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संयुक्त और मजबूत समाज गठन ही लक्ष्य, विघटन संस्कार नहीं : शिव कुमार अग्रवाल 

1996 से 2026 तक भुवनेश्वर मारवाड़ी समाज के सफर ने दिखाई है एकता

  • भवन निर्माण के संघर्ष और नेतृत्व की जिम्मेदारी पर विचार

  • 1996 से 2026 तक मारवाड़ी समाज भुवनेश्वर का इतिहास

  • बड़ों को मठाधीश कहना बचपने की पहचान है

  • सम्मान करना ही संस्कारों की शान है।

  • विचारों से लड़ो, व्यक्तियों से नहीं,

  • यही परिपक्व समाज की असली पहचान है।

लेखक: शिव कुमार, अग्रवाल, उपाध्यक्ष, मारवाड़ी समाज, भुवनेश्वर

भाइयों, पिछले 3 अक्टूबर को व्हाट्सएप में किसी ने संदेश डाला कि मठाधीशों से नहीं डरेंगे। मैं सोसाइटी के उपाध्यक्ष के नाते नहीं बल्कि स्वर्गीय श्री ओमप्रकाश जी लाठ ने जो कहा था कि अध्यक्ष या उपाध्यक्ष ही नहीं, बल्कि मारवाड़ी समाज भुवनेश्वर के हर एक सदस्य पदाधिकारी हैं। आज तक जितने भी पदाधिकारी बने और आज भी मेरे छोटे भाई संजय लाठ ने उसी संदेश को आगे बढ़ाया है।

मेरे माता-पिता कि बहुत ही कम उम्र में निधन हो गया। उस समय मेरे पिताजी की उम्र 52 वर्ष थी। मेरे पिता तुल्य ओमप्रकाश जी लाठ ने मुझे अपने घर बुलाया, और कहा कि तुम्हें अब मेरे साथ समाज के लिए कुछ करना है। मैंने कहा देखिए आप मेरी सभी परिस्थिति से अवगत हैं। मेरी तीन बहनों में से दो बहन की अभी शादी करनी है। मेरे तीनों छोटे भाई अभी पढ़ाई कर रहे हैं। आप हमारे सभी परिस्थिति से अवगत हैं। इस पर उन्होंने कहा कि क्या मैं तुम्हारे पिता के समान नहीं हूं? मेरा आदेश है कि तुम्हें मेरे साथ जन सेवा के कार्य को और आगे बढ़ाना होगा। मुझे जहां तक ज्ञात है भुवनेश्वर मारवाड़ी समाज का नाम, पहले मारवाड़ी पंचायत था। बुद्धेश्वरी कॉलोनी में एक जमीन मेरे पिताजी भंवर लाल जी, ओम प्रकाश जी, चेतन टेकरीवाल जी, सुभाष जी भूरा, भगत राम जी गुप्ता, श्री श्याम सुंदर जी अग्रवाल (कैपिटल एंटरप्राइजेज), सुरेंद्र जी डालमिया, रामप्रताप जी खेरिया, मेरे चाचा सुरेश जी अग्रवाल, प्रेमचंद जी अग्रवाल और विभिन्न विशिष्ट व्यक्ति के द्वारा खरीदा गया। इस जमीन में कुछ बाधाएं थी जिसका श्री चेतन जी टेकरीवाल ने समाधान करवा। हालांकि वहां पर पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण और जगह भी काफी कम होने के चलते हम लोगों ने आपस में विचार विमर्श किया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री गिरधर गमांग जी से मिलकर एक बड़ी जगह ली जाए। इसके लिए सरकारी नियम था कि जिस संस्था के पास एक जगह है तो उसे दूसरी जगह नहीं दी जा सकती। इसके बाद सबने मिलकर (जिसमें सुरेंद्र डालमिया जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही) उसे सोसाइटी एक्ट में रजिस्ट्रेशन करवाया। इसके बाद जब मैंने ओमप्रकाश लाठ जी के आदेश से सचिव का पदभार संभाला, उस समय प्रेमचंद जी अग्रवाल उपाध्यक्ष थे। मुझे ज्ञात नहीं है परंतु किसी कारण बस उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया। मैंने लाठ जी को कहा कि सरकार से जो जमीन लेनी है, इसके लिए हमें सही जगह का चयन करना होगा। सीताराम जी चंदूका इसमें हम लोगों की मदद कर सकते हैं। लाठ जी ने चंदूका जी को फोन लगाया, तब वह बांबे में माउथ कैंसर का ट्रीटमेंट करा रहे थे। उन्होंने कहा कि भुवनेश्वर आने के बाद मैं आपसे मिलता हूं। लाठ जी ने उन्हें सोसाइटी का उपाध्यक्ष बनाया। इसमें कुछ ऐसी बात है खासकर जमीन चयन में जो बात आज इस माहौल में, मैं नहीं कहना चाहता हूं, क्योंकि जो संस्कार मुझे और मेरे चाचा श्री सुरेश जी को मेरे पिताजी भंवर लाल जी से मिले हैं और ओमप्रकाश जी ने जो हमें, समाज को जोड़ने की, तोड़ने की नहीं, शिक्षा दी है, इसी को हमने अपने जीवन का आधार बनाया। मैं करीब 5 साल तक ओमप्रकाश लाठ जी के साथ सचिव पद पर रहते हुए कार्य किया। आज मेरे छोटे भाई संजय को पता है कि उस समय मेरे पास गाड़ी नहीं थी तब संजय, भाई लाठ जी के साथ मुझे पिकअप करके मुख्यमंत्री के साथ आत्मीय बैठक में भाग लेने के लिए ले जाते थे। एक बार सीताराम जी बोले मैं भी आपके साथ चलूंगा, मुख्यमंत्री जी का निजी सचिव पीके नाम से जिनका पूरा नाम मुझे याद नहीं आ रहा है, जो कि मेरा घनिष्ट मित्र हो गया था, सीताराम जी चंदूका ने कहा कि मेरा परिचय इनसे करा दीजिए, तो मैं करा दिया। इसी बीच मुख्यमंत्री गमांगो जी ने हमारे समाज के लिए जमीन देने का पत्र मुख्य सचिव के पास भेज दिया, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

