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मुख्य सचिव अनु गर्ग ने ओएसपीसीबी की कार्यप्रणाली की समीक्षा की
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कचरे को ‘वेस्ट’ नहीं, आर्थिक संसाधन मानने की जरूरत
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सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने का निर्देश
भुवनेश्वर। ओडिशा की मुख्य सचिव एवं ओडिशा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (ओएसपीसीबी) की अध्यक्ष अनु गर्ग ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्यालय का दौरा कर बोर्ड की नियामकीय व्यवस्था, पर्यावरण निगरानी, कचरा प्रबंधन, मानव संसाधन और भविष्य की कार्ययोजना की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने कहा कि राज्य में इस्पात, एल्युमिनियम, बिजली, खनन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्रों में तेजी से हो रहे औद्योगिक विस्तार के साथ पर्यावरण संरक्षण के मानकों को भी उतनी ही मजबूती से लागू करना जरूरी है।
मंजूरी की प्रक्रिया होगी पारदर्शी और तकनीक आधारित
मुख्य सचिव ने कहा कि पर्यावरणीय नियमन केवल अनुपालन की जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे पारदर्शी, आंकड़ा आधारित और तकनीक संचालित व्यवस्था में बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने पर्यावरणीय मंजूरियों की प्रक्रिया को सरल, डिजिटल और मानकीकृत करने के निर्देश दिए, ताकि उद्योगों को समयबद्ध तरीके से मंजूरी मिल सके और राज्य में निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार हो।
उन्होंने एकल-खिड़की ऑनलाइन व्यवस्था के साथ पर्यावरणीय मंजूरी प्रणाली के बेहतर एकीकरण, कागजरहित प्रक्रिया, डिजिटल निगरानी और निर्धारित समयसीमा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि इससे उद्योगों के लिए कारोबार करना आसान होगा और साथ ही पर्यावरणीय मानकों का पालन भी प्रभावी तरीके से सुनिश्चित किया जा सकेगा।
कचरे से संपदा बनाने पर जोर
अनु गर्ग ने सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि औद्योगिक और शहरी कचरे को केवल अपशिष्ट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उसे आर्थिक संसाधन में बदलने की दिशा में काम होना चाहिए। उन्होंने फ्लाई ऐश, स्लैग, रेड मड और फॉस्फोजिप्सम जैसे औद्योगिक उप-उत्पादों के पुनर्चक्रण और सड़क निर्माण तथा अन्य निर्माण कार्यों में उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही।
उन्होंने नगर निकायों के कचरे के साथ प्लास्टिक, इलेक्ट्रॉनिक, खतरनाक तथा निर्माण एवं विध्वंस से निकलने वाले कचरे के पृथक्करण और पुनर्प्राप्ति की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए। साथ ही कचरे को कच्चे माल में बदलने वाली नई तकनीकों और उद्यमों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया, ताकि रोजगार और नए कारोबारी अवसर भी पैदा हो सकें।
प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग को समान महत्व देना होगा
मुख्य सचिव ने कहा कि ओएसपीसीबी की सभी योजनाएं ‘विकसित ओडिशा-2036’ और ‘विकसित भारत-2047’ के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य की आर्थिक समृद्धि के लिए टिकाऊ औद्योगिकीकरण, पर्यावरण अनुकूल पर्यटन, हरित बुनियादी ढांचे और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग को समान महत्व देना होगा।
बैठक में ओएसपीसीबी के सदस्य सचिव डॉ मनोज वी नायर ने बोर्ड की वर्तमान नियामकीय गतिविधियों और भविष्य की रणनीति का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। केंद्रीय, क्षेत्रीय और तटीय पर्यावरण निगरानी प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण, राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख अनुसंधान एवं तकनीकी संस्थानों के साथ सहयोग, पर्यावरण संबंधी जागरूकता कार्यक्रमों के विस्तार तथा वायु और जल गुणवत्ता के वास्तविक समय के आंकड़े जनता तक पहुंचाने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।
रिक्त पदों को भरने पर जोर
मानव संसाधन की समीक्षा, रिक्त पदों को भरने, क्षेत्रीय कार्यालयों, सूचना प्रौद्योगिकी प्रभाग और कानूनी शाखा को मजबूत करने पर भी मुख्य सचिव ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि ओएसपीसीबी की मजबूत संस्थागत क्षमता के माध्यम से ओडिशा को स्वच्छ, हरित और पर्यावरणीय रूप से सक्षम राज्य बनाने के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जा सकता है।
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