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चक्रवात मुरासु को लेकर प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतनी शुरू
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नए चक्रवाती खतरे को लेकर गंजाम जिलाधिकारी की समीक्षा बैठक
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संवेदनशील इलाकों से तत्काल निकासी के निर्देश
ब्रह्मपुर। गंजाम जिले में चक्रवात मुरासु को लेकर प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। चक्रवात अर्णव के कारण जिले में हुई भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ था। पात्रपुर में 546 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज की गई थी। सैकड़ों गांव जलमग्न हो गए थे और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा था। कई इलाकों में लोग घरों की छतों पर शरण लेने को मजबूर हुए थे।
अभी भी जिले के कई हिस्से बाढ़ के प्रभाव से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं। कुछ स्थानों पर नदियों का जलस्तर ऊंचा बना हुआ है और अनेक परिवार राहत शिविरों में रह रहे हैं। ऐसे में नए चक्रवाती खतरे ने प्रशासन की चुनौती बढ़ा दी है।
चक्रवात अर्णव से हुई भारी बारिश और बाढ़ की तबाही से उबर रहे गंजाम जिले में नए चक्रवाती तूफान की आशंका को देखते हुए जिलाधिकारी ने प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा की। 2 और 3 नवंबर को संभावित भारी से बहुत भारी बारिश तथा तेज हवाओं के पूर्वानुमान के मद्देनजर बैठक में सभी प्रखंड विकास अधिकारियों और तहसीलदारों को बाढ़ संभावित, निचले और अन्य संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का निर्देश दिया गया।
जोखिम वाले क्षेत्र में लोगों को नहीं रहने दिया जाए – डीएम
अधिकारियों को स्पष्ट कहा गया कि किसी भी जोखिम वाले क्षेत्र में लोगों को नहीं रहने दिया जाए। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य कमजोर वर्गों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित आश्रय स्थलों में पहुंचाया जाए। साथ ही प्रत्येक ग्राम पंचायत और प्रभावित हो सकने वाले गांवों में खाद्य सामग्री, पेयजल, पका हुआ भोजन, जनरेटर तथा अन्य जरूरी वस्तुओं का पर्याप्त भंडार पहले से उपलब्ध रखने को कहा गया।
जिलाधिकारी ने गांवों में माइक के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाने, चिकित्सा दलों को तैयार रखने तथा दूषित पानी, सांप काटने और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए आवश्यक व्यवस्था करने का निर्देश दिया। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओड्राफ) की टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात रखने तथा पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था करने को कहा गया। मछुआरों को 2 से 4 नवंबर तक समुद्र में नहीं जाने की सख्त सलाह दी गई है। राहत सामग्री वितरण के दौरान प्रभावित लोगों के साथ सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार करने तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने की हिदायत दी गई।
जरूरी सामग्री पहले से उपलब्ध रखने के निर्देश
प्रत्येक ग्राम पंचायत और संभावित प्रभावित गांव में भोजन, पेयजल, पका हुआ भोजन, जनरेटर और अन्य जरूरी सामग्री पहले से उपलब्ध रखने को कहा गया है। स्वास्थ्य कर्मियों को तैनात करने के साथ पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया गया है। मछुआरों को 2 से 4 नवंबर तक समुद्र में नहीं जाने की सख्त सलाह दी गई है।
राहत वितरण में संवेदनशीलता बरतने का निर्देश
गंजाम जिला प्रशासन ने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि राहत शिविरों में रहने वाले प्रभावित लोगों के साथ सम्मान और संवेदनशीलता से व्यवहार किया जाए। उन्हें मेहमानों की तरह सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। राहत और बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
3 नवंबर को चक्रवात के प्रभाव की आशंका
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार चक्रवाती तूफान मुरासु के 3 नवंबर को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर और नरसापुर के बीच तट से टकराने की संभावना है। इसके प्रभाव से दक्षिणी ओडिशा के गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मालकानगिरि में भारी से बहुत भारी बारिश तथा तेज हवाएं चलने की आशंका है।
अर्णव की तबाही के बाद एक और संभावित चक्रवाती खतरे ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है। सरकार की कोशिश है कि इस बार समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर और राहत सामग्री का अग्रिम प्रबंध कर किसी भी बड़ी जनहानि को रोका जा सके। प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे मौसम विभाग और जिला प्रशासन की चेतावनियों का पालन करें तथा किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।
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