इसी बीच मैं एक ऐसी बात कहना नहीं चाहता जो कि मेरे छोटे भाई संजय को ज्ञात है कि एक जमीन जो ओमप्रकाश लाठ जी अपने सोर्स से चयन किया था, उसी जमीन को किसी और को दे दिया गया, और हमें जब ज्ञात हुआ कि जो जमीन हमें मिलनी थी वह हमारे ही किसी अपने को दे दी गई थी। लाठ जी कभी नहीं चाहते थे कि इस काम के लिए पैसा खर्च करना पड़े, क्योंकि यह उनके सिद्धांत और स्वभाव के विरुद्ध था। इस विषय के संदर्भ में अभी मैं और कुछ कहना नहीं चाहता क्योंकि मुझे जो संस्कार मिला है उसमें हमेशा यही कहा गया है कि हमें समाज जोड़ना है तोड़ना नहीं है। अगर इस बात को मैं यहां रख दिया तो समाज के अंदर बहुत गलत मैसेज जाएगा, जिससे समाज जुड़ेगा नहीं बल्कि और टूटेगा।

खैर फिर उस जमीन को बेचकर सरकारी जमीन का पेमेंट किया गया। इसी बीच मुख्यमंत्री गमांगों की जगह हेमानंद जी बिस्वाल मुख्यमंत्री बने। उस समय जब अंदरुनी पता चला कि वह जमीन ऑफिसर्स बच्चों के लिए पार्क के लिए रखी गई है। यह बड़ा ही असंभव कार्य था, हालांकि मैं मानता हूं की दुनिया में ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जो असंभव हो।

इस बीच हमारे समाज के वरिष्ठ मेरे चाचा श्री सुरेश जी अग्रवाल, श्री सुरेंद्र जी डालमिया, श्री चेतन जी टेकरीवाल, स्वर्गीय भगतराम जी गुप्ता, राम प्रताप जी खेरिया, प्रेमचंद जी अग्रवाल प्रमुख ने उस समय मुख्य रूप से मोतीलाल जी भूरा एवं उनके कुछ साथियों को जो कांग्रेस के उस समय के प्रमुख नेता थे, को होटल एच एच आई में बुलाकर सम्मानित किया।

