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भुवनेश्वर में अंतर्राष्ट्रीय महा संत सम्मेलन आयोजित

  •     अखंड भारत, गोमाता और गुरुकुल शिक्षा पर विशेष जोर

  •     शिक्षा के माध्यम से विरासत की पुनर्रचना

भुवनेश्वर। अंतर्राष्ट्रीय संत बौद्धिक मंच द्वारा आज भुवनेश्वर के सत्यानंद योग विद्यालय में एक उच्च-स्तरीय ‘अंतर्राष्ट्रीय महा संत सम्मेलन’ का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से आए आध्यात्मिक संतों ने सांस्कृतिक एकता, राष्ट्रीय पहचान और शैक्षणिक सुधारों पर गहन मंथन किया।

मंच के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी सर्वदेशानंद गिरि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि संगठन का तात्कालिक लक्ष्य 25 करोड़ हिंदुओं को एकजुट करना है, जिसमें से 11 करोड़ को पहले ही सफलतापूर्वक जोड़ा जा चुका है। सभा में ‘अखंड भारत’ की पुरजोर वकालत की गई और मांग की गई कि गोमाता को आधिकारिक तौर पर ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित किया जाए।

राजनीतिक भविष्यवाणियों का जिक्र करते हुए स्वामी सर्वदेशानंद ने याद किया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के 200 सीटें पार करने की उनकी भविष्यवाणी पर पहले लोगों ने संदेह जताया था, लेकिन बाद में पार्टी ने 208 सीटें हासिल कीं। उन्होंने यह भी भविष्यवाणी की कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ 300 से अधिक सीटें हासिल करेंगे। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि देश के हिंदुओं को वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद ही वास्तविक स्वतंत्रता प्राप्त हुई।

बिलासपुर (रतनपुर) से जूना अखाड़े के पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्मानंद गिरिजी महाराज ने अपने जीवन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद अपना पूरा जीवन अध्यात्म को समर्पित कर दिया। औपनिवेशिक शासन की विरासत की आलोचना करते हुए उन्होंने टिप्पणी की कि अंग्रेजों ने कॉन्वेंट शिक्षा प्रणाली मुख्य रूप से स्वतंत्र विचारक पैदा करने के बजाय आज्ञाकारी नौकर तैयार करने के लिए बनाई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज का युवा भी इसी औपनिवेशिक ढांचे से बंधे कॉर्पोरेट नौकरियों के पीछे भाग रहा है।

संतों और आध्यात्मिक गुरुओं ने वर्तमान शिक्षा मॉडल को ‘गुलामी’ की मानसिकता से मुक्त पारंपरिक ‘गुरुकुल प्रणाली’ से बदलने का समर्थन किया। वक्ताओं ने तर्क दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास” के विजन को पूरी तरह से साकार करने के लिए मूल्य आधारित और स्वदेशी शिक्षा प्रणाली का होना बेहद आवश्यक है।

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