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कोटिया में फिर भड़का ओडिशा-आंध्र प्रदेश सीमा विवाद

  •     कांग्रेस नेताओं की आंध्र पुलिस से भिड़ंत

  •     कोटिया किसी की निजी या पुश्तैनी संपत्ति नहीं – भक्त चरण दास

  •     कहा-आंध्र प्रदेश की कथित अतिक्रमण गतिविधियों का करेंगे विरोध

कोरापुट। ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच लंबे समय से जारी सीमा विवाद एक बार फिर कोरापुट जिले के पोटांगी प्रखंड के संवेदनशील कोटिया पंचायत क्षेत्र में गरमा गया। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास के नेतृत्व में कांग्रेस के एक उच्चस्तरीय तथ्यान्वेषी प्रतिनिधिमंडल ने कोटिया का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्र की जमीनी स्थिति का जायजा लिया और आंध्र प्रदेश की ओर से कथित अतिक्रमण गतिविधियों का विरोध किया।

चक्रवात के प्रभाव से लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण प्रस्तावित सार्वजनिक सभा को खुले स्थान के बजाय कोटिया पंचायत कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में आयोजित किया गया। यहां प्रेस वार्ता और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।

कोटिया में राजस्व निरीक्षक का पद खाली रहने पर उठाए सवाल

बैठक को संबोधित करते हुए कोरापुट के सांसद सप्तगिरि उलाका ने कोटिया में राजस्व निरीक्षक (आरआई) का पद कई महीनों से खाली रहने पर जिला प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मामले में प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक व्यवस्था और निगरानी महत्वपूर्ण है।

उलाका ने ओडिशा के सत्तारूढ़ दल के सांसदों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में इन मुद्दों को प्रभावी ढंग से नहीं उठाए जाने के कारण कोटिया और पोलावरम जैसे विवादों का समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने इस मामले में राज्य के जनप्रतिनिधियों से सक्रिय भूमिका निभाने की मांग की।

दोनों राज्यों के आपसी संबंध खराब न करे आंध्र प्रदेश – कांग्रेस

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भक्त चरण दास ने आंध्र प्रदेश के प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि कोटिया में कथित अवैध गतिविधियों और चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से दोनों राज्यों के पारंपरिक संबंधों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह जमीन हमारी है, किसी की निजी संपत्ति नहीं। कोटिया के समृद्ध खनिज संसाधनों पर कब्जा करने की आंध्र प्रदेश की कथित साजिश को हम सफल नहीं होने देंगे।

दास ने कहा कि सीमा विवाद का समाधान आपसी सम्मान और संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप होना चाहिए। कांग्रेस ने कोटिया क्षेत्र में ओडिशा के हितों की रक्षा के लिए विरोध जारी रखने की बात कही।

उपरासेम्बी के पास आंध्र पुलिस से आमना-सामना

बैठक के बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल जब नेरिडिबालसा गांव की ओर बढ़ रहा था, तब उपरासेम्बी गांव के निकट ओडिशा के क्षेत्र में तैनात आंध्र प्रदेश पुलिसकर्मियों से उसका सामना हुआ। पुलिसकर्मियों की मौजूदगी को लेकर कांग्रेस नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई।

जयपुर के विधायक तारा प्रसाद वाहिनीपति ने आंध्र प्रदेश पुलिस के जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि यह आपकी पुश्तैनी संपत्ति नहीं है। इस क्षेत्र को तुरंत खाली करें।

इसके बाद आक्रोशित कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़क किनारे आंध्र प्रदेश पुलिस की ओर से लगाए गए कथित अवैध यातायात संकेतक बोर्डों को हटा दिया और ‘आंध्र वापस जाओ’ के नारे लगाए। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।

ओडिशा पुलिस ने संभाला मोर्चा

स्थिति को और बिगड़ने से रोकने तथा किसी अप्रिय घटना की आशंका के मद्देनजर ओडिशा पुलिस ने एहतियाती कदम उठाए। पुलिस ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को उसी रास्ते से वापस जाने से रोक दिया, जहां तनाव की स्थिति बनी थी। इसके बाद ऐतिहासिक ब्रिटिशकालीन सड़क के रास्ते प्रतिनिधिमंडल को सुरक्षित पटांगी प्रखंड मुख्यालय पहुंचाया गया।

प्रशासन की इस कार्रवाई का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच संभावित टकराव को रोकना और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।

कई विधायक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रतिनिधिमंडल में शामिल

कोटिया दौरे में स्थानीय विधायक रामचंद्र कडाम, लक्ष्मीपुर के विधायक पवित्र सैंटा, रायगड़ा के विधायक अप्पल स्वामी, गुनुपुर के विधायक सत्यजीत गोमांगो, विषमकटक के विधायक नीलमाधव हिकाका और चित्रकोंडा के विधायक मंगु खिल्ला शामिल थे।

इसके अलावा प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष मीनाक्षी वाहिनीपति, कोरापुट जिला कांग्रेस अध्यक्ष रूपक तुरुक और पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे।

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