मोतीलाल भुरा जी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमानंद बिस्वाल को पत्र लिखा और दिल्ली से फोन किया कि मारवाड़ी सोसाइटी भवन का काम कहां तक पहुंचा। विजय पटनायक उस समय हेमानंद बिस्वाल जी के सचिव थे। मैं उन्हें नहीं जानता था, तब प्रियवत पटनायक जी जो उनके बैचमेट थे और अच्छे दोस्त थे, ने विजय पटनायक जी को फोन किया कि मेरा छोटा भाई शिव कुमार अग्रवाल और सोसाइटी के अध्यक्ष ओमप्रकाश जी लाठ आपसे मिलेंगे और उनका जो भी काम हो, किया जाय। हमने मोतीलाल भूरा जी के पत्र की एक कॉपी लेकर हेमानंद बिस्वाल जी से मिले। इसी दिन मुख्यमंत्री हेमानंद जी ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर लैंड यूज चेंज किया और मारवाड़ भवन बनने का रास्ता साफ हुआ। इसी बीच अचानक ओमप्रकाश लाठ जी का स्वर्गवास हो गया।

ओमप्रकाश जी के जाने के बाद समाज ने भगतराम जी गुप्ता को समाज के अध्यक्ष के रूप में सर्व समिति से चुना। इस दौरान भवन का प्लान बनाने के लिए श्री चेतन जी टेकरीवाल एवं श्री सुभाष जी भुरा को चुना गया। इस दौरान कई बाधाएं आई। हालांकि भगत राम जी एवं टेकरीवाल जी व भूरा जी भवन के लिए दिन-रात एक कर दिए। उस दौरान मेरी जहां भी जरूरत पड़ती, आदेश आता, वहां जाता और बधाओ को दूर करने के लिए हर संभव कोशिश करता। इस बीच मैं करीब 7 साल तक भगत राम जी गुप्ता के साथ बतौर सचिव काम किया। उन्होंने जो समाज के लिए किया वह भी हमेशा याद रखा जाएगा। इसके बाद श्री सुभाष जी अग्रवाल अध्यक्ष बने, जिसका प्रस्ताव मैंने एवं उमेश खंडेलवाल ने संबलपुर में आयोजित मारवाड़ी युवा मंच के अधिवेशन में रखा था। उस दौरान भी कुछ बाधाएं आई, लेकिन मुझे सिर्फ भवन दिख रहा था और मुझे विश्वास था कि सुभाष जी भवन को जरूर बनवा देंगे। श्री सुभाष जी अग्रवाल ने उस समय के ताकतवर नेता प्यारी मोहन महापात्र से मिलकर सभी प्रकार की बाधाओ को दूर कर दिया। इस बीच भवन निर्माण के लिए धनराशि की जरूरत हुई। हमने अपने मित्र श्री रोहित सराफ जी से संपर्क किया। सजन जी सुरेखा उस समय रोहित जी से जुड़े हुए थे। सजन सुरेखा जी ने भी काफी मदद की। बाकी धनराशि को लेकर सुभाष जी अग्रवाल ने कहा कि भवन निर्माण का कार्य तो मैं पूरा करूंगा। उन्होंने चैरिटी विगेन फ्रॉम होम को ध्येय बनाकर धनराशि एकत्र करते हुए काम को पूरा करने का प्रयास किया। सुभाष जी के समय पवन जी गुप्ता सचिव थे।

इसके बाद सोसाइटी के अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी महेंद्र गुप्ता जी को मिली। महेंद्र जी ने खुद अपनी तरफ से काफी धनराशि दी और समाज को एकजुट रखने का प्रयास किया। उनका ध्येय हमेशा समाज की महिलाएं एवं बच्चों को आगे बढ़ने का प्रयास रहा। इस दौरान समाज के सचिव की जिम्मेदारी मुझे फिर से मिली।

