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18वें रोजगार मेले में सेवक-सेविका के 1,913 और जनजातीय भाषा के 154 शिक्षकों को मिली नियुक्ति
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जून 2024 से अब तक 48,642 युवाओं को सरकारी नौकरी
भुवनेश्वर। ओडिशा में युवाओं को कौशल विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने रविवार को भुवनेश्वर स्थित ओयूएटी परिसर के कृषि शिक्षा सदन सभागार में आयोजित 18वें रोजगार मेले में ये बातें कहीं। इस अवसर पर उन्होंने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास विभाग के अंतर्गत संचालित विद्यालयों के लिए नवनियुक्त 2,067 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इनमें 1,913 सेवक-सेविका कर्मचारी और 154 जनजातीय भाषा के शिक्षक शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने चरणबद्ध तरीके से खाली सरकारी पदों को भरने का संकल्प लिया है। जून 2024 में भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब तक 18 रोजगार मेलों के माध्यम से कुल 48,642 अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जा चुकी है। इनमें 28,693 शिक्षक शामिल हैं, जो शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार के प्रयासों को दर्शाता है।
10 जनजातीय भाषाओं में हो रही पढ़ाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा की लगभग 40 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों से संबंधित है। इन समुदायों के शैक्षणिक स्तर में सुधार के लिए सरकार विशेष पहल कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्तमान में संताली सहित 10 जनजातीय भाषाओं में स्कूली शिक्षा दी जा रही है। उन्होंने शहीद माधो सिंह हाथ खर्चा योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को आर्थिक प्रोत्साहन देकर स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति रोकने का प्रयास किया जा रहा है। राज्य में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की संख्या बढ़कर 69 हो गई है। इसके अलावा हर वर्ष 50 मेधावी विद्यार्थियों को विदेश में पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति देने की योजना भी शुरू की गई है।
शिक्षक बनें विद्यार्थियों के मित्र और मार्गदर्शक
नवनियुक्त शिक्षकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे विद्यार्थियों में सुरक्षा, विश्वास और आत्मविश्वास की भावना विकसित करें। शिक्षक केवल अनुशासन लागू करने वाले अधिकारी नहीं, बल्कि बच्चों के मित्र और मार्गदर्शक बनें। उन्होंने कार्यस्थल की चुनौतियों का धैर्य, समर्पण और सकारात्मक सोच के साथ सामना करने की सलाह दी तथा अनुशासन और समयपालन को अनिवार्य बताया। मुख्यमंत्री ने मध्याह्न भोजन जैसी कल्याणकारी योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता से दूर रहने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को ऐसे व्यवहार से बचना चाहिए, जिससे इस गरिमामय पेशे की प्रतिष्ठा प्रभावित हो। शराब सेवन और विद्यार्थियों को अमानवीय दंड देने जैसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने दक्षिण ओडिशा के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नियुक्त होने वाले सेवक-सेविका कर्मचारियों से बाढ़ के पानी में फंसे लोगों की मदद करने की भी अपील की।
शिक्षा राष्ट्र निर्माण की आधारशिला : नित्यानंद गोंड
अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री नित्यानंद गोंड ने कहा कि रोजगार मेले के माध्यम से लंबे समय से नियुक्ति पत्र की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों का इंतजार समाप्त हुआ है। उन्होंने शिक्षण कार्य को केवल पेशा नहीं, बल्कि एक महान सेवा बताते हुए कहा कि शिक्षक राष्ट्र के भविष्य के निर्माता हैं। विद्यालयों को ऐसे संस्थान के रूप में विकसित करना होगा, जहां जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण हो और विकसित भारत तथा समृद्ध ओडिशा का सपना साकार हो सके। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने नवनियुक्त अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि अब अगली पीढ़ी का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद और छत्रपति शिवाजी के जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने अच्छे शिक्षक और मार्गदर्शक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सभी नवनियुक्त कर्मचारियों से पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ काम करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में खुर्दा की सुलग्ना दास और केंदुझर के विजय कुमार नायक ने नवनियुक्त अभ्यर्थियों की ओर से अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर पंचायती राज एवं पेयजल मंत्री रवि नारायण नायक, एकाम्र विधायक बाबू सिंह, विकास आयुक्त डी.के. सिंह तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। विभागीय आयुक्त-सह-सचिव बी परमेश्वरन ने स्वागत भाषण दिया, जबकि विशेष सचिव सुजाता मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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