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पंजीकरण अधिनियम, 1908 में प्रस्तावित संशोधनों से तेज
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पारदर्शी और पूरी तरह डिजिटल होंगी सेवाएं
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने दस्तावेज पंजीकरण व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में कागजरहित दस्तावेज पंजीकरण लागू करने के लिए पंजीकरण अधिनियम, 1908 में आवश्यक संशोधनों पर उच्चस्तरीय बैठक में चर्चा की गई।
लोक सेवा भवन में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रस्तावित कानूनी संशोधनों और नई डिजिटल पंजीकरण व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई।
आधार से पहचान सत्यापन की सुविधा, लेकिन अनिवार्य नहीं
राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि पंजीकरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सरल, तेज और नागरिक-केंद्रित बनाना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रस्तावित कागजरहित पंजीकरण व्यवस्था से नागरिकों को घर से या डिजिटल माध्यम से अधिक सुविधाजनक तरीके से पंजीकरण सेवाएं प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
नई व्यवस्था में नागरिकों की सहमति से आधार प्रमाणीकरण के जरिए इलेक्ट्रॉनिक पहचान सत्यापन की सुविधा उपलब्ध होगी। हालांकि, आधार को अनिवार्य नहीं बनाया जाएगा। पहचान सत्यापन के लिए ऑफलाइन सत्यापन, आधिकारिक रूप से वैध दस्तावेज, ई-दस्तावेज और अन्य निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।
पंजीकरण अधिनियम में आठ प्रावधानों में संशोधन
प्रस्तावित संशोधनों के तहत पंजीकरण अधिनियम के आठ मौजूदा प्रावधानों में बदलाव और नौ नए प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य मौजूदा प्रक्रिया को बदलकर शुरू से अंत तक डिजिटल पंजीकरण व्यवस्था विकसित करना है।
संशोधनों के बाद इलेक्ट्रॉनिक पुस्तकों, इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर और इलेक्ट्रॉनिक मुहर को कानूनी मान्यता देने का प्रावधान होगा। पंजीकृत दस्तावेजों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में सुरक्षित रखने तथा उनकी इलेक्ट्रॉनिक प्रतियों और अभिलेखों को कानूनी वैधता देने की व्यवस्था भी की जाएगी।
ऑनलाइन जमा होंगे दस्तावेज
प्रस्तावित व्यवस्था में पंजीकरण के लिए दस्तावेजों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जमा करने की सुविधा होगी। निर्धारित मामलों में इलेक्ट्रॉनिक उपस्थिति और इलेक्ट्रॉनिक पूछताछ की व्यवस्था भी की जा सकेगी।
पंजीकरण अभिलेखों को विशिष्ट संपत्ति पहचान संख्या (यूपीआईएन) अथवा सरकारी भू-अभिलेखों से जुड़े किसी पहचान नंबर से जोड़ने का भी प्रस्ताव है। इससे किसी संपत्ति से संबंधित विभिन्न सरकारी अभिलेखों को एक-दूसरे से जोड़ने में मदद मिलेगी।
बिक्री विलेख से बंधक तक के लिए मानकीकृत प्रारूप
नई ई-पंजीकरण और कागजरहित पंजीकरण व्यवस्था के तहत बिक्री विलेख, बिक्री का समझौता, सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी और अचल संपत्ति के बंधक जैसे दस्तावेजों के लिए मानकीकृत प्रारूप उपलब्ध कराए जाएंगे।
कुछ निर्धारित श्रेणियों के दस्तावेजों का पंजीकरण पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से करने का भी प्रावधान किया जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र पर इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर और इलेक्ट्रॉनिक मुहर होगी तथा इसकी कानूनी वैधता भौतिक प्रमाणपत्र के समान होगी।
भू-अभिलेख और अन्य सरकारी आंकड़ों से जुड़ेगा पंजीकरण तंत्र
नई व्यवस्था में पंजीकरण अभिलेखों को भू-अभिलेख, भू-नक्शे, राजस्व अभिलेख, शहरी स्थानीय निकायों, नियोजन प्राधिकरणों, वित्तीय संस्थानों और अन्य संबंधित सरकारी प्रणालियों से डिजिटल रूप से जोड़ने का प्रस्ताव है।
पंजीकरण अभिलेख, भू-अभिलेख और नामांतरण पंजिका के बीच डिजिटल समन्वय होने से नामांतरण की प्रक्रिया भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शुरू और पूरी की जा सकेगी। इससे संपत्ति के लेन-देन के बाद अभिलेखों को अद्यतन करने की प्रक्रिया अधिक तेज होने की उम्मीद है।
साइबर सुरक्षा और डिजिटल अभिलेखों के संरक्षण पर जोर
प्रस्तावित संशोधनों में इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों के संरक्षण और दीर्घकालिक संग्रहण के लिए कानूनी व्यवस्था बनाने का भी प्रावधान है। इसके साथ साइबर सुरक्षा और आपदा के समय आंकड़ों की पुनर्बहाली की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
इसका उद्देश्य डिजिटल पंजीकरण अभिलेखों की सुरक्षा, विश्वसनीयता और लंबे समय तक उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
नागरिकों को बार-बार कार्यालय जाने से मिलेगी राहत
सरकार का प्रस्तावित डिजिटल पंजीकरण तंत्र संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। भू-अभिलेखों और पंजीकरण अभिलेखों के एकीकरण से जानकारी के दोहराव को कम करने तथा विभिन्न सरकारी प्रणालियों के बीच समन्वय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
प्रस्तावित कानूनी संशोधनों के लागू होने के बाद राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग का लक्ष्य ओडिशा की पंजीकरण व्यवस्था को तकनीक आधारित, पारदर्शी, सुरक्षित, सरल और नागरिक-केंद्रित बनाना है।
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