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कटक में पहली बार विघ्नहर ह्रींकार अनुष्ठान का भव्य आयोजन

  •     108 जोड़ों सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने किया कल्याण मंदिर स्तोत्र का संगान

  •     मुनि जयेश कुमार बोले-सभी के लिए सिद्धिदायक बने यह अनुष्ठान

कटक। ओडिशा के इतिहास में पहली बार मुनिश्री मोहजीत कुमार के सान्निध्य में विघ्नहर ह्रींकार अनुष्ठान का भव्य आयोजन किया गया। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, कटक के तत्वावधान में शहीद भवन के प्रांगण में आयोजित इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में 108 जोड़ों सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। ह्रींकार की विशेष आकृति में बैठकर श्रद्धालुओं ने आचार्य सिद्धसेन द्वारा रचित कल्याण मंदिर स्तोत्र का सामूहिक श्रवण किया। मुनि जयेश कुमार के भावपूर्ण स्वर में स्तोत्र के संगान ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

प्रभु पार्श्वनाथ के गुणों को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है स्तोत्र

अनुष्ठान के स्वर प्रस्तोता मुनि जयेश कुमार ने कल्याण मंदिर स्तोत्र की रचना से जुड़ी विशिष्ट घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि तीर्थंकर परंपरा में प्रभु पार्श्वनाथ का माहात्म्य और प्रभाव विशिष्ट स्थान रखता है। उन पर रचित अनेक स्तोत्र श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। इन्हीं में कल्याण मंदिर स्तोत्र का विशेष महत्व है, जिसके रचयिता आचार्य सिद्धसेन एक क्रांतिकारी विचारक थे।

मुनिश्री ने कहा कि आचार्य सिद्धसेन ऐसी स्तुति के पक्षधर थे, जो केवल स्वार्थ सिद्धि तक सीमित न रहकर आराध्य के गुणों को आत्मसात करने की प्रेरणा दे। उनके विचार में सच्ची भक्ति वही है, जो व्यक्ति के जीवन और आचरण में सकारात्मक परिवर्तन लाए।

मुनि जयेश कुमार ने कामना की कि विघ्नहर ह्रींकार अनुष्ठान सभी के लिए विघ्नों का निवारण करने वाला, सिद्धिदायक और प्रभु पार्श्वनाथ के गुणों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देने वाला बने।

ह्रींकार की विशेष आकृति में हुआ अनुष्ठान

कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र के साथ हुआ। इसके बाद मुनि भव्य कुमार ने पार्श्व स्तुति में प्रभु पार्श्वदेव के चरणों में समर्पित गीत का संगान कर अनुष्ठान को आगे बढ़ाया। पूरे आयोजन के दौरान ‘ॐ श्री पार्श्वनाथाय’ मंत्र का सामूहिक उच्चारण किया गया।

अनुष्ठान की विशेष व्यवस्था के तहत श्रद्धालुओं को ह्रींकार की आकृति में बैठाया गया। प्रत्येक सदस्य के सिर के ऊपर ह्रींकार पिरामिड के माध्यम से शक्ति के केंद्रीकरण की विशेष व्यवस्था की गई। प्रकाश व्यवस्था के लिए विशेष रोशनी का उपयोग किया गया, जिससे आयोजन को विशिष्ट आध्यात्मिक स्वरूप मिला।

108 जोड़ों की सहभागिता ने सामूहिक साधना के प्रति श्रद्धालुओं के उत्साह को प्रदर्शित किया। उपस्थित अनुष्ठानकर्ताओं ने मुनि जयेश कुमार के स्वर में प्रस्तुत कल्याण मंदिर स्तोत्र की सराहना की। श्रद्धालुओं ने कहा कि मुनिश्री के स्वरों के कंपन ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया और वे आध्यात्मिक अनुभूति से अभिभूत हुए।

आयोजकों और सहयोगियों का सम्मान

कार्यक्रम में सभा अध्यक्ष मुकेश सेठिया ने स्वागत स्वर प्रस्तुत किया। कार्यक्रम संयोजक विकास नौलखा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी, जबकि सभा मंत्री रंजीत दुग्गड़ ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया।

इस अवसर पर सभा की ओर से कार्यक्रम के प्रायोजक राजकरण बैद परिवार का सम्मान किया गया। आयोजन को सफल बनाने में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के साथ तेरापंथ महिला मंडल, तेरापंथ युवक परिषद, तेरापंथ कन्या मंडल और तेरापंथ किशोर मंडल के अनेक कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

श्रद्धा, सामूहिक साधना और मंत्रोच्चार से परिपूर्ण इस आयोजन ने कटक में जैन आध्यात्मिक परंपरा के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था को एक विशेष अभिव्यक्ति प्रदान की।

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