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कैग रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस का हमला

  •     डीएमएफ फंड के इस्तेमाल पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग

  •     सुदर्शन दास ने कहा—खनन प्रभावित लोगों के लिए आए 26,602 करोड़ रुपये के इस्तेमाल में गंभीर अनियमितताएं

  •     कांग्रेस ने डीएमएफ की राशि वापस लेने

  •     जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और सभी परियोजनाओं का ब्योरा सार्वजनिक करने की उठाई मांग

भुवनेश्वर। जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) के धन के इस्तेमाल को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की प्रदर्शन लेखापरीक्षा रिपोर्ट सामने आने के बाद ओडिशा कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि खनन प्रभावित लोगों के विकास के लिए निर्धारित डीएमएफ की राशि का निर्धारित उद्देश्य से हटकर इस्तेमाल किया गया और कई मामलों में नियमों की अनदेखी की गई।

कांग्रेस भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पार्टी के मीडिया सेल ने कैग रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्षों को लेकर राज्य सरकार से श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुदर्शन दास ने कैग के निष्कर्षों का विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत करते हुए कहा कि वर्ष 2015-16 से 2023-24 के बीच ओडिशा के 30 डीएमएफ में 26,602.66 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, लेकिन मार्च 2024 तक इसमें से केवल 15,817.56 करोड़ रुपये यानी 59.46 प्रतिशत ही खर्च किए गए।

खनन प्रभावित गांवों की उपेक्षा

कांग्रेस ने कैग रिपोर्ट के हवाले से कहा कि केंदुझर और सुंदरगढ़ के 976 गैर-खनन प्रभावित गांवों में 2,224 परियोजनाओं पर 983.32 करोड़ रुपये खर्च किए गए। दूसरी ओर, 488 सीधे प्रभावित और 96 अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित गांवों में डीएमएफ की कोई परियोजना नहीं पहुंची।

पार्टी ने दावा किया कि तीन सीधे प्रभावित गांवों में ग्राम सभाओं की ओर से भेजे गए 49 परियोजना प्रस्तावों को बिना दर्ज कारण के स्वीकार नहीं किया गया। कांग्रेस नेताओं ने इसे खनन प्रभावित समुदायों की स्थानीय जरूरतों और ग्राम सभाओं की भूमिका की अनदेखी बताया।

कैग के निष्कर्षों के अनुसार सुंदरगढ़ डीएमएफ से 136.77 करोड़ रुपये राउरकेला अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम के निर्माण में लगाए गए। कांग्रेस ने कहा कि कैग ने इसे प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेकेवाई) के दिशा-निर्देशों के दायरे से बाहर का खर्च माना है।

 पीएमकेकेकेवाई के बाहर 317 परियोजनाओं पर 679 करोड़ रुपये का सवाल

कांग्रेस के अनुसार कैग ऑडिट में पीएमकेकेकेवाई के मानकों से बाहर 317 परियोजनाओं के लिए 679.14 करोड़ रुपये की मंजूरी का भी उल्लेख है। इनमें पानीकोइली में विज्ञान अकादमी के लिए 113.65 करोड़ रुपये, केंदुझर में ट्रक पार्किंग के लिए 63.95 करोड़ रुपये तथा गैर-प्रभावित क्षेत्र में जिला मुख्यालय अस्पताल के लिए 43.43 करोड़ रुपये का खर्च शामिल है।

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि जाजपुर, केंदुझर और सुंदरगढ़ में मनरेगा की अतिरिक्त मजदूरी के भुगतान के लिए 171.79 करोड़ रुपये डीएमएफ से खर्च किए गए, जबकि इस तरह का खर्च राज्य सरकार के बजट से किया जाना चाहिए था।

सुंदरगढ़ में प्रशासनिक सुविधाओं और अन्य मदों पर 25.01 करोड़ रुपये के कथित अनियमित खर्च का भी मुद्दा उठाया गया। कांग्रेस के अनुसार इसमें पुलिस गश्ती वाहन, नगरपालिका कार्यालय की मरम्मत और कलेक्टर आवास में रीडिंग रूम जैसे खर्च शामिल थे।

 एजेंसियों के पास 470 करोड़ से अधिक राशि लंबित

कांग्रेस ने कैग रिपोर्ट में सामने आए वित्तीय प्रबंधन से जुड़े अन्य बिंदुओं को भी गंभीर बताया। पार्टी के अनुसार जाजपुर, केंदुझर और सुंदरगढ़ में कार्यान्वयन एजेंसियों के पास परियोजनाएं पूरी होने के बाद भी 470.25 करोड़ रुपये की अप्रयुक्त राशि और 26.51 करोड़ रुपये का ब्याज पड़ा रहा।

वहीं, मयूरभंज, ढेंकानाल, नवरंगपुर और केंदुझर में डीएमएफ की अतिरिक्त राशि का उचित निवेश नहीं किए जाने से 94 करोड़ रुपये के ब्याज नुकसान का भी उल्लेख किया गया है।

 मास्टर प्लान तैयार नहीं किया

कांग्रेस ने कहा कि कैग द्वारा ऑडिट किए गए छह डीएमएफ में से किसी ने भी दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य योजना या मास्टर प्लान तैयार नहीं किया था। इन छह जिलों को प्राप्त 22,568 करोड़ रुपये में से 20,947 करोड़ रुपये की राशि बिना दीर्घकालिक रणनीति के मंजूर किए जाने का आरोप भी कांग्रेस ने लगाया।

 डीएमएफ खनन प्रभावित लोगों का अधिकार – सुधांशु देव

कांग्रेस नेता सुधांशु देव ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक चूक का मामला नहीं है, बल्कि उन लोगों के साथ अन्याय है जिन्होंने खनन गतिविधियों के कारण अपनी जमीन, जंगल और आजीविका गंवाई है। उन्होंने कहा कि डीएमएफ की राशि सरकार की संपत्ति नहीं, बल्कि खनन प्रभावित लोगों के अधिकार का धन है।

कांग्रेस ने सरकार से मांग की कि वर्ष 2015-16 से अब तक प्रत्येक जिले में डीएमएफ के तहत प्राप्त राशि, स्वीकृत परियोजनाओं, खर्च और बची राशि का जिलावार श्वेतपत्र जारी किया जाए। कैग द्वारा चिन्हित अनियमित और नियमविरुद्ध खर्च की राशि वापस लेने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई।

सीधे प्रभावित गांवों को डीएमएफ खर्च में प्राथमिकता मिले

पार्टी ने खनन प्रभावित गांवों में डीएमएफ खर्च का ग्रामवार विवरण सार्वजनिक करने, प्रत्येक परियोजना की लागत, लाभार्थी, कार्यान्वयन एजेंसी और समयसीमा की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने तथा ग्राम सभाओं के प्रस्तावों और सीधे प्रभावित गांवों को डीएमएफ खर्च में प्राथमिकता देने की मांग की। इसके अलावा प्रत्येक डीएमएफ के लिए तत्काल परिप्रेक्ष्य योजना और मास्टर प्लान तैयार करने तथा पीएमकेकेवाई के दिशा-निर्देशों से बाहर लागू की गई प्रमुख परियोजनाओं की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग भी कांग्रेस ने उठाई।

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