनुरूप अपनी तैयारी और नामांकन की प्रक्रिया पूरी कर सकते थे।

छात्र कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि उपस्थिति संबंधी नियम को पहले से स्पष्ट नहीं करने के पीछे विपक्षी उम्मीदवारों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर करने की मंशा हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि इससे एबीवीपी के उम्मीदवारों को लाभ पहुंचने की आशंका है। हालांकि, ये आरोप छात्र कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं और उपलब्ध जानकारी में सरकार या संबंधित अधिकारियों का पक्ष शामिल नहीं है।

कॉलेज परिसरों में छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया

प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्र कांग्रेस ने कॉलेज परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। महापात्र ने आरोप लगाया कि एबीवीपी से जुड़े लोगों के उकसावे पर बाहरी व्यक्ति वास्तविक छात्रों पर हमले कर रहे हैं और स्थानीय पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। उन्होंने छात्रों को सुरक्षा प्रदान करने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की मांग की।

छात्र कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि निष्पक्ष छात्र चुनाव कराने में सरकार को परेशानी क्यों हो रही है। संगठन का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और नामांकन रद्द किए जाने की घटनाएं छात्र राजनीति में समान अवसर के सिद्धांत को प्रभावित कर सकती हैं।

कॉलेज चुनावों को लेकर छात्र कांग्रेस के इन आरोपों के बीच अब चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, उपस्थिति संबंधी नियमों की पूर्व घोषणा और सभी छात्र संगठनों को समान अवसर उपलब्ध कराने का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है।

Share this news

About desk

Check Also

बालेश्वर में बीजद छात्र नेता को हिरासत में लेने पर हंगामा

    पुलिस थाने में धरने पर बैठे पार्टी नेता    बीसीजेडी जिलाध्यक्ष हरेकृष्ण प्रधान …