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आंध्र प्रदेश और ओडिशा में लड़ाई तेज, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा कोटिया सीमा विवाद

  •  रायगड़ा कलेक्टर ने दायर की अवमानना याचिका

  • आंध्र प्रदेश के छह वरिष्ठ अधिकारियों को बनाया पक्षकार

  • यथास्थिति संबंधी निर्देशों के उल्लंघन का आरोप

नई दिल्ली। ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच कोटिया सीमा विवाद को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। ओडिशा के रायगड़ा जिला कलेक्टर ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि कोटिया ग्राम पंचायत क्षेत्र में पंचायत चुनाव कराने संबंधी आंध्र प्रदेश की अधिसूचना से दोनों राज्यों को यथास्थिति बनाए रखने के दिए गए न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन हुआ है। इस याचिका को शुक्रवार को डायरी संख्या 66727/26 के तहत दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

याचिका में आंध्र प्रदेश के छह वरिष्ठ अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है। इनमें राज्य के मुख्य सचिव जी साई प्रसाद, राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल चंद्र पुनेठा, गृह सचिव कुमार विश्वजीत, पंचायती राज सचिव मुताला राजू, पंचायती राज निदेशक वीआरके तेजा और पार्वतीपुरम मान्यम जिले के कलेक्टर एनपी रविशंकर रेड्डी शामिल हैं।

चुनाव प्रक्रिया न्यायालय के पूर्व निर्देशों के विपरीत

ओडिशा की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि कोटिया क्षेत्र में सरपंच और समिति सदस्य के चुनाव कराने की प्रक्रिया न्यायालय के पूर्व निर्देशों के विपरीत है। अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और आरोपों पर विचार सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में होगा।

1968 से न्यायिक विवाद, यथास्थिति का निर्देश अहम

कोटिया सीमा विवाद का मामला वर्ष 1968 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। विवाद के दौरान न्यायालय ने दोनों राज्यों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था, ताकि मामले के निपटारे तक क्षेत्र की प्रशासनिक स्थिति में एकतरफा बदलाव न हो।

वर्ष 2006 में मूल मुकदमा खारिज कर दिया गया था। हालांकि, ओडिशा का पक्ष है कि यथास्थिति बनाए रखने से संबंधित न्यायिक निर्देशों का महत्व अब भी बना हुआ है। राज्य ने जनवरी 2022 में सुप्रीम कोर्ट में एक नया मुकदमा भी दायर किया था, जिस पर कार्यवाही जारी होने की जानकारी दी गई है।

28 गांवों में से 21 पर दोनों राज्यों के दावे

कोटिया ग्राम पंचायत में कुल 28 गांव हैं, जिनमें से 21 गांवों पर ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच प्रतिस्पर्धी दावे बताए जाते हैं। सीमा विवाद के कारण इन गांवों में प्रशासनिक अधिकार और स्थानीय शासन से जुड़े सवाल लंबे समय से बने हुए हैं।

रायगड़ा कलेक्टर की अवमानना याचिका के बाद अब यह मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न के रूप में आया है। याचिका में लगाए गए आरोपों पर न्यायालय का निर्णय आना बाकी है।

सर्वदलीय बैठक बुलाएगी ओडिशा सरकार

विवादित क्षेत्र में पंचायत चुनाव कराने के लिए आंध्र प्रदेश की ओर से अधिसूचना जारी किए जाने के बाद ओडिशा सरकार ने दोहरी रणनीति अपनाई है। एक ओर राज्य सरकार ने सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेकर साझा रणनीति बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की घोषणा की है, वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के कथित उल्लंघन को लेकर आंध्र प्रदेश सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका भी दायर की गई है।

सभी दलों का सहयोग और सुझाव लिया जाएगा

राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा है कि कोटिया विवाद के स्थायी समाधान के लिए सभी राजनीतिक दलों का सहयोग और सुझाव लिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इस संवेदनशील सीमा विवाद पर राजनीतिक एकजुटता कायम करना और ओडिशा के क्षेत्रीय अधिकारों की रक्षा करना है।

कोटिया में मजबूत होगी ओडिशा की मौजूदगी

सीमा विवाद के बीच ओडिशा सरकार कोटिया क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने पर भी जोर दे रही है। मंत्री सुरेश पुजारी के अनुसार, क्षेत्र में पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।

स्थानीय निवासियों को सुभद्रा योजना, राशन कार्ड और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से स्थानीय लोगों के साथ प्रशासनिक जुड़ाव मजबूत होगा।

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