उस दौरान एक ऐसी स्थिति हुई कि तत्कालीन मुख्यमंत्री के सचिव वी के पांडियन का आवास, भवन के काफी नजदीक था। इस दौरान अध्यक्ष के पास भवन के लिए एक ऐसे व्यक्ति का फोन आया, जिसे कुछ कार्यक्रम के लिए भवन की जरूरत थी और उसे मना करना असंभव था। इसी दौरान पांडियन जी के घर के सामने पार्किंग को लेकर विवाद हो गया। उन्होंने भवन को दूसरे दिन ही खाली करने के लिए जीए विभाग से नोटिस भिजवा दी। इसके बाद मुझे और गुप्ता जी को बुलाया और कहा कि आप स्टे के लिए हाई कोर्ट गए तो यह मैटर व्यक्तिगत हो जाएगा। इसके बाद समाज की कोर कमेटी की आपातकालीन बैठक बुलाई गई। स्टे लाने के पेपर पर साइन करने की बात उठी तो कुछ एक ऐसी बात हुई जिसे मैं सार्वजनिक करना नहीं चाहता और मैंने उस पेपर पर साइन करके पांचवें ही दिन स्टे ला दिया।स्टे आने के दौरान महेंद्र जी भुवनेश्वर से बाहर थे, तो पांडियन जी ने मुझे तत्काल मिलने को कहा। इसके बाद मैंने अपने परम मित्र और उस समय के कैबिनेट मंत्री श्री देवी प्रसाद जी मिश्रा से संपर्क किया और उनका साथ लेकर श्री पांडियन जी से समय लेकर मिलने पहुंचा। इसमें बहुत लंबी कहानी है। मुझे और अध्यक्ष जी को इसके लिए क्या कीमत चुकानी पड़ी है उसे मैं और हमारे अध्यक्ष महेंद्र गुप्ता जी जानते हैं।

इस दौरान मुझे कहा गया कि आप समाज का नेतृत्व लीजिए। किसी कारणवश उस समय मेरी कुछ मजबूरियां थी, कुछ वित्तीय समस्याएं थी। इससे मैंने अपने छोटे भाई संजय लाठ जी को कहा कि आपमें समाज का नेतृत्व करने की पूर्ण क्षमता है। क्योंकि उत्कल प्रांत के पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के साथ संगठन के भारतवर्ष के भी आप सचिव हैं। आप सोसाइटी के अध्यक्ष का पदभार संभाले। मेरा आपसे अनुरोध है कि आप आपने साथ जितेंद्र मोहन गुप्ता (मिकू) को सचिव बनाएं। मेरे अनुरोध को संजय जी ने स्वीकार किया। इसके बाद मेरा स्पाइन का ऑपरेशन होना था, सभी ने मिलकर संजय जी को निर्विरोध अध्यक्ष चुना। उन्होंने प्रण लिया था कि मैं अपने इस कार्यकाल में भवन की जितनी बाधाएं हैं उसे खत्म करने का पूरा प्रयास करूंगा। भवन सुचारू रूप से चले इसके लिए पूरा प्रयास करूंगा। अध्यक्ष जी ने इस कार्य की जिम्मेदारी मुझे दी जिस पर मैं खरा उतरा। अध्यक्ष जी ने होली बंधु मिलन के सार्वजनिक कार्यक्रम में मेरी खूब प्रशंसा की और सभी को बताया कि असंभव कार्य को संभव करके उपाध्यक्ष शिवकुमार अग्रवाल जी ने समाज को दिया है। कांवरिया सेवा, होली बंधु मिलन का दायित्व मेरे चाचा सुरेश जी, राम अवतार खेमका जी, सुशील अग्रवाल जी, कैलाश जी अग्रवाल (गौतम नगर वाले) और कई वरिष्ठ सदस्यों को साथ लेकर वर्षों से निभाते आ रहे हैं।

अब मैं कुछ ऐसे महानुभवों के बारे में बताना चाहता हूं जिनका साथ मुझे सचिव रहते हुए जब भी समाज के लिए जरुरत हुई, निरंतर तन मन धन से मिलता रहा, उनको मैं भूल नहीं पाऊंगा। इसमें मुख्य रूप से मनसुख जी सेठिया, प्रकाश जी बेताला, सुशील जी अग्रवाल, दीवान चंद जी गर्ग, आनंद जी पुरोहित, मेरे हमेशा के मार्गदर्शक और मेरे भीष्म पितामह श्री राम प्रताप जी खेरिया हैं जिनकी मैं शब्दों से प्रशंसा नहीं कर सकता। मुख्यतः समाज को हमेशा जोड़ कर रखने के लिए हमेशा हंसमुख चेहरे से उन्होंने हमेशा प्रयास किया कि यह समाज सदैव एकजुट रहे। मुकेश गोयनका, प्रदीप गुप्ता, डॉ रमेश गोयनका सदैव समाज हित के लिए खड़े रहते हैं।

