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टिखिरी सरपंच चंपा ओझा मामले में एनएचआरसी की जांच तेज

  •  महाकालपाड़ा थाने में अधिकारियों से पूछताछ

  •  दलित महिला सरपंच से कथित दुर्व्यवहार और पुलिस कार्रवाई पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग गंभीर

  •  बीडीओ समेत ब्लॉक अधिकारियों से लिए जा रहे बयान

केंद्रापड़ा। केंद्रापड़ा जिले के टिखिरी पंचायत की दलित महिला सरपंच चंपा ओझा से जुड़े विवादित मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की जांच तेज हो गई है। मामले की पड़ताल के लिए आयोग की तीन सदस्यीय विशेष टीम केंद्रापड़ा पहुंची और महाकालपाड़ा थाने में पुलिस अधिकारियों, प्रखंड प्रशासन के अधिकारियों तथा कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ शुरू की।

निर्वाचित जनप्रतिनिधि और दलित महिला के साथ कथित दुर्व्यवहार तथा उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर आयोग ने मामले को गंभीरता से लिया है।

बीडीओ कक्ष में जातिसूचक टिप्पणी और मारपीट का आरोप

मामला 11 जून का है, जब टिखिरी की सरपंच चंपा ओझा ने लिखित शिकायत देकर प्रखंड प्रशासन के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। सरपंच का आरोप था कि महाकालपाड़ा प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) के कक्ष में उनके साथ जातिसूचक टिप्पणी की गई, दुर्व्यवहार किया गया और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

वहीं, प्रशासन और पुलिस की ओर से सरपंच के खिलाफ भी पलट आरोप लगाए गए। उन पर सरकारी कार्य में बाधा डालने और अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया गया। विवाद के बाद पुलिस ने अस्पताल में उपचार करा रहीं सरपंच चंपा ओझा को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई।

घटनास्थल का भी होगा सत्यापन

मामले में लगाए गए आरोपों और सरपंच के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने विशेष जांच टीम भेजी है। तीन सदस्यीय टीम ने महाकालपाड़ा थाने में स्थानीय पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ बीडीओ और प्रखंड कार्यालय के अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की तथा उनके बयान दर्ज किए।

आयोग की टीम घटना से जुड़े प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज कर रही है। अधिकारियों और गवाहों से पूछताछ पूरी होने के बाद टीम के घटनास्थल का दौरा कर मौके पर स्थिति का प्रत्यक्ष सत्यापन करने की संभावना है। इसके साथ ही आयोग की टीम सरपंच चंपा ओझा से भी मुलाकात कर उनका पक्ष सुनेगी।

मामले को लेकर चर्चा तेज

एनएचआरसी की इस जांच के बाद स्थानीय स्तर पर मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोगों की नजर अब आयोग की जांच रिपोर्ट पर है और यह उम्मीद की जा रही है कि जांच में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका दोषपूर्ण पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।

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