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धर्मेंद्र प्रधान ने युवाओं से अपनी जड़ों से जुड़े रहने का किया आह्वान
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ओडिशा की मिट्टी, संस्कृति और ग्रामीण जीवनशैली को डिजिटल मंचों के माध्यम से वैश्विक पहचान दिलाएं युवा : धर्मेंद्र प्रधान
भुवनेश्वर। ओडिशा की कला, संस्कृति, परंपरा, खान-पान और ग्रामीण जीवनशैली की अपनी विशिष्ट पहचान है। 21वीं सदी में इन विशेषताओं को सोशल मीडिया और डिजिटल मंचों के माध्यम से देश-दुनिया के सामने लाना युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है। यह बात सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली में युवा लेखक हृदानंद पृष्टि की पुस्तक ‘बैक टू विलेज’ के विमोचन समारोह में कही।
प्रधान ने कहा कि तकनीकी नवाचार, उसके संभावित दुष्प्रभाव और मानवीय क्षमताओं के बीच आज एक अंतर दिखाई दे रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मानवीय बुद्धिमत्ता के बीच जारी बहस में अंततः मानवीय मूल्यों की ही विजय होगी। एआई आज भौतिक विज्ञान से लेकर स्वास्थ्य, क्लिनिकल रिसर्च और जीवन के लगभग हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। हालांकि, इसके निर्माण में कुछ सीमित लोगों की भूमिका है, जबकि इसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे विकसित देश में लगभग 90 प्रतिशत लोगों के पास व्यक्तिगत कंप्यूटर उपलब्ध हैं, जबकि भारत में कंप्यूटर की पहुंच अभी अपेक्षाकृत सीमित है। इसके बावजूद दुनिया के कुल डिजिटल लेनदेन का लगभग 50 प्रतिशत भारत में होता है। यह भारतीय समाज की असाधारण तकनीकी क्षमता और नई तकनीक को अपनाने की योग्यता को दर्शाता है।
प्रधान ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी का जीवन स्मार्टफोन और इंटरनेट से संचालित हो रहा है। दूसरी ओर, बालवाटिका से लेकर सातवीं कक्षा तक के बच्चों में अटल टिंकरिंग लैब जैसी पहल के माध्यम से नवाचार की भावना विकसित की जा रही है। समाज और जीवन की वास्तविकताओं को समझने के लिए अपनी जड़ों तक पहुंचना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का सबसे बड़ा मंत्र है- अपनी जड़ों से जुड़े रहना है और भविष्य की ओर भी अग्रसर होना है।
प्रधान ने कहा कि हृदानंद पृष्टि की पुस्तक ‘बैक टू विलेज’ युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों, गांव, ओड़िया मिट्टी और जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रेरणादायी संदेश देती है। उन्होंने पुस्तक के लेखक, प्रकाशक और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं।
ओडिशा की संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहुंचाएं युवा
प्रधान ने कहा कि ओड़िया समाज और उसकी संस्कृति कभी संकीर्ण नहीं रही है, क्योंकि उसके आराध्य स्वयं जगत के नाथ महाप्रभु श्रीजगन्नाथ हैं। उन्होंने ओडिशा के युवाओं से राज्य के गांवों की सुंदरता, समृद्ध लोकजीवन, पारंपरिक खान-पान और सांस्कृतिक विरासत को सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि ओडिशा के पारंपरिक व्यंजन अरिसा पीठा, एंडुरी पीठा, मंडा पीठा, चकुली और पोड़ा पीठा जैसे खाद्य पदार्थों की अपनी विशिष्ट पहचान है। युवा पीढ़ी छोटे वीडियो, रील्स और तस्वीरों के माध्यम से इन व्यंजनों, स्थानीय परंपराओं और ग्रामीण जीवनशैली को वैश्विक पहचान दिला सकती है।
गांवों में बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा पर जोर
प्रधान ने ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण के प्रति विशेष जागरूकता बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि अपनी जन्मभूमि और गांव के बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए समाज के सभी लोगों को आगे आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण विद्यालयों के विद्यार्थियों और शिक्षकों को एआई प्रॉम्प्ट तथा आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार हो सकेंगे।
प्रधान ने विश्वास जताया कि वर्ष 2047 तक और उसके बाद के पांच दशकों में वैश्विक नेतृत्व करने की क्षमता ओडिशा के युवाओं में है। महाप्रभु श्रीजगन्नाथ और मां समलेश्वरी के आशीर्वाद से ओडिशा की युवा पीढ़ी शिक्षा, विज्ञान, साहित्य और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा के बल पर विश्व में राज्य का गौरव बढ़ाएगी।
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