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संबलपुर-सुंदरगढ़-झारसुगुड़ा-बरगढ़ तथा अनुगूल-ढेंकानाल को अलग ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन’ बनाने का अनुरोध
भुवनेश्वर। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राज्य के संतुलित आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य से ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर संबलपुर-सुंदरगढ़-झारसुगुड़ा-बरगढ़ क्लस्टर तथा अनुगूल -ढेंकानाल क्लस्टर को दो अलग-अलग ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन’ के रूप में विकसित करने का अनुरोध किया है। उन्होंने यह प्रस्ताव भुवनेश्वर-कटक-पुरी-पारादीप आर्थिक क्षेत्र मॉडल के आधार पर रखा है।
पत्र में प्रधान ने उल्लेख किया है कि संबलपुर-सुंदरगढ़-झारसुगुड़ा-बरगढ़ क्षेत्र हीराकुद बांध, महानदी और ब्राह्मणी नदी के तट पर स्थित है तथा यहां प्रचुर खनिज संपदा और विकसित औद्योगिक आधार मौजूद है। पर्यटन की व्यापक संभावनाओं से समृद्ध इस क्षेत्र में सड़क, रेल और हवाई संपर्क के माध्यम से कृषि, सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों का तेज विकास संभव है। यहां इस्पात, एल्युमिनियम, कोयला और ऊर्जा उद्योगों के साथ कृषि आधारित उद्योग तथा प्रसिद्ध संबलपुरी हस्तकरघा की मजबूत उपस्थिति एक समन्वित आर्थिक वातावरण तैयार करती है, जिससे रोजगार और व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे।
एनआईटी राउरकेला, आईआईएम संबलपुर, वीएसयूटी बुर्ला और संबलपुर विश्वविद्यालय जैसे संस्थान इस क्षेत्र को नवाचार, स्टार्ट-अप और ‘न्यू एज इकोनॉमी’ का केंद्र बनाने की क्षमता रखते हैं। भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमा से सटा है तथा भुवनेश्वर, रायपुर, रांची और विशाखापट्टनम जैसे प्रमुख शहरों से लगभग 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित है। झारसुगुड़ा (वीर सुरेंद्र साय हवाई अड्डा), राउरकेला, संबलपुर (जमादारपाली) और बरगढ़ (सतिभाटा) के हवाई ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। देब्रिगढ़, भीममंडली, वेदव्यास और खंडाधार-प्रधानपाट जैसे पर्यटन स्थलों में पर्याप्त संभावनाएं बताई गई हैं।
इसी प्रकार पत्र में कहा गया है कि अनुगूल -ढेंकानाल क्षेत्र न केवल ओडिशा बल्कि पूरे भारत की आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है। राज्य के मध्य भाग में स्थित यह क्षेत्र तटीय बंदरगाहों और खनिज समृद्ध पश्चिमी भाग को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। कोयला, क्रोमाइट और लौह अयस्क की उपलब्धता इसे भारी उद्योग, नए कारखानों और सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयुक्त बनाती है। अनुगूल स्थित नाल्को, एनटीपीसी कणिहा, तालचेर ताप विद्युत परियोजनाएं तथा महानदी कोलफील्ड्स जैसे प्रतिष्ठान राज्य की ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ हैं।
ब्राह्मणी नदी पर घोषित राष्ट्रीय जलमार्ग-5 परिवहन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा और तालचेर-कलिंगनगर-पारादीप के बीच खनिजों के सस्ते परिवहन का मार्ग खोलेगा। ढेंकानाल में इस्पात और रक्षा उत्पादन क्षेत्र में नए निवेश औद्योगीकरण को बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि आईजीआईटी सारंग और अनुगूल का स्किल इंडिया सेंटर युवाओं को रोजगारोन्मुख कौशल प्रदान कर रहे हैं। सतकोशिया टाइगर रिजर्व, कपिलास और सप्तशय्या जैसे पर्यटन स्थल स्थायी आर्थिक विकास की संभावनाएं रखते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये दोनों क्लस्टर राज्य के कुल जीएसडीपी में 26 प्रतिशत से अधिक योगदान देते हैं। यहां जीसीसी डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, वस्त्र उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण (विशेषकर लघु वनोपज आधारित) क्षेत्रों में बड़े निवेश की संभावना है, साथ ही पर्यटन उद्योग के विकास की भी पर्याप्त गुंजाइश है। नए कॉरिडोर विकसित होने पर औद्योगीकरण और सुनियोजित शहरीकरण के माध्यम से राज्य की समृद्धि और जनकल्याण सुनिश्चित होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘पूर्वोदय’ परिकल्पना के अनुरूप राज्य के सभी क्षेत्रों का विकास आवश्यक बताते हुए प्रधान ने कहा कि इन दो आर्थिक क्षेत्रों के गठन से औद्योगिक विकास को गति मिलेगी और हजारों स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने इस प्रस्ताव से संबंधित विस्तृत ‘कॉन्सेप्ट नोट’ भी मुख्यमंत्री को सौंपा है।
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