-
ओडिशा सरकार ने समर्थन और सीएम माझी ने दिया भरोसा
-
संथाली भाषा विशेषज्ञों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को सौंपा मांगपत्र
-
एनईपी-2020 के तहत कक्षा 1 से 10 तक संथाली को तीन-भाषा फार्मूले में शामिल करने और शिक्षकों की भर्ती की मांग
भुवनेश्वर। आदिवासी भाषा, संस्कृति और विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तहत संथाली भाषा के विशेषज्ञों और विभिन्न संगठनों के समन्वयकों के प्रतिनिधिमंडल ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने ओल चिकी लिपि में संथाली भाषा के प्रचार-प्रसार, मान्यता और शैक्षणिक व्यवस्था में इसके व्यापक समावेश को लेकर मुख्यमंत्री को एक मांगपत्र सौंपा।
मुख्यमंत्री माझी ने प्रतिनिधिमंडल की सभी मांगों और सुझावों को गंभीरता एवं सहानुभूतिपूर्वक सुना। उन्होंने कहा कि आदिवासी भाषाओं और साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है और विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर सकारात्मक एवं त्वरित कदम उठाए जाएंगे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उल्लेख कर आदिवासी पहचान पर जताया गर्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि संथाली समाज और आदिवासी पहचान के लिए यह गर्व की बात है कि द्रौपदी मुर्मू, जो संथाली समुदाय से आती हैं, देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर राष्ट्रपति के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपलब्धि ने संथाली भाषा, संस्कृति और आदिवासी पहचान को देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान और प्रतिष्ठा दिलाई है।
प्रतिनिधिमंडल ने संथाली भाषा के विकास और शिक्षा व्यवस्था में इसके विस्तार को लेकर कई प्रमुख मांगें मुख्यमंत्री के सामने रखीं। इनमें ओल चिकी लिपि में संथाली को अल्पसंख्यक भाषा का आधिकारिक दर्जा देने तथा इससे जुड़े शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने की मांग प्रमुख रही।
संथाली को शिक्षा व्यवस्था में शामिल करने की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत कक्षा 1 से 10 तक तीन-भाषा फार्मूले में संथाली भाषा को शामिल करने की मांग की। उच्च माध्यमिक स्तर पर संथाली को मातृभाषा/भारतीय भाषा विषय (एमआईएल) और वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
इसके अलावा संथाली भाषा के लिए विशेष शिक्षक भर्ती अभियान चलाने की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल ने बरिपदा, बालेश्वर और आनंदपुर स्थित शिक्षक शिक्षा महाविद्यालयों में बीएड पाठ्यक्रम के लिए विशेष सीटें निर्धारित करने की मांग भी रखी, ताकि संथाली भाषा के लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित शिक्षक तैयार किए जा सकें।
भाषा और साहित्य के संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि ओडिशा सरकार राज्य की आदिवासी भाषाओं और साहित्य के संरक्षण तथा उनके विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि संथाली समुदाय के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञ समिति की ओर से रखी गई मांगों पर सकारात्मक तरीके से विचार किया जाएगा और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
प्रतिनिधिमंडल में पद्मश्री डॉ. दमयंती बेसरा, केंद्रीय साहित्य अकादमी के समन्वयक चैतन्य माझी, पूर्व बैसिंगा विधायक कांद्रा सोरेन, पूर्व आईएएस अधिकारी धनंजय हेम्ब्रम, डॉ. नकु हांसदा, पूर्व आईआरएस अधिकारी उदयनाथ माझी और सोमनाथ हांसदा सहित संथाली भाषा के कई विशेषज्ञ एवं प्रतिनिधि शामिल रहे।
बैठक को संथाली भाषा को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने, ओल चिकी लिपि के उपयोग को बढ़ाने तथा आदिवासी भाषा-साहित्य की पहचान और संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
