भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने राज्य में जमीन पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नियमों के अनुरूप बनाने के लिए जिला प्रशासन को कड़ी निगरानी के निर्देश दिए हैं। सरकार ने पंजीकरण कार्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग के साथ-साथ औचक निरीक्षण और जांच पर भी जोर दिया है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. अरविंद कुमार पाढ़ी ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा कि पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए तकनीक आधारित व्यवस्थाओं का प्रभावी इस्तेमाल किया जाए।
विभाग के अनुसार नुआपाड़ा जिले में जमीन के कथित फर्जी पंजीकरण का एक गंभीर मामला सामने आया है। मामले में कोमना तहसीलदार एवं सब-रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी सर्वेश्वर जाल को राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संबंधित अधिकारी ने कुछ स्वार्थी तत्वों के साथ कथित मिलीभगत कर एक बड़े भूखंड के फर्जी पंजीकरण को सुगम बनाया। नुआपाड़ा जिलाधिकारी से इस संबंध में जानकारी मिलने के बाद राज्य सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अधिकारी को निलंबित कर दिया।
घटना को गंभीरता से लेते हुए राजस्व विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में पंजीकरण से संबंधित गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने का निर्देश दिया है। जिलाधिकारियों से कहा गया है कि वे अतिरिक्त जिलाधिकारी (एडीएम)-सह-जिला रजिस्ट्रार के माध्यम से पंजीकरण कार्यालयों के कामकाज की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें।
इसके अलावा, पंजीकरण कार्यालयों की कार्यप्रणाली और गतिविधियों का समय-समय पर औचक निरीक्षण एवं जांच करने के भी निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि ऐसी निगरानी से अनियमितताओं की समय रहते पहचान कर उन्हें रोका जा सकेगा।
राज्य सरकार ने पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ाने के लिए तकनीक के अधिकतम उपयोग को प्राथमिकता देने की बात कही है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पंजीकरण प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सरकार ने अधिकारियों को नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने तथा अनियमितताओं में संलिप्त पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
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