-
ओडिशा में 1.18 लाख से अधिक लोग प्रभावित
-
75,855 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
-
कंधमाल में तीन लोगों की मौत
-
396 राहत शिविर स्थापित
-
807 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
-
गंजाम और कंधमाल जिले सर्वाधिक प्रभावित
भुवनेश्वर। चक्रवात अर्णव और उसके बाद आई बाढ़ से ओडिशा के दक्षिणी जिलों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, वहीं राज्य में 399 बच्चों का जन्म हुआ है। राज्य के विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) राजेश प्रभाकर पाटिल ने रविवार को बताया कि इस प्राकृतिक आपदा से अब तक कुल 1,18,730 लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें गंजाम और कंधमाल जिले सर्वाधिक प्रभावित हैं। कंधमाल जिले में तीन लोगों की मौत दर्ज की गई है। प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए 75,855 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है और उनके लिए 396 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान देते हुए 807 महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया, जिनमें से 399 ने बच्चों को जन्म दिया है। आपदा के कारण 75,388 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई है, जबकि 1,672 मकानों को नुकसान पहुंचा है। प्रभावित जिलों में सामान्य जनजीवन बहाल करने के लिए राहत और पुनर्बहाली कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं।
दक्षिण ओडिशा में 96 प्रतिशत से अधिक बिजली आपूर्ति बहाल
विशेष राहत आयुक्त के अनुसार, दक्षिण ओडिशा में बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए 6,400 से अधिक कर्मचारियों को तैनात किया गया है। बौध, मालकानगिरि और रायगड़ा जिलों के साथ-साथ ब्रह्मपुर शहर में बिजली आपूर्ति पूरी तरह सामान्य कर दी गई है। दक्षिण ओडिशा में कुल मिलाकर 96 प्रतिशत से अधिक बिजली आपूर्ति बहाल हो चुकी है। पेयजल व्यवस्था को सामान्य बनाने के लिए भी व्यापक कदम उठाए गए हैं। ब्रह्मपुर की प्रतिदिन 90 एमएलडी पानी की आवश्यकता के मुकाबले फिलहाल 70 एमएलडी पानी उपलब्ध कराया जा रहा है और अतिरिक्त आपूर्ति के लिए 20 पानी के टैंकर लगाए गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में 2,575 नलकूपों और 162 ग्रामीण पाइप जलापूर्ति परियोजनाओं की सफाई एवं कीटाणुशोधन के बाद उन्हें चालू किया गया है। इसके अलावा लाखों पेयजल बोतलें और पानी के पाउच वितरित किए गए हैं। जानीबाली में पेयजल आपूर्ति सामान्य करने के लिए 120 श्रमिकों और तीन पोकलेन मशीनों की मदद से रेत का अस्थायी बांध बनाया जा रहा है।
मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की चेतावनी
बंगाल की खाड़ी में बने गहरे अवदाब के 3 नवंबर तक आंध्र प्रदेश तट पार करने की संभावना को देखते हुए राज्य सरकार ने सभी संबंधित विभागों को तत्काल और प्रभावी तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने आंध्र प्रदेश तट के लिए चेतावनी जारी की है। संभावित प्रभावित क्षेत्रों और संवेदनशील तटीय इलाकों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। निचले और जोखिम वाले क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए प्रशासन को तैयार रहने को कहा गया है। राहत शिविरों, पेयजल, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और आपदा प्रतिक्रिया बलों की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। समुद्र में खराब परिस्थितियों को देखते हुए मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सख्त चेतावनी दी गई है। विशेष राहत आयुक्त ने कहा कि सरकार पूरी स्थिति पर नजर रख रही है और संभावित चक्रवात एवं बारिश से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। लोगों से घबराने के बजाय जागरूक और सावधान रहने की अपील की गई है।
नुकसान का आकलन तेज करने के निर्देश
ओडिशा के आवास एवं शहरी विकास विभाग ने चक्रवात अर्णव के बाद हुए नुकसान का प्रारंभिक आकलन तेज करने के लिए छह जिलों को निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने गंजाम, गजपति, कंधमाल, मालकानगिरि, कोरापुट और रायगड़ा की जिला शहरी विकास एजेंसी (डूडा) की टीमों को प्रारंभिक क्षति आकलन रिपोर्ट तैयार करने और जल्द से जल्द जमा करने को कहा है।
विभाग ने सभी संबंधित टीमों को इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। इन जिलों से प्राप्त रिपोर्टों को संकलित कर आवश्यक कार्रवाई के लिए विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) कार्यालय को भेजा जाएगा।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
