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ओलिव रिडले कछुओं के संरक्षण के लिए उठाया गया कदम
भुवनेश्वर। ओडिशा के गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्र में ओलिव रिडले समुद्री कछुओं के संरक्षण के लिए सात महीने का मछली पकड़ने पर प्रतिबंध 1 नवंबर से लागू हो गया है। यह प्रतिबंध 31 मई 2027 तक जारी रहेगा। राज्य सरकार ने कछुओं के वार्षिक प्रजनन एवं सामूहिक अंडे देने के मौसम को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है।
प्रतिबंध के तहत गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य के भीतर तथा केंद्रापड़ा तट से बंगाल की खाड़ी में 20 किलोमीटर तक फैले आसपास के समुद्री क्षेत्र में मछली पकड़ने की गतिविधियों पर रोक रहेगी। इसका उद्देश्य संकटग्रस्त ओलिव रिडले कछुओं को प्रजनन, अंडे देने और उनके सामूहिक आगमन के दौरान सुरक्षित एवं निर्बाध वातावरण उपलब्ध कराना है।
राजनगर मैंग्रोव वन एवं वन्यजीव प्रभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह प्रतिबंध ओडिशा समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम, 1982, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 तथा ओडिशा समुद्री मत्स्य नियम, 1983 के प्रावधानों के तहत लागू किया गया है।
प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए वन विभाग स्थानीय मछुआरा समुदायों के बीच जागरूकता अभियान चलाएगा। इसके माध्यम से मछुआरों से संकटग्रस्त समुद्री जीवों के संरक्षण में सक्रिय सहयोग देने की अपील की जाएगी।
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ओलिव रिडले कछुओं के संरक्षण और सुरक्षा के लिए मछुआरा समुदायों का सहयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
गहिरमाथा को दुनिया में ओलिव रिडले समुद्री कछुओं का सबसे बड़ा प्रजनन एवं सामूहिक अंडे देने का स्थल माना जाता है। यह इस संकटग्रस्त समुद्री प्रजाति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण प्रजनन और अंडे देने का प्राकृतिक आवास है। प्रत्येक वर्ष प्रजनन के मौसम में हजारों ओलिव रिडले कछुए ओडिशा के समुद्र तट पर एकत्रित होते हैं। इस दौरान मादा कछुए बड़ी संख्या में एक साथ समुद्र तट पर पहुंचकर अंडे देती हैं। इस अद्भुत प्राकृतिक घटना को ‘अरिबाडा’ कहा जाता है।
कछुओं के प्रजनन और अंडे देने की प्रक्रिया को सुरक्षित एवं निर्बाध बनाए रखने के लिए वन विभाग भारतीय तटरक्षक बल, समुद्री पुलिस और मत्स्य विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर काम करेगा। प्रतिबंध की अवधि के दौरान समुद्री क्षेत्र में निगरानी और गश्त बढ़ाई जाएगी, ताकि संरक्षित जलक्षेत्र में अवैध मछली पकड़ने की गतिविधियों को रोका जा सके।
वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से यह वार्षिक प्रतिबंध महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे ओलिव रिडले कछुओं के प्राकृतिक प्रजनन स्थलों की सुरक्षा के साथ-साथ उनकी संख्या और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
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