भुवनेश्वर, ओडिशा में एमएमडीआर कानून और प्राकृतिक संसाधनों की आपूर्ति को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री एवं सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रधान ने कहा कि ओडिशा हाईकोर्ट के हालिया फैसले से पूर्ववर्ती बीजद सरकार के कार्यकाल में एक निजी कंपनी को कथित तौर पर लाभ पहुंचाने के प्रयासों को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर नवीन पटनायक से इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
प्रधान ने कहा कि ओडिशा हाईकोर्ट ने 2004 में बीजद सरकार द्वारा एक निजी औद्योगिक कंपनी को 150 मिलियन टन बॉक्साइट की आपूर्ति के संबंध में किए गए दावे को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक संसाधनों को लेकर पुराने आश्वासनों के आधार पर लागू कानून की अनदेखी नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा एमएमडीआर कानून में किए गए बदलाव और एमसीआर, 2016 के नियम 45 में संशोधन के बाद बॉक्साइट के औसत बिक्री मूल्य पर कन्वर्जन फैक्टर लागू हुआ था। इसके परिणामस्वरूप बॉक्साइट की कीमत 750 रुपये प्रति टन से बढ़कर 1,707 रुपये प्रति टन हो गई। प्रधान के अनुसार, इससे ओडिशा माइनिंग कॉरपोरेशन (ओएमसी) को लाभ हुआ और रॉयल्टी, जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) तथा राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (एनएमईटी) के माध्यम से राज्य को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने का प्रावधान बना।
प्रधान ने आरोप लगाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 1 फरवरी 2020 को पत्र संख्या 1044 तथा 7 अक्टूबर 2020 को पत्र संख्या 8569/SM के माध्यम से केंद्र सरकार से कन्वर्जन फैक्टर को कम करने और निजी कंपनी द्वारा अपेक्षित न्यूनतम दर लागू करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
भाजपा नेता ने सवाल उठाया कि राज्य के लिए लाभकारी नियम में बदलाव अथवा पुनर्विचार का आग्रह करने के पीछे तत्कालीन राज्य सरकार का उद्देश्य क्या था और यह कदम किसके हित में उठाया गया था। उन्होंने यह भी पूछा कि एक निजी कंपनी पर लंबे समय से करीब 5,400 करोड़ रुपये की राशि बकाया रहने के लिए क्या पूर्ववर्ती सरकार की नीतियां जिम्मेदार नहीं थीं।
प्रधान ने नवीन पटनायक से पूछा कि राज्य के हित में लागू नियम को प्रभावी बनाने के बजाय केंद्र सरकार से उसमें पुनर्विचार का आग्रह क्यों किया गया। उन्होंने यह भी सवाल किया कि एक निजी कंपनी को कथित तौर पर विशेष लाभ पहुंचाने के पीछे वास्तविक कारण क्या था।
उन्होंने बीजद और नवीन पटनायक से एमएमडीआर कानून तथा प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मुद्दों पर तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया। प्रधान ने कहा कि ओडिशा के लोगों के सामने पूरे मामले की वास्तविकता रखी जानी चाहिए और ऐसे बयानों से बचना चाहिए, जिनसे जनता में भ्रम की स्थिति पैदा हो।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
