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ओडिशा में समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की तैयारी

  •     एमपीईडीए और राज्य सरकार ने बनाया रोडमैप

  •     2036 तक सालाना 5,000 करोड़ रुपये के समुद्री निर्यात का लक्ष्य

  •     टूना मछली और मूल्यवर्धित उत्पादों पर रहेगा विशेष जोर

  •     कच्चे समुद्री उत्पादों के बजाय प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने पर फोकस

  •    चिलिका की मड क्रैब और ब्लैक टाइगर झींगा की ब्रांडिंग तथा मछुआरों को प्रशिक्षित करने की योजना

भुवनेश्वर। ओडिशा में समुद्री उत्पादों के निर्यात को नई गति देने और वर्ष 2036 तक सालाना लगभग 5,000 करोड़ रुपये के समुद्री निर्यात का लक्ष्य हासिल करने के लिए समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) और राज्य सरकार ने संयुक्त रणनीति तैयार करने की दिशा में पहल की है। एमपीईडीए के अध्यक्ष पी जवाहर, आईएएस ने ओडिशा की मुख्य सचिव अनु गर्ग, आईएएस से मुलाकात कर राज्य में समुद्री उत्पादों के उत्पादन, प्रसंस्करण, निर्यात और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।

इस दौरान राज्य सरकार और एमपीईडीए के बीच निर्यात की संभावनाओं का विस्तार करने, अधिक मूल्य वाले समुद्री उत्पादों को प्रोत्साहित करने और वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पादन एवं प्रसंस्करण व्यवस्था विकसित करने पर विचार-विमर्श हुआ। मुख्य सचिव ने समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एमपीईडीए से आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का आग्रह किया। दोनों पक्षों ने राज्य में समुद्री निर्यात बढ़ाने के लिए मिलकर कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति जताई।

समुद्री संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर

ओडिशा के पास लगभग 575 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा, एशिया की सबसे बड़ी खारे-मीठे पानी की झीलों में शामिल चिलिका झील, विस्तृत खारे पानी वाले क्षेत्र और बड़े जलाशय हैं। इन संसाधनों के बावजूद समुद्री उत्पादों के क्षेत्र में निर्यात की कई संभावनाओं का अभी पूरा उपयोग नहीं हो पाया है। इन्हीं संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए बैठक में सात प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की रणनीति पर चर्चा हुई।

इनमें मूल्यवर्धित समुद्री उत्पादों के निर्यात में हिस्सेदारी बढ़ाना, मड क्रैब और स्कैम्पी जैसी अधिक कीमत वाली प्रजातियों के उत्पादन एवं निर्यात को प्रोत्साहित करना और चिलिका झील की मड क्रैब तथा ब्लैक टाइगर झींगा को भौगोलिक संकेतक (जीआई) पहचान दिलाने के साथ उनकी विशिष्ट ब्रांडिंग करना शामिल है।

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय समुद्री खाद्य प्रदर्शनियों में भारत मंडप के तहत ओडिशा की भागीदारी बढ़ाने, गहरे समुद्र में टूना मछली पकड़ने और जहाज पर ही उसके प्रसंस्करण के लिए मछुआरों एवं नौकाकर्मियों को प्रशिक्षित करने पर भी जोर दिया गया। राज्य के जलाशयों को एमपीईडीए से जोड़कर मीठे पानी की मछलियों के निर्यात के अवसर विकसित करने तथा जलीय कृषि फार्मों को एक्वाट्रेस प्रणाली से जोड़ने की योजना पर भी चर्चा हुई। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उत्पादों की उत्पत्ति और आपूर्ति शृंखला का पता लगाने संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।

डीप सी फिशिंग मिशन से मिलेगी निर्यात को गति

ओडिशा सरकार ने वर्ष 2026 से 2036 की अवधि के लिए डीप सी फिशिंग मिशन को 2,295 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी है। इस मिशन का उद्देश्य समुद्री उत्पादन बढ़ाना, रोजगार के नए अवसर पैदा करना और वर्ष 2036 तक सालाना लगभग 5,000 करोड़ रुपये का समुद्री निर्यात हासिल करना है। इसमें टूना जैसी गहरे समुद्र में पाई जाने वाली मछलियों के उत्पादन और निर्यात पर विशेष ध्यान दिया गया है।

एमपीईडीए और राज्य सरकार के बीच हुई चर्चा को इसी मिशन के लक्ष्यों से जोड़कर देखा जा रहा है। गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की क्षमता विकसित करने के साथ-साथ आधुनिक प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, उत्पादों की पहचान सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के मानकों के अनुरूप आपूर्ति व्यवस्था तैयार करना इस दिशा में महत्वपूर्ण होगा।

झींगा पर निर्भरता घटाकर निर्यात में विविधता लाने की तैयारी

ओडिशा से समुद्री उत्पादों के निर्यात के मूल्य में समग्र वृद्धि दर्ज की गई है और उपलब्ध हालिया आंकड़ों के अनुसार इसका मूल्य 5,400 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। हालांकि, राज्य के समुद्री निर्यात में झींगा की हिस्सेदारी अभी भी प्रमुख बनी हुई है। ऐसे में निर्यात उत्पादों की विविधता बढ़ाना, अधिक प्रसंस्कृत उत्पादों को बाजार में उतारना और अन्य समुद्री एवं मीठे पानी की प्रजातियों के लिए नए बाजार विकसित करना आवश्यक माना जा रहा है।

एमपीईडीए का मानना है कि बेहतर प्रसंस्करण सुविधाओं, प्रशिक्षित मानव संसाधन, प्रभावी ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुपालन से ओडिशा के समुद्री उत्पादों की वैश्विक बाजार में पहुंच मजबूत हो सकती है।

एमपीईडीए अध्यक्ष पी जवाहर ने राज्य सरकार की ओर से मिले सहयोग और स्वागत के लिए आभार जताया। दोनों पक्षों की सहमति के बाद अब राज्य के समुद्री संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और ओडिशा को देश के प्रमुख समुद्री उत्पाद निर्यातक राज्यों में स्थापित करने के उद्देश्य से संयुक्त रणनीति और कार्ययोजना तैयार करने पर जोर रहेगा।

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