आज हमारे बीच नहीं है स्वर्गीय सुदर्शन जी गोयनका, स्वर्गीय चिरंजीव लाल जी गोयल, स्वर्गीय लक्ष्मण महिपाल जी, स्वर्गीय दीपचंद अग्रवाल, स्वर्गीय धनपत गुप्ता, स्वर्गीय कनैह्या लाल जी शर्मा, स्वर्गीय बंसीधर जी अग्रवाल, जिनका सदैव मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद मिलता रहा।

मैं विशेष कर एक बात और कहना चाहता हूं हमारे समाज के ही अपने स्वर्गीय रामदास जी अग्रवाल राज्यसभा के कई बार सांसद रहे। आप जब दूसरी बार सांसद बने उस समय ओमप्रकाश लाठ जी ने रामदास जी को फोन किया कि भुवनेश्वर मारवाड़ी समाज आपको सम्मानित करना चाहता है। उन्होंने अपनी स्वीकृति दे दी। होटल मेघदूत में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। उनसे मेरी पहली मुलाकात थी। उन्होंने कई बिंदुओं पर अपने वक्तव्य में चर्चा की। खासकर समाज को एकजुट रखकर कैसे आगे बढ़ाना है। सभी घटक को एक रखना है। उनके इसी वक्तव्य से प्रभावित होकर मैने आगे वही राह पकड़ी और उसी राह पर अब तक चलने का प्रयास किया है।

आज हमें खुशी होती है कि अपने स्वर्गीय पिताजी के संस्कारों से प्रभावित होकर श्री अजय अग्रवाल जी लगातार सेवा कार्य से जुड़े हुए हैं। उनके कार्यप्रणाली और सेवा भाव को देखते हुए उन्हें भारतीय जनता पार्टी ओडिशा प्रांत का कोषाध्यक्ष बनाया गया है। यह अपने आप में हमारे समाज के लिए बहुत बड़ी सफलता है। ऐसे ही हमारे समाज के और कुछ लोग जो राजनीति में हैं वे अजय भाई के संपर्क में रहें। क्योंकि उनसे उन्हें सीखने को बहुत कुछ मिलेगा।

इस बीच सजन सुरेखा जी का मेरे पास फोन आया कि सर्वसम्मति से नया अध्यक्ष चुनने के लिए सुभाष जी अग्रवाल ने 26 सितंबर दोपहर में होटल मेफेयर में मीटिंग बुलाई है, निमंत्रण देने की जिम्मेदारी मुझे दी है, आपको आना है। तो मैंने कहा मैं जरूर आऊंगा। दूसरे दिन सुबह-सुबह सुभाष जी का फोन आया कि तुम आ रहे हो तो, तब मैंने कहा सुभाष जी अगर आप प्रेसिडेंट बन रहे हो तो मैं जरूर आ रहा हूं। उन्होंने कहा आप आओ बात करते हैं। जब मैं मीटिंग में पहुंचा तो सुभाष जी ने बताया कि हम कमल अग्रवाल को अध्यक्ष बनाना चाहते हैं। मैं कुछ समझा नहीं, कौन कमल अग्रवाल है, वहां उपस्थित लोग चर्चा करने लगे और काफी आक्रोशित नजर आ रहे थे। क्योंकि पहले से चर्चा चल रही थी की भवन को अगर पूर्ण रूप देना है तो सुभाष जी को एक बार फिर अध्यक्ष बनना होगा। हालांकि सुभाष जी ने कहा कि अभी मैं अध्यक्ष पद स्वीकार करने की स्थिति में नहीं हूं। इसके बाद मैंने वहां की जो स्थिति देखी और मुझे जो समझ में आया, मुझे लगा की उमेश खंडेलवाल को अध्यक्ष बनाया जाए। हालांकि मेरा और उमेश का व्यक्तिगत संबंध बहुत अच्छा नहीं है, यह बात पूरा भुवनेश्वर जानता है।

