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सीईओ कार्यालय का घेराव
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एसआईआर के जरिए मतदाता सूची में गड़बड़ी का लगाया आरोप
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बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश
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बीजद भी दिल्ली में विपक्ष के प्रदर्शन में शामिल
भुवनेश्वर। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर ओडिशा में कांग्रेस और बीजद का विरोध अब तेज होता दिखाई दे रहा है। भुवनेश्वर में यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। वहीं, बीजद ने भी नवीन पटनायक के निर्देश पर दिल्ली में विपक्षी दलों के विरोध मार्च में शामिल होकर सीईसी के इस्तीफे की मांग उठाई।
यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लगाए नारे, पुलिस ने रोका
भुवनेश्वर में प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता बैनर और पोस्टर लेकर सीईओ कार्यालय के बाहर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार कर कार्यालय की ओर बढ़ने का प्रयास किया, जिसके बाद मौके पर तैनात पुलिस बल ने उन्हें रोक दिया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और इससे पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल देशभर में एसआईआर को लेकर इसी तरह की आपत्तियां उठा रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान यूथ कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग में कथित आंतरिक मतभेदों का भी मुद्दा उठाया। विपक्ष की ओर से दावा किया जा रहा है कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले महीनों में एसआईआर से जुड़े कई फैसलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। हाल की रिपोर्टों में ऐसे 14 औपचारिक मतभेदों का उल्लेख किया गया है।
बीजद भी दिल्ली के विरोध मार्च में शामिल
इस बीच बीजद ने भी सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के आंदोलन में शामिल होने का फैसला किया है। बीजद संसदीय दल के नेता मानस मंगराज ने कहा कि नवीन पटनायक के निर्देश पर पार्टी के सांसद दिल्ली में विपक्षी दलों के विरोध मार्च में शामिल हुए। बीजद पहले ही एसआईआर को लेकर सीईसी के इस्तीफे की मांग कर चुका है।
बीजद का आरोप है कि एसआईआर से जुड़ी प्रक्रिया के दौरान ओडिशा में 20 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका है। पार्टी ने धामनगर विधानसभा क्षेत्र में 227 अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम कथित तौर पर बूथ लेवल अधिकारियों की जानकारी के बिना हटाए जाने का भी मुद्दा उठाया है। हालांकि, ये राजनीतिक दलों द्वारा लगाए गए आरोप हैं और इन दावों पर चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष अलग हो सकता है।
ओडिशा में यह विवाद ऐसे समय और महत्वपूर्ण हो गया है जब राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आरएस गोपालन ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का अनुरोध किया है। उनके फैसले को लेकर राजनीतिक दलों के बीच एसआईआर और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हुई है।
वहीं, एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर देशभर में विपक्षी दलों का विरोध जारी है। चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। मामले को लेकर न्यायिक स्तर पर भी सुनवाई चल रही है और सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
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