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विज्ञान भवन में 30-31 को जुटेगा विश्व हिंदी का महाकुंभ, पीएम मोदी बढ़ाएंगे शोभा

  • अटल जी के बहाने हिंदी, राष्ट्रवाद और सुशासन पर मंथन, 30-31 को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विज्ञान भवन, नई दिल्ली में

  • अटल स्मृति में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, 13 देशों के विद्वान होंगे शामिल

  • विश्व हिंदी परिषद का बड़ा आयोजन, वेंकैया नायडू, नितिन नवीन समेत कई दिग्गज आएंगे

  • भारतरत्न अटल के विचारों पर विश्व चिंतन, विज्ञान भवन में सजेगा विद्वानों का मंच

  • भारतरत्न अटल: हिन्दी, राष्ट्रवाद और सुशासन पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 30-31 अक्टूबर को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में होगा

नई दिल्ली। भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केंद्रित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन आगामी 30-31 अक्टूबर, 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में किया जाएगा। विश्व हिन्दी परिषद द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का विषय “भारतरत्न अटल: हिन्दी, राष्ट्रवाद और सुशासन” रखा गया है।

सम्मेलन के विषय में जानकारी देते हुए परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार ने बताया कि इस महामंथन में देश के शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारी, केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, सिने जगत की हस्तियां और देश-विदेश के प्रख्यात हिंदी विद्वान एक मंच पर एकत्र होंगे। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का आगमन प्रस्तावित है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, प्रह्लाद जोशी, पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, अंडमान निकोबार के उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा, आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, प्रख्यात अभिनेता आशुतोष राणा एवं पद्मश्री जयाप्रदा सहित अनेक विशिष्टजन उपस्थित रहेंगे। विदेश से भी 13 देशों के साहित्यकार, कवि एवं हिंदी पर प्रेमी भाग लेंगे।

डॉ. डी.पी. मिश्रा विश्व हिन्दी परिषद के उपाध्यक्ष ने बताया कि अटल जी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि हिंदी के वैश्विक नायक और सुशासन के पर्याय थे। संयुक्त राष्ट्र में उनका हिंदी में दिया गया पहला भाषण आज भी राष्ट्रवाद की प्रेरणा है। इस सम्मेलन के माध्यम से हम अटल जी के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाकर हिंदी को विश्व मंच पर और अधिक सशक्त बनाने का कार्य करेंगे। विज्ञान भवन में यह आयोजन हिंदी के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

डॉ विपिन कुमार, राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि हिंदी के प्रचार-प्रसार, हिंदी के विकास के लिए विश्व हिंदी परिषद एक संकल्पित संस्था है। इस महती आयोजन में न सिर्फ देश के विभिन्न राज्यों से बल्कि विश्व के 13 से भी अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहें हैं। डॉ. नन्दकिशोर साह विश्व हिन्दी परिषद के राष्ट्रीय संपर्क समन्वयक ने बताया कि यह सम्मेलन अटल जी को सच्ची श्रद्धांजलि है। विज्ञान भवन में देश-विदेश के विद्वानों का यह संगम हिंदी को वैश्विक भाषा के रूप में स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम होगा।

विक्रमादित्य सिंह, अध्यक्ष, विश्व हिंदी परिषद, ओड़िशा प्रदेश ने बताया कि भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी केवल देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री ही नहीं थे, बल्कि वे हिंदी के अप्रतिम साधक, संवेदनशील कवि, ओजस्वी वक्ता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रबल समर्थक भी थे। संयुक्त राष्ट्र के मंच से हिंदी में अपनी बात रखकर उन्होंने हिंदी भाषा का गौरव विश्व पटल पर स्थापित किया। उनकी कविता में संवेदना थी, उनके विचारों में राष्ट्र के प्रति समर्पण था और उनके नेतृत्व में सुशासन, संवाद तथा लोकतांत्रिक मर्यादाओं का संदेश था।

विश्व हिंदी परिषद, ओड़िशा प्रदेश की संयोजिका रितु महिपाल, उपाध्यक्ष, मनीष कुमार पाण्डेय, शैक्षणिक प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष, आशीष कुमार विद्यार्थी, महासचिव गोबिंद चौधरी, स्नेहलता दास, जैस्मीन पटनायक, पार्वती बारिक, मौसम तिवारी, ईश्वर मूर्मू सहित ओड़िशा प्रांत से 30 से अधिक साहित्यकार एवं कवि इस अंतराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।

सम्मेलन के दौरान “विश्व हिन्दी अन्वेषिका” शोध पत्रिका का लोकार्पण एवं 21 श्रेष्ठ शोध पत्रों का सम्मान किया जाएगा। इसके साथ ही देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, विभिन्न मंत्रालयों एवं संस्थाओं से जुड़े हिंदी अधिकारियों, वरिष्ठ पत्रकारों और लेखकों को हिंदी सेवा के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र और प्रतीक चिन्ह प्रदान किया जाएगा।

 

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