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12 लोग अब भी लापता
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20 फीट तक मिट्टी और पत्थरों में दब गया पूरा गांव
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150 से अधिक बचावकर्मी तलाश में जुटे
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लाइफ डिटेक्टर से खोजे जाएंगे मलबे में दबे लोग
ब्रह्मपुर। चक्रवात अर्णव के कारण हुई मूसलाधार बारिश ने दक्षिण ओडिशा के गंजाम जिले के गिड़िपावली गांव में ऐसी तबाही मचाई है कि पूरा गांव लगभग मिट्टी, विशाल चट्टानों और उखड़े हुए पेड़ों के नीचे दब गया है। 28 अक्टूबर की रात करीब तीन बजे हुए भीषण भूस्खलन के बाद से लापता लोगों की तलाश जारी है।
अब तक मलबे से एक शव बरामद किया गया है, जबकि 12 लोग अभी भी लापता हैं। बचाव दलों ने ग्रामीणों की पहचान के आधार पर रवि मल्लिक का शव खोज लिया है, लेकिन वह एक विशाल चट्टान के नीचे फंसा हुआ है। भारी पत्थर के कारण शव को बाहर निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
इस बीच कंधमाल जिलाधिकारी वेदभूषण ने बताया कि लापता लोगों का पता लगाने के लिए विशेष तकनीकी दल और लाइफ डिटेक्टर उपकरण मंगाए गए हैं, ताकि मलबे के नीचे किसी के जीवित होने के संकेतों का पता लगाया जा सके।
एनडीआरएफ और ओड्राफ का अभियान जारी
गिड़िपावली में राहत एवं बचाव अभियान के लिए गंजाम और कंधमाल जिलों के 150 से अधिक कर्मियों को लगाया गया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओड्राफ), अग्निशमन सेवा, पुलिस और विशेष अभियान समूह (एसओजी) की टीमें मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रही हैं। कंधमाल जिले से अग्निशमन सेवा की चार, ओडीआरएएफ की चार, एसओजी की चार और एनडीआरएफ की एक टीम अभियान में जुटी है।
बारिश के कारण बचाव कार्य में भारी बाधा
हालांकि, लगातार खिसकती मिट्टी, गिरते पत्थर, अस्थिर पहाड़ी ढलान और रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण बचाव कार्य में भारी बाधा आ रही है। गांव के कई हिस्सों में मिट्टी और चट्टानों का मलबा लगभग 20 फीट तक जमा है। कभी घरों से आबाद रहने वाले इस गांव में अब बांस की टूटी संरचनाएं, मिट्टी की ईंटें, टीन की चादरें और उखड़े पेड़ दिखाई दे रहे हैं। कई मवेशियों और बकरियों के भी मलबे में दबने की आशंका है, हालांकि एक गाय को जीवित बचा लिया गया है।
नौ परिवारों के 12 सदस्य लापता
प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, नौ परिवारों के कुल 26 लोगों में से 12 लोग अब भी लापता हैं। इनमें से दो घायल महिलाएं समिता मल्लिक और मानिमा प्रधान का जी. उदयगिरि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार चल रहा है। अन्य 11 ग्रामीण शुक्रवार दोपहर से कटिंगिया पंचायत के किलापंगा प्राथमिक विद्यालय में बनाए गए अस्थायी आश्रय स्थल में रह रहे थे। उनकी जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने बचाव अभियान तेज किया। शुक्रवार शाम को भी अभियान चलाया गया, लेकिन विशेष सफलता नहीं मिली। रात में अधिकारी गांव की ओर बढ़े, मगर अंधेरा और दुर्गम रास्ता बाधा बन गया। गांव तक पहुंचने के लिए पहाड़ी से लगभग एक हजार फीट नीचे उतरना पड़ता है। भंजनगर के उपजिलाधिकारी उमाशंकर बेहरा और विधायक प्रद्युम्न कुमार नायक ने शनिवार को प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर बचाव कार्यों की समीक्षा की तथा अधिकारियों से लापता लोगों को जल्द खोजने के लिए चर्चा की।
बुनियादी औजारों से हटाया जा रहा मलबा, हर कदम पर खतरा
बचाव अभियान में आधुनिक उपकरणों की कमी भी चिंता का विषय बनी हुई है। फिलहाल बचावकर्मी मुख्य रूप से लोहे की छड़, सब्बल और फावड़े जैसे बुनियादी औजारों से मलबा हटाने का प्रयास कर रहे हैं। दुर्गम पहाड़ी रास्ते, खराब दृश्यता और लगातार गिरते पत्थरों के कारण अभियान में लगे कर्मियों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती है। गिड़िपावली से सिपाइझू तक आने-जाने में लगभग दो घंटे लगते हैं। इसी वजह से शनिवार शाम को बचाव अभियान रोक दिया गया था और रविवार सुबह इसे फिर शुरू करने की योजना बनाई गई। गांव के नीचे कितने लोग और घर दबे हैं, इसका वास्तविक आकलन मलबा हटने के बाद ही हो सकेगा। 12 लोगों के लापता होने से गांव और आसपास के क्षेत्रों में चिंता और बेचैनी का माहौल बना हुआ है। रविवार को खबर लिखे जाने तक अभियान जारी था।
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