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राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
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निचले इलाकों से तत्काल लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का निर्देश
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गंजाम और गजपति में विशेष सतर्कता, एनडीआरएफ, ओड्राफ और अग्निशमन दल तैनात; भोजन, पेयजल, दवाइयों और राहत शिविरों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के आदेश
भुवनेश्वर। चक्रवात अर्णव के कारण दक्षिणी ओडिशा में हुई भारी तबाही और बाढ़ के जख्म अभी पूरी तरह भरे भी नहीं हैं कि बंगाल की खाड़ी में एक नए चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ के विकसित होने से राज्य में फिर चिंता बढ़ गई है। संभावित भारी बारिश, तेज हवाओं और बाढ़ की आशंका को देखते हुए ओडिशा सरकार ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को सतर्क कर दिया है। राज्य सरकार ने दूसरे संभावित चक्रवाती खतरे से निपटने के लिए कमर कस ली है। विशेषकर गंजाम, गजपति सहित दक्षिणी ओडिशा के संवेदनशील जिलों में राहत एवं बचाव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने राजीव भवन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी परिस्थिति में लोगों की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने निचले इलाकों, नदी किनारे और असुरक्षित मकानों में रहने वाले लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने तथा राहत शिविरों में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रशासन अलर्ट
बैठक में मुख्य सचिव अनु गर्ग, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ अरविंद कुमार पाढ़ी, विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। वहीं गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट, नवरंगपुर, मालकानगिरि, कंधमाल, खुर्दा और पुरी सहित संवेदनशील जिलों के जिलाधीश वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, भुवनेश्वर के निदेशक ने संभावित चक्रवाती गतिविधियों, बारिश और मौसम की स्थिति को लेकर जानकारी दी। मौसम विभाग से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर जिलों को लगातार सतर्क रहने तथा परिस्थितियों के अनुसार राहत एवं बचाव अभियान संचालित करने को कहा गया।
गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सुरक्षित पहुंचाने का निर्देश
मंत्री सुरेश पुजारी ने जिलाधीशों को निर्देश दिया कि निचले इलाकों, नदी तटवर्ती क्षेत्रों और कमजोर मकानों में रहने वाले लोगों को बिना किसी देरी के सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और अन्य जरूरतमंद लोगों को विशेष प्राथमिकता देने को कहा गया है।
गर्भवती महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों अथवा सुरक्षित आश्रय स्थलों में रखने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है, ताकि आपात स्थिति में उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल सके। प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति जोखिम वाले क्षेत्रों में असुरक्षित स्थिति में न रहे।
एनडीआरएफ, ओड्राफ और अग्निशमन दल तैनात
संभावित आपदा से निपटने के लिए एनडीआरएफ, ओड्राफ और ओडिशा अग्निशमन सेवा की टीमों को संवेदनशील तटीय और दक्षिणी जिलों में पहले से तैनात किया जा रहा है। आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल बचाव अभियान चलाने के लिए टीमों को तैयार रहने का निर्देश दिया गया है।
24 घंटे संचालित आपातकालीन नियंत्रण कक्ष सक्रिय
जिलों में 24 घंटे संचालित आपातकालीन नियंत्रण कक्ष सक्रिय रखे गए हैं। वरिष्ठ अधिकारी, प्रखंड विकास अधिकारी और जिलाधीश स्वयं स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्रों वाले कोरापुट, रायगड़ा और गजपति जिलों में जलभराव तथा भूस्खलन की आशंका को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
भोजन, दूध, पेयजल और दवाइयों की पर्याप्त व्यवस्था
समीक्षा बैठक में राहत शिविरों में भोजन और आवश्यक सामग्री की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया गया। स्कूलों, छात्रावासों और अन्य सरकारी संस्थानों के माध्यम से सामुदायिक रसोई संचालित कर प्रभावित लोगों को पका हुआ भोजन और सूखा राशन उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है।
बच्चों के लिए दूध और शिशु आहार की विशेष व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। पेयजल की आपूर्ति के लिए पानी के टैंकर और सीलबंद पानी के पैकेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जलजनित बीमारियों को रोकने के लिए नलकूपों में क्लोरीनेशन और हैलोजन की व्यवस्था तथा प्रभावित क्षेत्रों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करने को कहा गया है।
अस्पतालों, जलापूर्ति परियोजनाओं और राहत शिविरों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जनरेटर तैयार रखने तथा बिजली आपूर्ति बाधित होने पर तत्काल मरम्मत के लिए कर्मचारियों को तैनात रहने का निर्देश दिया गया है।
सांप काटने और जलजनित बीमारियों से निपटने की तैयारी
बारिश और बाढ़ के बाद उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों और चिकित्सा टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में सक्रिय किया गया है।
अस्पतालों में सांप काटने के उपचार के लिए एंटी स्नेक वेनम, ओआरएस, दस्त रोकने वाली दवाइयां और त्वचा संबंधी बीमारियों के उपचार के लिए आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडार रखने का निर्देश दिया गया है।
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