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स्वतंत्रता दिवस को ‘स्व-अधिकार दिवस’ के रूप में मनाया जाए : पद्मश्री बलिआ बाबा

  •     राष्ट्र के समक्ष अपने 12 प्रस्ताव रखे

भुवनेश्वर। प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु एवं समाज सुधारक पद्मश्री श्रीमद बाबा बलिआ ने स्वतंत्रता दिवस को ‘स्व-अधिकार दिवस’ के रूप में मनाने सहित राष्ट्रहित, सामाजिक सुधार, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक अनुशासन से जुड़े 12 महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने इन विषयों पर सरकार, मीडिया और समाज से गंभीरता से विचार करने का विनम्र आग्रह किया।

श्रीमद बाबा बलिआ  ने शनिवार को  भुवनेश्वर स्थित बुद्ध मंदिर के ओल्ड हॉल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राष्ट्र के समक्ष अपने 12 प्रस्ताव रखे।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण एक सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसके लिए समर्पण, आपसी सम्मान और सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। उनके सुझावों में राजनीतिक व्यवस्था, राष्ट्रीय चेतना, धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका, पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा जैसे व्यापक विषय शामिल हैं।

राष्ट्रहित और राष्ट्रीय चेतना पर जोर

बाबा बलिआ ने सुझाव दिया कि स्वतंत्रता दिवस को ‘स्व-अधिकार दिवस’ के रूप में मनाया जाना चाहिए। साथ ही, विपक्षी दल को ‘प्रस्तावक दल’ के रूप में प्रस्तुत करने की अवधारणा पर भी विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने गाय (गोमाता) को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने की मांग भी रखी।

उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के दैनिक प्रसारण की शुरुआत राष्ट्रगान और भारत माता की वंदना के साथ करने का सुझाव दिया। इसके अलावा, मदरसों, मिशनरी स्कूलों सहित सभी शैक्षणिक संस्थानों में प्रार्थना की शुरुआत राष्ट्रगान से करने और देशभक्ति से जुड़े संदेशों को प्रोत्साहित करने की बात कही।

पर्यावरण और सामाजिक व्यवस्था पर सुझाव

प्राकृतिक आपदाओं के विषय में उन्होंने कहा कि भविष्य में पूर्ण प्रलय की आशंका भले ही अवास्तविक लगे, लेकिन खंड प्रलय की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने मीडिया से भय का वातावरण बनाने के बजाय आपदाओं से बचाव और उनके समाधान के उपायों पर जनजागरूकता बढ़ाने का आग्रह किया।

 धार्मिक स्थलों पर उमड़ने वाली भीड़ को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ऐसे स्थानों के आसपास पर्याप्त शौचालयों और सफाई कर्मचारियों की व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने नए धार्मिक पीठों की स्थापना पर नियंत्रण रखने तथा सरकारी जांच के बाद ही अनुमति देने का सुझाव भी दिया। इसके साथ ही पालतू एवं घरेलू पशुओं की सुरक्षा के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया।

विकास और सड़क सुरक्षा के लिए कड़े नियमों की वकालत

पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में बाबा बलिआ ने प्रस्ताव रखा कि सड़क एवं औद्योगिक निर्माण के लिए यदि एक पेड़ काटा जाता है, तो उसके बदले दस गुना अधिक पेड़ लगाए जाने चाहिए।

सड़क सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने स्पीड ब्रेकरों के निर्माण के लिए विशेष कानून बनाने और उनके अनियंत्रित निर्माण पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया। साथ ही, शराब पीकर वाहन चलाने वालों के विरुद्ध मौजूदा नियमों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता बताई।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व सांसद सौम्य रंजन पटनायक, आर्य समाज ओडिशा के अध्यक्ष डॉ आर्यकुमार ज्ञानेंद्र तथा प्रेस समन्वयक प्रणवानंद दास सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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