हालांकि एक बात यह भी है कि समाज के एक ऐसे युवा को जिसे हमने किसी सामाजिक कार्य में नहीं देखा हो, समाज के लिए उससे सामान्य चंदा जो आता होगा वह मुझे ज्ञात नहीं। मारवाड़ी समाज के भवन निर्माण, समाज के विभिन्न कार्यों के लिए कोई बड़ी रकम दी हो, या कभी कांवरिया सेवा या पुरी रथ यात्रा में सेवा कार्य किया हो, आज तक मेरी नजर में तो नहीं है। ऐसे में जिस युवक को आज तक हमने नहीं देखा हो, समझा हो, फिर उसके कंधे पर समाज की जिम्मेदारी कैसे दे सकते हैं।

हालांकि वहीं उमेश खंडेलवाल को हम समाज के किसी भी कार्य के लिए सबसे पहले खड़ा देखते हैं। कोरोना के दौरान बिना मास्क पहने खुद खाना बनाकर भूखों को खिलाते देखा है। इस दौरान मैंने उमेश से पूछा कि मैं अपनी तरफ से कुछ करना चाहता हूं आप इतना बढ़िया कार्य कर रहे हो, क्योंकि मैंने खुद उस कैंप को जाकर देखा था। आज समाज के अंदर किसी के शादी, किसी के जन्मदिन, किसी के अंतिम क्रिया, हर जगह उमेश की उपस्थित देखते हैं। खुद भुवनेश्वर की सांसद, उमेश को अपना छोटा भाई के तौर पर मानती हैं। अभी हाल ही में हमारे समाज के ही सदस्य मुकेश गोयनका के घर के सामने बने गौशाला को लेकर उपजे विवाद का समाधान उमेश ने बड़े ही शांतिपूर्वक ढंग से करवा दिया। इतना ही नहीं जो लड़के मुकेश के दुश्मन बने हुए थे उनसे पर पकड़वाकर माफी भी मंगवायी। ऐसे में मेरे विचार से जो सदस्य हमारे समाज का अध्यक्ष बनेगा, उसके पास तन-मन-धन की सुविधा होनी चाहिए। उसी को समाज का अध्यक्ष बनना चाहिए। विशेष कर अभी हाल ही में साध्वी ऋतंभरा जी का पुरी में भागवत कथा का आयोजन हुआ उसमें उमेश की क्या भूमिका रही या किसी से छिपी नहीं है, यह सबके सामने है। आज ऐसा कोई राज्य नहीं है जिस राज्य में उमेश का राजनीतिक, सामाजिक क्षेत्र में मजबूत नेटवर्क ना हो। हालांकि मेरा अच्छा संबंध न होने के बावजूद मैंने एक काम उमेश को सौंपा और उसने तुरंत कर दिया। भुवनेश्वर समाज का उदाहरण पूरे हिंदुस्तान में दिया जाता है कि भुवनेश्वर समाज एक ऐसा समाज है जिसमें जैन, अग्रवाल, माहेश्वरी, ब्राह्मण, खंडेलवाल, राजस्थान हरियाणा के जाट, काठ व मार्बल मिस्त्री, महिला समिति, मारवाड़ी युवा मंच, दादी मंडली, परशुराम समाज, विप्र फाउंडेशन, श्याम मंदिर ट्रस्ट जैसे अनेकों घटक सेवा कार्य कर रहे हैं। लेकिन इन सभी घटकों का नेतृत्व मारवाड़ी समाज करता है। 7000 लोगों का एक साथ भोजन बनता है। इसमें राजनीति क्षेत्र, सामाजिक क्षेत्र, ब्यूरो क्रॉप्स, इंजीनियर, उत्तर भारत के डॉक्टर को आमंत्रित किया जाता है।

विशेष कर कैपिटल एंटरप्राइजेज नंदू भाई एवं पवन गुप्ता जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्हें जब भी सामाजिक कार्य के लिए फोन किया जाता है तो वह कभी बजट के बारे में नहीं पूछते सदैव दान देने के लिए आगे खड़े रहते हैं। भुवनेश्वर समाज की एकता की सभी वर्ग के लोग प्रशंसा करते हैं। लोग कहते हैं कि भुवनेश्वर समाज में ऐसा क्या जादू है कि समाज सदैव सेवा कार्य के लिए एकजुट रहता है।

अंत में, हमारे बुजुर्गों द्वारा बताए गए रास्ते पर चलते हुए हमारी चाहत सिर्फ एक संयुक्त और मजबूत समाज के गठन की है।

 

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