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उर्दू-फारसी की किताबों की कमी पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा

  •  उर्दू और फारसी पढ़ने वाले विद्यार्थियों के साथ भेदभाव का आरोप

  •   जीडीपी के 7.8 प्रतिशत वृद्धि दर के दावे को भी बताया भ्रामक

भुवनेश्वर। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार पर उर्दू और फारसी विषय पढ़ने वाले विद्यार्थियों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ओड़िया, अंग्रेजी, संस्कृत और हिंदी विषयों के विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं, लेकिन उर्दू को मातृभाषा या तीसरी भाषा के रूप में चुनने वाले विद्यार्थियों को संबंधित किताबें नहीं मिल रही हैं। पार्टी ने सरकार से उर्दू और फारसी की निर्धारित पाठ्यपुस्तकों की तत्काल आपूर्ति करने की मांग की।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ हमीद हुसैन ने कहा कि सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में उर्दू तथा फारसी पढ़ने वाले विद्यार्थियों को किताबें उपलब्ध नहीं कराना गंभीर विषय है। उन्होंने बताया कि सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में स्वीकृत उर्दू शिक्षक के 804 पदों में से 289 पद अब भी रिक्त हैं और भर्ती प्रक्रिया में देरी हो रही है।

उर्दू माध्यम के विद्यार्थियों की स्थिति को बेहद खराब

वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद इमदाद ने भुवनेश्वर में उर्दू माध्यम के विद्यार्थियों की स्थिति को बेहद खराब बताया। प्रदेश अल्पसंख्यक विभाग के सचिव मल्लिक इनामुल ने दावा किया कि केवल काकटपुर प्रखंड में करीब एक हजार विद्यार्थियों ने उर्दू विषय चुना है, लेकिन वे पाठ्यपुस्तकों के अभाव में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। उन्होंने विद्यालयी पाठ्यपुस्तकों में करीब दो हजार त्रुटियों का भी दावा करते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की।

केंद्रापड़ा, पट्टामुंडेई और आली में शिक्षकों की कमी

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि केंद्रापड़ा, पट्टामुंडेई और आली के उच्च विद्यालयों में उर्दू पढ़ाई जाती है, लेकिन वहां भी शिक्षकों की कमी है। पार्टी का आरोप है कि उर्दू शिक्षकों की कमी केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे राज्य में बनी हुई है।

आंकड़ों की बाजीगरी हैं जीडीपी के आंकड़े

कांग्रेस ने केंद्र सरकार की ओर से अप्रैल-जून तिमाही में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की 7.8 प्रतिशत वृद्धि दर के आंकड़े पर भी सवाल उठाए। पूर्व राज्य वित्त मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता पंचानन कानूनगो ने इसे आंकड़ों की बाजीगरी बताते हुए कहा कि पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग के आकलन के अनुसार वास्तविक वृद्धि इससे काफी कम, करीब 2.6 प्रतिशत के आसपास हो सकती है।

कई क्षेत्रों में अपेक्षित सुधार नहीं – कानूनगो

कानूनगो ने आरोप लगाया कि आधार वर्ष में बदलाव और सांख्यिकीय पद्धति में परिवर्तन के जरिए अर्थव्यवस्था की बेहतर तस्वीर पेश की जा रही है, जबकि रोजगार सृजन, निजी निवेश और घरेलू आय जैसे क्षेत्रों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों तथा निजी निवेश को बढ़ावा देने में केंद्र सरकार विफल रही है।

जीडीपी की गणना की पद्धति पर सवाल उठाया

कांग्रेस प्रवक्ता जगदानंद प्रधान ने भी जीडीपी की गणना की पद्धति पर सवाल उठाते हुए कहा कि थोक मूल्य महंगाई का वास्तविक प्रभाव आंकड़ों में पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं हुआ है। उन्होंने चीन के साथ भारत के बड़े व्यापार घाटे, युवाओं में बेरोजगारी, निजी निवेश में ठहराव और संपत्ति के असमान वितरण का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार के आर्थिक प्रदर्शन पर सवाल खड़े किए।

देश के बढ़ते सार्वजनिक कर्ज का भी उल्लेख किया

कांग्रेस नेताओं ने रुपये के कमजोर होने और देश के बढ़ते सार्वजनिक कर्ज का भी उल्लेख किया। डॉ. हमीद हुसैन ने कहा कि 2013 में डॉलर के मुकाबले करीब 54 रुपये का रुपया अब करीब 95 रुपये तक पहुंच गया है और देश का कर्ज भी काफी बढ़ गया है।

हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है। सरकार और कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अलग-अलग सांख्यिकीय श्रृंखलाओं के आंकड़ों की सीधे तुलना करना उचित नहीं है। वहीं आलोचकों का तर्क है कि पिछले वर्ष के नाममात्र जीडीपी आंकड़ों में संशोधन से इस वर्ष की सालाना वृद्धि दर अधिक दिखाई दे रही है।

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