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उत्कल विश्वविद्यालय में ‘आईकेएस इन एस्ट्रोनॉमी’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित
भुवनेश्वर। उत्कल विश्वविद्यालय में गुरुवार को ‘आईकेएस इन एस्ट्रोनॉमी’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। विश्वविद्यालय के कुलपति एवं अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त इतिहासकार प्रो चंडी प्रसाद नंद के संरक्षण तथा भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ शेषांशु शेखर पाल की अध्यक्षता में विभाग के सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ गौरीशंकर साहू ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया।
डॉ साहू ने कहा कि ज्योतिष विज्ञान के क्षेत्र में भारतीय विद्वानों का योगदान अतुलनीय रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय विद्वानों ने सौरमंडल की संरचना और ग्रहों की गति से संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाओं को प्राचीन काल में ही समझ लिया था।
उन्होंने बताया कि सौरमंडल में ग्रहों का क्रम केवल उनकी स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी गति के आधार पर भी समझा गया है। उन्होंने ग्रहों की कक्षीय व्यवस्था से सप्ताह के दिनों के नामकरण के संबंध को भी स्पष्ट किया।
डॉ साहू ने प्राचीन सिद्धांत ग्रंथों का उल्लेख करते हुए बताया कि इनमें चंद्र और सौर मास निर्धारित करने की वैज्ञानिक पद्धतियों का वर्णन मिलता है। उन्होंने कहा कि भारतीय विद्वानों को सौर जगत की संरचना और उसकी गति का सटीक ज्ञान था।
व्याख्यान के बाद डॉ साहू ने प्रतिभागियों के प्रश्नों के उत्तर दिए। कार्यक्रम में डॉ आशीष कुमार पाठी, सौभाग्य स्वाईं, डॉ हिमाद्री तनया दास सहित अन्य प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
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