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त्याग और साहस को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान
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केंद्रीय विश्वविद्यालय ओडिशा में तीन दिवसीय आयोजन के दौरान कलश यात्रा
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सांस्कृतिक कार्यक्रम और विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित
भुवनेश्वर। शहीद बाजी राउत की जन्मशती के अवसर पर केंद्रीय विश्वविद्यालय ओडिशा, सुनाबेड़ा परिसर में आयोजित तीन दिवसीय समारोह का समापन हुआ। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के मार्गदर्शन में आयोजित ‘लिविंग द लिगेसी ऑफ शहीद बाजी राउत’ कार्यक्रम का उद्देश्य उनके जीवन, त्याग और साहस से नई पीढ़ी को परिचित कराना था। इस दौरान निबंध लेखन, वाद-विवाद, नाटक, चित्रकला, नृत्य और संगीत सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।
जन्मस्थान की मिट्टी से कलश यात्रा
कुलपति प्रो (डॉ) अजित कुमार शासनी के नेतृत्व में शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा निदेशक सुब्रत कुमार प्रधान, शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी इसमें शामिल हुए।
इस अवसर पर बाजी राउत के जन्मस्थान नीलकंठपुर से लाई गई पवित्र मिट्टी को विश्वविद्यालय स्थित शहीद बाजी राउत स्मृति उद्यान में स्थापित करने के लिए कलश यात्रा निकाली गई। उनके भांजे कुलमणि राउत ने अतिथि भवन से यात्रा को रवाना किया। कुलपति के नेतृत्व में शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थियों ने इसमें भाग लिया तथा मिट्टी को स्मृति उद्यान में विधिवत स्थापित किया गया।
देशसेवा में उम्र बाधा नहीं : कुलपति
शाम को आयोजित मुख्य सभा की अध्यक्षता कुलपति प्रो शासनी ने की। उन्होंने कहा कि शहीद बाजी राउत का जीवन त्याग और देशसेवा का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र के लिए सकारात्मक योगदान देने और शिक्षा के साथ खेल के क्षेत्र में भी उत्कृष्टता हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि “सपने देखो, सपने देखो और सपने देखो।”
मुख्य अतिथि सुब्रत कुमार प्रधान ने कहा कि देश के लिए कार्य करने में उम्र से अधिक साहस महत्वपूर्ण है। उन्होंने इतिहास के अज्ञात और उपेक्षित वीरों तथा भारत की ज्ञान परंपरा को फिर से सामने लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बाजी राउत के त्याग और साहस की गाथा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
गढ़जात आंदोलन और बाजी राउत के बलिदान पर चर्चा
शहीद बाजी राउत स्मारक समिति के अध्यक्ष डॉ कृष्णचंद्र आइच ने भारत और ओडिशा के इतिहास तथा गढ़जात राज्यों के आंदोलन की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने ढेंकानाल गढ़जात आंदोलन में बाजी राउत के बलिदान के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया।
कुलमणि राउत ने बाजी राउत की विरासत और ऐतिहासिक स्मृतियों के संरक्षण की आवश्यकता बताई तथा ओड़िया कवि सच्चिदानंद राउतराय की रचना का पाठ किया। पद्मश्री जितेंद्रिय हरिपाल ने बाजी राउत को समर्पित स्वरचित गीत प्रस्तुत किया।
पद्मश्री पटायत साहू ने पारंपरिक ज्ञान, देशी कृषि पद्धतियों और औषधीय पौधों के संरक्षण पर जोर दिया। प्रभारी कुलसचिव डॉ संजय प्रधान ने स्वागत भाषण दिया। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार और नकद पुरस्कार प्रदान किए गए।
समारोह में संयोजक सुमित कुमार बेहरा ने धन्यवाद ज्ञापित किया, जबकि हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ चक्रधर पाढ़ी ने संचालन किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, कर्मचारी और विद्यार्थी सहित कोरापुट क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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