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बीजद और कांग्रेस ने सरकार को घेरा
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भाजपा ने किया पलटवार
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बीजद ने चुनाव रद्द करने और कॉलेज बंद करने के फैसले को बताया छात्र लोकतंत्र पर हमला
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एनएसयूआई ने 206 कॉलेजों में चुनाव के बजाय चयन कराने का लगाया आरोप
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भाजपा युवा मोर्चा का दावा- आधे कॉलेजों में उम्मीदवार तक नहीं उतार पा रही बीजद
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15 अक्टूबर को 13 विश्वविद्यालयों और 328 कॉलेजों में होना है मतदान
भुवनेश्वर। ओडिशा में करीब नौ साल के अंतराल के बाद होने जा रहे छात्रसंघ चुनाव को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। चुनाव प्रक्रिया, उम्मीदवारों के चयन और कुछ शिक्षण संस्थानों में चुनाव रद्द करने या अनिश्चितकाल के लिए बंद करने के फैसले पर बीजद और कांग्रेस ने राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। वहीं, भाजपा युवा मोर्चा ने पलटवार करते हुए बीजद पर आधे कॉलेजों में उम्मीदवार नहीं उतार पाने का आरोप लगाया है। छात्रसंघ चुनाव अब केवल छात्र संगठनों के बीच मुकाबले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि भाजपा, बीजद और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बन गया है। मतदान 15 अक्टूबर को प्रस्तावित है और इससे पहले परिसर की राजनीति लगातार गरमा रही है।
बीजद ने दागे सवाल
भुवनेश्वर स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय शंख भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बीजू जनता दल ने विभिन्न कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव अनिश्चितकालीन बंदी के फैसले की कड़ी आलोचना की। पार्टी नेताओं ने इसे छात्र समुदाय के लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया। बीजद ने आरोप लगाया कि प्रशासन की मनमानी कार्रवाई के कारण शिक्षण संस्थानों में तनाव और असंतोष का माहौल पैदा हो रहा है।
विभिन्न क्षेत्रों में छात्र संगठनों का प्रदर्शन
पार्टी ने भुवनेश्वर और गोविंदपल्ली सहित विभिन्न क्षेत्रों में छात्र संगठनों की ओर से किए जा रहे सड़क अवरोध और विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया। बीजद नेताओं ने कहा कि किसी एक घटना या सीमित तनाव के आधार पर पूरे परिसर को अनिश्चितकाल के लिए बंद करना उचित नहीं है। सरकार को शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य करने और छात्रसंघ चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।
हार की आशंका के कारण चुनाव किया रद्द
बीजद ने यह भी दावा किया कि कुछ कॉलेजों में बीजू छात्र जनता दल समर्थित उम्मीदवार मजबूत स्थिति में थे और कई पदों पर निर्विरोध जीत की संभावना थी। पार्टी का आरोप है कि संभावित हार की आशंका के कारण चुनाव रद्द करने का फैसला लिया गया। बीजद ने सरकार से निर्णय की समीक्षा कर चुनाव प्रक्रिया बहाल करने की मांग की। हालांकि, ये आरोप पार्टी की ओर से लगाए गए हैं और इनके स्वतंत्र सत्यापन की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
एनएसयूआई ने 206 कॉलेजों में चयन कराने का आरोप लगाया
छात्रसंघ चुनाव को लेकर ओडिशा प्रदेश छात्र कांग्रेस यानी एनएसयूआई ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधा है। भुवनेश्वर में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रदेश छात्र कांग्रेस अध्यक्ष विभूति भूषण महापात्र ने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल कर रही है।
महापात्र ने दावा किया कि जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और कॉलेजों के प्राचार्यों पर पसंदीदा उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने के लिए दबाव डाला जा रहा है। एनएसयूआई ने विशेष रूप से चुनाव की जगह चयन प्रक्रिया अपनाए जाने पर सवाल उठाया। संगठन के अनुसार, लगभग 206 कॉलेजों में प्रत्यक्ष मतदान के बजाय उम्मीदवारों का चयन किया जा रहा है। छात्र कांग्रेस ने इसे छात्र प्रतिनिधित्व की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम बताया और कहा कि छात्रसंघ चुनाव में मतदान का अधिकार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
सभी छात्र संगठनों को समान अवसर देने की मांग
एनएसयूआई ने प्रशासन से निष्पक्षता बरतने और सभी छात्र संगठनों को समान अवसर देने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई और प्रशासनिक हस्तक्षेप जारी रहा, तो राज्यव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा। महापात्र ने चुनाव में एनएसयूआई की जीत का भरोसा जताते हुए संगठन के बेहतर प्रदर्शन का दावा भी किया।
बीजद पर उम्मीदवारों की कमी का आरोप – भाजयुमो
बीजद और एनएसयूआई के आरोपों के बीच भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अभिलाष पंडा ने बीजद पर पलटवार किया। उन्होंने दावा किया कि राज्य के लगभग आधे कॉलेजों में बीजद उम्मीदवार उतारने की स्थिति में नहीं है। पंडा ने इसे छात्र समुदाय के बीच बीजद के घटते समर्थन का संकेत बताया।
पंडा ने कहा कि पूर्ववर्ती बीजद सरकार के कार्यकाल में करीब एक दशक तक छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए गए, जिससे विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि अब चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने वाली बीजद को पहले अपने शासनकाल के दौरान चुनाव नहीं कराने के फैसले का जवाब देना चाहिए।
विद्यार्थियों में अपने अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ी
भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष ने कहा कि विद्यार्थियों में अपने अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ी है और वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने के लिए आगे आ रहे हैं। उन्होंने छात्र समुदाय से शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव में भाग लेने की अपील की। बीजद की ओर से आधे कॉलेजों में उम्मीदवार नहीं उतार पाने का दावा भाजपा युवा मोर्चा ने किया है; इस संबंध में स्वतंत्र आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
नौ साल बाद लौट रहे छात्रसंघ चुनाव, 15 अक्टूबर को मतदान
ओडिशा में करीब नौ साल के अंतराल के बाद छात्रसंघ चुनाव कराए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्य के 13 विश्वविद्यालयों और 328 कॉलेजों में प्रत्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब 15 अक्टूबर को मतदान प्रस्तावित है। कुछ पदों पर उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित भी हो चुके हैं।
इस बार छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), बीजू छात्र जनता दल और एनएसयूआई सहित विभिन्न छात्र संगठनों के बीच मुकाबला है। कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में संगठनात्मक समीकरण तथा संभावित गठजोड़ भी चर्चा में हैं। ऐसे में मतदान से पहले राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों की सक्रियता बढ़ गई है।
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