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हाईकोर्ट ने समीक्षा करने को दिया 15 दिनों का समय
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ढेंकानाल नगरपालिका के भूमिहीनों और झुग्गीवासियों को राहत
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प्रभावितों का पक्ष सुनकर कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश
कटक। ओडिशा हाईकोर्ट ने ढेंकानाल नगरपालिका क्षेत्र में भूमिहीनों और झुग्गीवासियों को जारी भूमि अधिकार प्रमाणपत्रों (एलआरसी) को रद्द किए जाने के मामले में अधिकारियों को पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति गौरीशंकर सतपथि की पीठ ने प्रकाश चंद्र कुंअर और अन्य याचिकाकर्ताओं से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को उनका पक्ष सुनने और 15 दिनों के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लेने को कहा है।
बिना पक्ष सुने प्रमाणपत्र रद्द करने को दी गई चुनौती
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में दलील दी कि उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना ही भूमि अधिकार प्रमाणपत्र रद्द कर दिए गए। उनका कहना था कि इस कार्रवाई से पहले उन्हें सुनवाई का उचित अवसर नहीं मिला। इसी आधार पर प्रमाणपत्र रद्द करने के फैसले को चुनौती दी गई थी।
ये प्रमाणपत्र ढेंकानाल नगरपालिका क्षेत्र के भूमिहीन व्यक्तियों और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों को जारी किए गए थे। प्रमाणपत्र रद्द किए जाने के बाद प्रभावित लोगों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
प्रशासन ने दूसरी जमीन होने का दिया हवाला
प्रशासन की ओर से प्रमाणपत्र रद्द करने के पीछे संबंधित लाभार्थियों के पास अन्य भूखंड होने का तर्क दिया गया। हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का अवसर दें और पूरे मामले पर फिर से विचार करें।
15 दिनों में कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी लाभ वापस लेने की कार्रवाई मनमाने ढंग से नहीं की जा सकती और इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं की बात सुनकर भूमि अधिकार प्रमाणपत्र रद्द करने के फैसले की समीक्षा करने तथा 15 दिनों के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया।
अदालत के इस आदेश से प्रभावित लोगों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। हालांकि, हाईकोर्ट ने प्रमाणपत्रों को स्वतः बहाल करने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि अधिकारियों को मामले पर दोबारा विचार कर कानून के अनुरूप निर्णय लेने को कहा है।
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